विस चुनाव में मुलायम का रथ रोकेंगे पूर्व सांसद रमाकांत

विस चुनाव में मुलायम का रथ रोकेंगे पूर्व सांसद रमाकांत

Ashish Kumar Shukla | Publish: May, 18 2016 08:16:00 AM (IST) Azamgarh, Uttar Pradesh, India

बस पार्टी के इशारे का है इंतजार, सदर से लड़ सकते हैं चुनाव

आजमगढ़. वर्ष 1991 से 2004 के बीच कई बार मुलायम के खेवनहार बने पूर्व सांसद रमाकांत यादव एक बार फिर 2017 में मुलायम सिंह के लिए सबसे बड़ी मुसीबत साबित होंगे। पूर्व सांसद आगामी विधानसभा चुनाव में पूर्वांचल में  भाजपा का यादव चेहरा बरेंगे। साथ ही आजगढ़ की आधा दर्जन सीटों पर इनके खास चुनाव मैदान में नजर आयेंगे। यदि पार्टी का इशारा मिला तो खुद रमाकांत यादव सदर विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में दिखेंगे।

गौर करें तो पूर्वांचल में भाजपा के पास यादव बिरादरी का कोई ऐसा नेता नहीं है जो मतों पर असर डाल सके। वर्ष 2008 में भाजपा में शामिल हुए
पूर्व सांसद रमाकांत यादव, यादवों के बड़े नेता के रुप में जाने जाते हैं। खासतौर पर यादव बिरादरी में इनकी गहरी पैठ है। यहीं वजह है कि रमाकांत जिस भी पार्टी में गये जीत हासिल की। वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में आजादी के बाद पहली बार आजमगढ़ कमल खिला तो उसके पीछे रमाकांत यादव की अपनी ताकत थी। हाल में हुए पंचायत चुनाव में भी रमाकांत यादव ने 4 सीटों पर भाजपा का ब्लाक प्रमुख जीताकर अपना दमखम साबित किया। 

भाजपा को एक बड़े यादव चेहरे की जरूरत है जो पूर्वांचल में सपा के प्रभाव को कम कर सके। इसके लिए पार्टी ने रमाकांत को चेहरा बनाने का फैसला किया है। वैसे इस मुद्दे पर अभी कोई नेता बोल नहीं रहा। किंतु अंदर खाने यह चर्चा जोर-शोर स चल रही है। दीदारगंज व फूलपुर विधानसभा सीट पर रमाकांत के परिवार से ही लोग मैदान में नजर आयेंगे। कुछ और सीटे जो यादव बाहुल्य है वहां भी रमाकांत के चहेतों को टिकट मिलना तय माना जा रहा है। सबसे अहम बात है कि चर्चा यह शुरू हो गयी है कि स्वयं रमाकांत यादव आजमगढ़ सदर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ेंगे। 

यहां से वर्तमान में दुर्गा प्रसाद यादव विधायक है और सरकार ने  इन्हें वन मंत्री बनाया है। दुर्गा प्रसाद यादव इस क्षेत्र से 8वीं बार विधायक हैं। उन्हें यहां अजेय माना जाता है लेकिन रमाकांत यादव मैदान में आते हैं तो इनके लिए मुसीबत खड़ी होगी। कारण कि रमाकांत जब भी लोकसभा चुनाव लड़े हैं। सदर क्षेत्र में उन्हें भारी बहुमत मिला है। 2014 के लोकसभा चुनाव को अपवाद के रुप में लिया जा सकता है। कारण कि इस चुनाव में यहां मुलायम सिंह यादव को बढ़त मिली थी। सदर से चुनाव लड़ने के संबंध में पूछने पर पूर्व सांसद ने कहा कि मुझे चुनाव लड़ना है या नहीं इसका फैसला पार्टी करेगी। पार्टी के सिपाही हूं पार्टी अगर चाही तो जरूर
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