BIG BREAKING- पीएम मोदी के नाम को बदनाम कर रहा मुलायम का आजमगढ , पांच गिरफ्तार

BIG BREAKING- पीएम मोदी के नाम को बदनाम कर रहा मुलायम का आजमगढ , पांच गिरफ्तार
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पीएम के स्वच्छता अभियान  बना कमाई का जरिया, पांच धराये, घरों पर स्टीकर लगाकर कर रहे थे वसूली, पूरे जिले में सक्रिय है इस तरह का गिरोह

आजमगढ़. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वच्छता अभियान लुटेरों के कमाई का जरिया बन गया है। एनजीओ की मिलीभगत से एक गिरोह लोगों को शौचालय, आवास व अन्य योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर घरों पर स्टीकर लगाकर ठगी कर रहा है। यह गिरोह पूरे जिले में सक्रिय है। अधिकारियों को आज तक इसकी खबर नहीं थी। एक ग्रामप्रधान ने समझदारी दिखाई तो गिरोह के सरगना सहित पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया। अब तक उक्त गिरोह के लोग लाखों रुपये का चूना लोगों को लगा चुके हैं। अब अगर मुलायम सिंह के संसदीय क्षेत्र में यह हाल है तो और जिलों में क्या हो रहा होगा, समझा जा सकता है। अहम बात है कि पकड़े गये आरोपियों में एक ने अधिकारियों के सामने दावा किया कि उसे जो आदेश निर्गत किया गया है, उस पर हस्ताक्षर असली है। ऐसे में सवाल यह भी उठने लगा है कि कहीं सरकारी तंत्र तो भी नहीं मिला है। 

बता दें कि भारत सरकार के स्वच्छता अभियान के तहत खुले में शौच मुक्ति स्वच्छता के प्रति जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसमें पूरा सरकारी अमला लगा हुआ है। इसी अभियान के आड़ में एक गिरोह पिछले कई महीनों से काम कर रहा है। इस गिरोह के लोग गांवों में जाते हैं और अधिकारियों का आदेश दिखाते है। फिर सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर ठगी करते हैं। हाल में निजामाबाद तहसील क्षेत्र के चकिया गांव में इसी तरह की एक टीम पहुंची थी। दो दिन पूर्व गिरोह से जुड़े कुछ लोग मार्टीनगंज ब्लाक के बनगांव ग्राम पंचायत में पहुंचे और प्रधान सूर्यनाथ यादव से मिलकर राशनकार्ड सत्यापन के संबंध में एडीओ पंचायत द्वारा जारी आदेश दिखाते हुए सहयोग मांगा। 

उक्त आदेश पर न केवल एडीओ पंचायत के हस्ताक्षर थे बल्कि सीडीओ, डीएम, डीपीआरओ आदि अधिकारियों के नाम प्रतिलिपि भी बनायी गयी थी। गिरोह के लोगों ने प्रधान से भी रिसीविंग ली और लौट गये। रविवार की सुबह वे फिर गांव में पहुंचे और अपने काम में लग गये। उन्होंने ग्रामसभा के पूर्वा मकदुमपुर में लोगों से बताया कि सरकार द्वारा सत्यापन कराया जा रहा है। इसके तहत सभी के घरों पर स्टीकर लगाया जायेगा। इसके बाद अधिकारी आकर लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करेंगे और गरीबी रेखा का कार्ड जारी कर शौचालय का लाभ देंगे। अन्य योजनाओं का लाभ तभी मिलेगा जब यह स्टीकर लगा होगा। इसके बाद उन्होंने स्टीकर लगाकर प्रति स्टीकर 30 से 50 रुपये तक वसूली शुरू की। ग्रामप्रधान को उन पर शक हुआ तो उन्होंने खंड विकास अधिकारी ज्ञान प्रकाश सिंह से बात की।

 बीडीओ ने बताया कि यह किसी गिरोह का काम है। इस तरह का कोई आदेश नहीं है। इसके बाद ग्राम प्रधान ने ग्रामीणों की मदद से मखदुमपुर में स्टीकर लगा रहे गाजीपुर जनपद के मगहर थाना क्षेत्र के शायर गांव निवासी गोपीचंद पुत्र मोतीचंद व बिहार प्रांत के चयनपुर थाना क्षेत्र के केवा गांव निवासी धर्मेन्द्र राय पुत्र नौजादी राय को पकड़ लिया। इसकी जानकारी होने पर गिरोह के अन्य सदस्य जो बनगांव में स्टीकर लगा रहे थे। बोरिया-बिस्तर बांध आटो से भगाने लगे लेकिन प्रधान के पुत्र अशोक यादव ने ग्रामीणों के साथ पीछा कर उन्हें महुजा मोड़ के पास पकड़ लिया। पकड़ा गया जितेंद्र सिंह पुत्र कालिका गाजीपुर जनपद के ससहा, भगवंत पुत्र श्रीराम भजन बिहार प्रांत के मोहनिया थाना क्षेत्र के देवरिया तथा विनोद पुत्र बाला बिहार प्रांत के चयनपुर थाना क्षेत्र के केवा गांव के निवासी है। सभी आरोपियों को गांव में पकड़ कर लाया गया तो उन्होंने स्वीकार किया कि वे सुरहन, खासडीह, कौरागहनी, दसमढ़ा, कोदहरा, सतैनी, वैरीचंद सहित दर्जनों गांवों में स्टीकर लगाकर लाखों लूट चुके हैं। उन्होंने 7 हजार स्टीकर बनवाया था जिसमें से डेढ़ सौ के करीब स्टीकर बचे हैं। 

arrestedतलाशी के दौरान उनके पास बनगांव में काटी गयी 129 रसीद व 3870 रुपये नकद बरामद हुए। ग्रामीणों ने इस संबंध में सीडीओ व डीएम से भी बात की तो उन्होंने भी किसी तरह के आदेश से इन्कार किया। ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और पांचों को थोन ले गयी। प्रभारी बीडीओ वीरेंद्र सिंह, ग्राम विकास अधिकारी मोतीलाल यादव प्रधान के साथ थाने पहुंच गये हैं। रिपोर्ट दर्ज कराने की प्रक्रिया चल रही है। अहम बात है कि ग्रामीणों के दबाव पर गिरोह के सरगना जितेंद्र सिंह ने स्वयं को सही बताते हुए यह दावा किया कि वे एक एनजीओ के लिए काम करते हैं। उसने एनजीओ संचालक के मोबाइल पर स्थानीय लोगों की बात भी करायी लेकिन एनजीओ संचालक को जैस पता चला कि वे पकड़े जा चुक हैं तो वह अपनी मोबाइल स्वीचआफ कर दिया। यही नहीं जितेंद्र का दावा है कि आदेश पर जो हस्ताक्षर हुआ है वह भी असली है। 

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