सूखती फसल देख किसानों के सब्र का बांध टूटा, कलेक्ट्रेट पर किया प्रदर्शन

नहर में पानी न छोड़े जाने से नाराज दिखे किसान

कभी भी समय से पानी न छोड़ने का लगाया आरोप

पानी न आने पर दी बड़े आंदोलन की चेतावनी डीएम सौंपा ज्ञापन

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
आजमगढ़. सिंचाई के आभाव में सूख रही फसल और प्रशासन की चुप्पी ने शनिवार को किसानों के सब्र का बांध तोड़ दिया। किसान लोकतान्त्रिक अधिकार एवं जन एकता समिति के बैनर तले कलेक्ट्रेट पहंुचकर प्रदर्शन किये तथा जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंप नहर में तत्काल पानी छोड़ने की मांग की। नहर में तत्काल पानी न आने पर किसानों ने बड़े आंदोलन की चेतावनी दी।

अध्यक्ष राजनेत यादव ने कहा कि शारदा सहायक खंड-32 नहर में पानी न छोड़े जाने सिंचाई कार्य प्रभावित हो रहा है। गरीब, कमजोर किसानों के समक्ष भारी संकट खड़ा हो गया है। उक्त नहर के पानी के भरोसे सैकड़ां गांव के किसान अपने खेतों की सिंचाई कार्य को पूरा करते है। 70 प्रतिशत किसान गेहूं की बुवाई 5 से 15 नवंबर के मध्यम कर चुके है। अब किसानों के खेतों को सिंचाई की आवश्यकता है लेकिन अब तक सिंचाई विभाग द्वारा पानी न छोड़ा जाना अक्षम्य लापरवाही है। शीध्र ही उक्त नहर में पानी न छोड़ा गया तो किसानों की खड़ी फसल बर्बाद हो जायेगी।

श्री यादव ने कहा कि पूर्वी उत्तर प्रदेश के 70 फीसदी किसान नहरों के ऊपर निर्भर है। गेहूं की पहली सिंचाई बुआई से 21 दिन के अंदर हो जानी चाहिए। विलंब होने पर गेहूं की फसल खराब हो जाती है। 80 फीसद किसान गेहूं की बुआई 5 से 20 नवम्बर के बीच कर चुके है। एक महीना बीतने के बाद भी आत तक शारदा सहायक खंड 32 सहित पूर्वांचल की मुख्य नहरों में पानी न आने से सुल्तानपुर, आजमगढ़, गाजीपुर आदि के लाखों किसानों की गेहूं की फसले नहरों में पानी न आने से झुलस गई है। नवम्बर माह में पानी रोक सिल्ट सफाई प्रत्येक वर्ष कराई जाती है। 5 से 10 दिसम्बर तक नहरों में पानी आ जाना चाहिए था लेकिन अभी तक पानी नहीं छोड़ा गया।

तत्काल नहरों में किसान सिंचाई के लिए पानी छोड़ा जाय। जिससे बड़े पैमाने पर सैकड़ों ग्रामीण किसान लाभांवित हो सकें। अगर कृषि कार्य हेतु तत्काल आवश्यक दिशा-निर्देश नहीं दिया गया तो किसान के हितों को लेकर समिति मुकर होकर अपनी आवाज बुलंद करेगी। जिसकी समस्त जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी। ज्ञापन सौंपने वालों में शम्भू शास्त्री, चन्देश यादव, शम्भू यादव, राहुल पांडेय, हरिहर प्रसाद, मुनी शंकर राय, रामदरश यादव, बनारसी राम, गौतम यादव आदि शामिल थे।

BY Ran vijay singh

रफतउद्दीन फरीद
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