अगर फसल में लगा है कंडुआ रोग तो किसान करें यह उपाय बच जाएगी फसल

रोग ने किसानों की उम्मीदों पर फेर दिया है पानी, बस पुवाल ही लग रही हाथ

आजमगढ़. वर्षो बाद समय से बरसात हुई थी, खेत में फसले लहलहा रही थी किसानों को लगा मानों इस बार सारे अरमान पूरे हो जाएंगे लेकिन एकाएक फसल में लगे कंडुआ (लेंढा) रोग ने किसानों की सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। खेत में खड़ी फसल रोग के कारण बर्बाद हो रही है लेकिन कृषि अधिकारियों का मानना है कि अगर शुरूआती दौर में रोग का निदान किया जाय तो फसल को बचाया जा सकता है।

 

बता दें कि इस बार समय से बरसात होने के कारण धान की फसल काफी अच्छी थी। माना जा रहा था कि बेहतर उत्पादन से किसान अच्छी आमदनी कर पाएंगे। किसान राम नरायन सिंह, रामजीत सिंह, प्रमोद सिंह, मार्कंडेय सिंह, मिथिलेश पांडये, संतोष राम, राम अवध राम, राम अजोर यादव, सतेंद्र सिंह, संतोष राम, पिंकू राय, अभिषेक आदि का कहना है कि इस बार धान की फसल से काफी उम्मीद थी। कारण कि पिछले वर्षो की अपेक्षा इस बार समय से बारिश शुरू हुई। जिसके कारण धान रोपाई के समय सिंचाई पर होने वाले खर्च में काफी कमी आयी। समय समय पर बरसात होने के कारण फसल में बालियां भी अच्छी लगी थी। उम्मीद थी कि अच्छा उत्पादन होगा और पिछली फसल के नुकसान की कुछ भरपाई होगी लेकिन रोग ने फसल को पूरी तरह तबाह कर दिया। अब लागत भी निकालना मुश्किल नजर आ रहा है।

 

कृषि अधिकारियों की मानें तो धान की देरी से रोपी गई विशेष कर संकर (हाइब्रिड) प्रजातियों के अलावा जल भराव वाले खेतों में यह रोग लग रहा है। यह बहुत ही हानिकारक रोग है। यह रोग एक बीज जनित बिमारी है जो बीज के जरिए होता है। इसलिए बुआई से पूर्व बीज का शोधन करना जरूरी होता है। इसके लिए बुआई से पूर्व कार्बेंडाजिम की दो ग्राम या ट्राइकोडर्मा की पांच ग्राम मात्रा से प्रति किग्रा बीज शोधन करने के बाद बुआई करना चाहिए। साथ ही खेतों में यूरिया का प्रयोग कम से कम करना चाहिए। प्रमाणित एवं रोग प्रतिरोधी किस्मों के बीजों का चयन करना चाहिए। वर्तमान में इस रोग के प्रकोप को देखते हुए किसान अपने फसलों की सतत निगरानी करते रहे। अगर कोई बिमारी ग्रसित पौधा दिखे तो उसे उखाड़कर नष्ट कर दें और खेत से पानी निकाल दें।

 

उप कृषि निदेशक कृषि रक्षा गोपाल दास गुप्ता ने बताया कि यह रोग बाली निकलने के बाद प्रगट होता है। शुरूआत में धान की बालियां गहरे पीने रंग की हो जाती है। बाद में उसके दाने फूलकर काले रंग के हो जाते हैं। हाथे से छूूने पर हाथ में पीले अथवा काले रंग के पाउडर जैसे रोग के स्पोर लग जाते हैं। इस रोग के लक्षण दिखाई देने के बाद सबसे पहले खेत से पानी को निकाल दें। फिर प्रोपिकोनाजोल 25 प्रतिशत ईसी की 200 मिली या कार्बेंडाजिम 50 प्रतिशत डब्ल्यूपी की 200 ग्राम मात्रा को 200 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ छिड़काव करें। आवश्यकता होने पर 8-10 दिन बाद दोबारा छिड़काव करें।

BY Ran vijay singh

रफतउद्दीन फरीद
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