कागजी लड़ाई में उलझ सकती है सतीश कौशिक की सत्य घटना पर आधारित फिल्म कागज

लाल बिहारी मृतक ने फिल्म निर्माता सतीश कौशिक पर लगाया धोखाधड़ी का आरोप

न्याय के लिए उच्च न्यायालय जाने की दी चेतावनी, कहा मेरे साथ किया गया धोखा

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
आजमगढ़. बहु प्रतिक्षित सत्य घटना पर आधारित फिल्म कागज के रिलीज से पहले फिल्म निर्देशक सतीश कौशिक पर फ्राड का आरोप लगा है। जिस लाल बिहारी मृतक के जीवन पर आधारित यह फिल्म बतायी जा रही है उसी मृतक ने सतीश कौशिक पर तथ्यों से छेड़छाड़ करने व धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया है। यहीं नहीं उन्होंने कौशिक के खिलाफ कोर्ट जाने की चेतावनी दी है।

मीडिया से बात करते हुए लाल बिहारी मृतक ने कहा कि 7 जनवरी 2021 को रिलीज होने वाली कागज फिल्म के निर्देशक सतीश कौशिक ने भाई-भाई कहकर मेरे साथ विश्वासघात किया है। एग्रीमेंट की कॉपी मांगने पर वे आनाकानी करते हैं। उन्होंने मेरे साथ धोखाधड़ी कर इंग्लिश में लिखे पेपरों पर फिल्म बनाने के नाम पर मेरे जीवित मृतक के संघर्षो को आजीवन फर्जी नोटरी बयान हलफी पर हस्ताक्षर कराकर मौलिक अधिकारों को हड़पने, बधुआ मृतक बनाकर मुझे बदनाम करने की साजिश की।

लाल बिहारी ने कहा कि मेरा जन्म दिनांक 6 मई 1955 में ग्राम खलीलाबाद थाना निजामाबाद में हुआ। पिता चैथी की मृत्यु होने के बाद बचपन से अमिलो थाना मुबारकपुर तहसील सदर आजमगढ़ में मेरा पालन पोषण हुआ है। बालश्रमिक के रूप में बनारसी साड़ी की बुनाई करने लगा। लोन लेने के लिए बैंक गया तो जमीन का कागज माँगा गया। तब पता चला की न्यायालय नायब तहसीलदार सदर आजमगढ़ मुकदमा नं 298 के अंतर्गत दिनांक 30 जुलाई 1976 को मृत घोषित कर दिया। मान-सम्मान, मौलिक अधिकारों के लिए संघर्ष करता रहा और मृतक संघ बनाकर अपने नाम के साथ मृतक टाईटल जोड़ लिया। लगभग 18 वर्ष की लड़ाई के बाद 30 जून 1994 को सरकारी अभिलेखों में मुर्दा से पुनः जिन्दा हो गया। अपने साथ-साथ हजारों-हजार धोखाधड़ी से पीड़ितों जीवित मृतकों की हड़पी हुयी जमीनों, मकानों को जिला प्रशासनों से वापस दिलाकर जन न्याय कर मानव अधिकारों की रक्षा किया।

सतीश कौशिक फिल्म निर्देशक फिल्म बनाने के लिए 2003 में इम्तेयाज हुसैन फिल्म राइटर के साथ घर आये। फिल्म का काम शुरू कर दिए। बार बार मुंम्बई, दिल्ली, लखनऊ, आजमगढ़, सीतापुर बुलाते रहे। मेरा पूरा परिवार 18 वर्ष से साथ देकर सहयोग करता रहा। कागज फिल्म में मेरा लिखा 2 गाना है। संघर्षो की कहानी को तोड़-मरोड़ कर किसान बुनकर की जगह बैंडबाजा वाला बना दिया गया है और लाल बिहारी मृतक की जगह भरत लाल मृतक बताया गया है। मेरे लिए अछूत शब्द का प्रयोग किया गया है।

उन्होंने कहा कि फिल्म एग्रीमेंट की कॉपी बार-बार मांगने पर हीलाहवाली करते रहे। एक बार भी मुझको फिल्म की कहानी नहीं सुनाये, न ही फिल्म दिखाए। फिल्म की रिलीज होने की बात सुनकर फिल्म देखने के लिए कहा तो फिल्म दिखाने से मना कर दिए और एग्रीमेंट की कॉपी फिर से मागने पर नोटिस द्वारा कहा गया की आपके जीवन का सारा अधिकार मेरे पास है। कई वर्षों से कई लोग कहानी मांगते रहे तो ये बार-बार रोक लगाते रहे। मृतक ने कहा कि क्या मैं जिन्दगी भर अपने हक की लड़ाई लड़ता रहूँ? भीख मांगकर दर-दर भटकता रहूँ। परिवार की जिन्दगी को बर्बाद करता रहूँ। मेरे संघर्षों की कहानी का लाभ सतीश कौशिक 100 रूपये के स्टाम पर हस्ताक्षर कराकर बेचकर अपने हवेलियों में ऐश कर तिजोरी भरते रहे? क्या ऐसे ही सत्य घटना पर आधारित ऐसी फिल्म बनती है? जो पुरस्कार के लिए लोग दावा करते रहते है। 7 जनवरी 2021 को रिलीज होने वाली फिल्म कागज पर रोक लगाया जाय।

BY Ran vijay singh

रफतउद्दीन फरीद
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