हर्षोल्लास के साथ ऐसे मनाया गया होली का त्योहार

 हर्षोल्लास के साथ ऐसे मनाया गया होली का त्योहार
Azamgarh special Holi 1

Mohd Rafatuddin Faridi | Updated: 13 Mar 2017, 06:15:00 PM (IST) Azamgarh, Uttar Pradesh, India

लोगों ने जमकर उड़ाये अबीर गुलाल

आजमगढ़. प्रेम सौहार्द व भाईचारे का अनुपम महापर्व होली सोमवार को पूरे जनपद में लोक प्रचलित परम्पराओं के  अनुसार हर्षोल्लास पूर्ण वातावरण में मनायी गयी। रंगों की इन्द्रधनुषी फुहारों व अबीर-गुलाल के बीच बैण्ड की धुन, जोगीरा के राग के साथ अलमस्तों की टोली हुड़दंग करती सड़कों से लेकर गांवों की पगडण्डियों तक भोर से लेकर देर रात तक झूमती-गाती रही।



रहा सवाल ग्रामीण क्षेत्रों का तो यहां लोग घर-घर जाकर लोगों ने एक दूसरे के संग होली खेली। रंग-अबीर व गुलाल लगाये, गुझिया, पापड़ संग अनेक प्रकार के पकवानों की दावत उड़ाई। भंग की तरंग में डूबे उतराये तो मदिरा के जाम भी छलकाये। कुल मिलाकर हर ओर मस्ती का आलम था। प्रेम की फुहार बरस रही थी। ऊंच-नीच, अमीर-गरीब, जातपात, भेदभाव व सारी कटुता व वैमनस्यता की सभी दीवारें ढह गयी थीं। सभी आपस में गले मिलकर एक-दूसरे को होली की बधाईयां व शुभकामनायें दे रहे थे।



रविवार की रात होलिका दहन के बाद ही चहुंओर आनन्द धन बरसने लगा। फाग के राग और ऊंचे हो गये, ढोल की थाप और तीव्र। पूरी रात लोग नाच-गाकर होली की मस्ती का मजा ले रहे थे। घरों में महिलाएं पूरी रात विभिन्न प्रकार के पकवान बनाने में जुटी रहीं। होलिका दहन के लिए शाम से ही युवा और बच्चे उपले, लकडियों और खरपतवार एकत्र करने में जुट गये थे। निर्धारित समय पर वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच विद्वान ब्राह्मणें ने दहन की परम्परा को सम्पन्न कराया।



Azamgarh special Holi



सुबह होते ही उत्साह से लबरेज युवाओं व बच्चों की टोली रंग, गुलाल व अबीर लेकर एक दूसरे को सराबोर करने में जुट गई। घरों में रिश्तों की मिठास प्रगाढ़ बनाने के बाद लोग मुहल्लों में और फिर सड़कों पर उतर पड़े। अलमस्तों की यह टोली राग फाग के पारम्परिक गीतों के अलावा लोकगीत व फिल्मी होली गीतों की धुन पर बैण्डबाजों से युक्त होकर निकल पड़ी पूरे शहर और गांव को भिगोने। हर गली हर दरवाजे पर रुकते नृत्य करते एक दूसरे को रंगों से सराबोर करने के बाद अबीर-गुलाल उड़ाते सबको तिलक लगाकर गले मिलते, गुझिया व अन्य पकवान खाते, ठंडई व भंग घोलते उल्लास की तरंगों में डूबते-उतराने का यह क्रम दोपहर बाद तक चलता रहा। इस दौरान अनेक स्थानों पर कीचड़, गोबर, रंग और गुब्बारों का भी जमकर प्रयोग हुआ।



इसके बाद स्नानादि से निवृत्त हो पुनरू सूखे गुलाल लेकर सबको तिलक लगा बड़ों का आशीर्वाद लेने और गले लगाने तथा दावतों का दौर शुरू हुआ, जो देर रात तक चलता रहा। अनेक स्थानों पर होली के हुड़दंग में झड़पें व विवाद भी हुए। उल्लास व मौज मस्ती में क्षणिक खलल भी पड़े किन्तु फिर सब यथावत चलता रहा। इस दौरान किसी बड़ी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए ड्यूटी पर तैनात पुलिस के जवान त्योहार की मस्ती का आनन्द लेते हुए भी अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहे। इस दौरान कई स्थानों पर मटका फोडने की प्रतियोगिताएं भी हुई।
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