#TOP CRIMINALS- फिर चर्चा मे आजमगढ़,  करोड़ों का चूना लगाने वाले साइबर गिरोह का खुलासा

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तीन अन्र्तराज्यीय साइबर अपराधी गिरफ्तार, एटीएम कार्ड  नम्बर और पासवर्ड के जानकर करते थे हेराफेरी

आजमगढ़. साइबर अपराध के जरिये लोगों को करोड़ो का चुना लगा चुके अन्र्तराज्यीय साइबर अपराधियों के गिरोह का पर्दाफाश करते हुए अतरौलिया थाने के पुलिस ने तीन अपराधियों को गिरफतार कर लिया। गिराह के अन्य लोगों की गिरफतारी के लिए पुलिस प्रयासरत है। उक्त अपराधी यूपी ही नही बिहार, झारखंड, दिल्ली आदि राज्यो के लोगों को भी करोड़ो रूपये का चुना लगा चुके है। पुलिस की माने तो यह प्रतिदिन फेक एकाउन्ट के जरिये लाखो रूपये की हेराफेरी करते थे।
      
 पुलिस अधीक्षक अजय कुमार साहनी ने गुरूवार को बताया कि एसएसबी के हेड कांस्टेबल शैलेन्द्र कुमार मिश्रा के खाते से पिछले दिनो चार दिन में 2.50 लाख रूपये साइबर अपराधियों द्धारा निकाल लिया गया था। उक्त मामले में कांस्टेबल द्धारा अतरौलिया थाने में मामला पंजीकत किया गया था। साइबर अपराधियों की गिरफतारी के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा था। जांच के लिए गठित टीम को विवेचना के दौरान पता चला कि झारखंड के जामतारा में साइबर अपराधियों का सक्रिय अन्र्तराज्यीय गिरोह है जिसके सदस्य जिला बेगूसराय में रहकर साइबर अपराध को अंजाम दे रहे है। इसके बाद गिरफ्तारी के लिए गठित टीम क्षेत्रधिकारी डा0 के0के0 सरोज के नेतत्व में बेगूसराय बिहार गयी। 

19 जुलाई को एसएचओ बरौनी की मदद से तीन साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया। पूछताछ के दौरान पता चला कि झारखंड प्रान्त के जामतारा जिले के कर्माटाड थाना क्षेत्र के झीलूआ गांव निवासी लखनमंडल पुत्र बीरबल गिरोह का सरगना है ।जिसके साथ मिलकर सभी साइबर को अपराध को अंजाम देते है। गिरफतार अभियुक्तो में अविनाश कुमार पुत्र शिवकुमार, बिहार के बेगूसरया जनपद के महना विकास कुमार पुत्र रोम शंकर सिंह कस्बे तेरह पाई टोला तथा अभिनव कुमार पुत्र शिवकुमार सिंह महना गांव के निवासी है। अविनाश ने स्वीकार किया कि लखनमंडल अन्य प्रान्त के फेक आईडी पर सीम प्राप्त कर लोगों से बात करता था।

 स्वयं को बैंक मैनेजर बताते हुए एटीएम कार्ड का नम्बर और पासवर्ड जान लेता था। इसके बाद इंटरनेट के जरिए आनलाइन पेमेन्ट, गेटवे (मोबिकविक), पेटीएम, आक्सीजन के माध्यम से पैसा दूसरो खातो में ट्रासफर करने, शापिंग, मोबाइल, टीवी आदि रिचार्ज करता था। अविनाश के मुताबिक वे लखनमंडल को कई बैंक खाते पैसा ट्रासफर करने के लिए देते थे। पुलिस अधीक्षक के मुताबिक उक्त अपराधी फेक एकाउन्ट के जरिए प्रतिदिन लाखो रूपये दूसरे के खाते से गायब करते थे महीने में करोड़ो का खेल होता था। यह मामला अन्र्तराष्टीय भी हो सकता है। जिसकी जांच की जा रही है। 

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