इजराइल की मंत्री रोनी एडिडिया सेलिन को भाई आजमगढ़ की पाटरी, खुद चाक पर फेरा हाथ

काली मिट्टी की चूड़ी व फ्लावर पाट याद के तौर पर साथ ले गई सेलिन

पीएम के वोकल फार लोकल अभियान के तहत आयोजित दीपावली उत्सव में नोयडा पहुंचा था 50 सदस्यीय दल

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
आजमगढ़. आखिरकार प्रधनमंत्री नरेंद्र मोदी और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ का प्रयास रंग लाने लगा है। अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही ब्लैक पाटरी ने एक बार फिर दुनियां में अपनी चमक बिखेरनी शुरू कर दी है। एक जनपद एक उत्पाद में शामिल निजामाबाद की ब्लैक पाटरी की चमक इजराइल तक पहुंच गई है। इसका माध्यम बना प्रधानमंत्री के वोकल फार लोकल अभियान के तहत नोयडा में आयोजित दीपावली उत्सव। उत्सव में शामिल होने के लिए पहुंची इजराइल की मंत्री रोनी एडिडिया सेलिन ने ब्लैक पाटरी उत्पाद चूड़ी खरीदी। साथ ही एक फ्लावर पाट बनवाकर याद के तौर पर अपने साथ ले गईं।

बता दें निजामाबाद का ब्लैक पाटरी कभी पूरी दूनियां में अलग पहचान रखता था लेकिन सरकारों की उपेक्षा के कारण यह गर्त में पहुंच गया था। यहां के कुम्हार कारोबार बंद कर पलायन को मजबूर थे। वर्ष 2017 में यूपी में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार बनी तो उन्होंने एक जनपद एक उत्पाद योजना शुरू की। पाटरी और साड़ी उद्योग को नया जीवन देने के लिए जिले के दोनों उत्पादों को इस योजना में शामिल किया गया। तब से ब्लैक पाटरी निरंतर प्रगति कर रही है। यह भी कहा जा सकता है कि इसकी खोई हुई पहचान फिर से वापस लौट रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वोकल फार लोकल अभियान से इसे और बल मिला है। इस अभियान के तहत ही शिल्पकारों और बुनकरों के कार्यों को सीधे लोगों तक पहुंचाने के लिए उत्तर प्रदेश डिजाइन संस्थान (यूपीआइडी) और नोएडा अथार्टी ने मिलकर 30 अक्टूबर से 12 नवंबर तक नोयडा में दीपावली उत्सव का आयोजन किया था। इसमें निजामाबाद के हुसैनाबाद निवासी राष्ट्रीय व राज्य पुरस्कार से सम्मापित शिवरतन प्रजापति का भी स्टाल लगा था।

उत्सव के आखिरी दिन 50 सदस्यों का विदेशी प्रतिनिधिमंडल प्रदर्शनी को देखने के लिए पहुंचा। इसमें इजराइल की मंत्री (डिप्टी चीफ आफ मिशन) रोनी एडिडिया सेलिन भी शामिल थीं। प्रदर्शनी भ्रमण के दौरान इजराइल की मंत्री रोनी एडिडिया सेलिन को ब्लैक पाटरी के उत्पाद काफी पसंद आये। उन्होंने काली मिट्टी की बनी चूड़ी खरीदी, जिसका उन्होंने 600 रुपये भुगतान भी किया।

इसके बाद उन्होंने मिट्टी के बने बर्तन को देखा और फिर चाक पर अंगुलियों का हुनर भी देखा। उन्होंने खुद चाक पर बर्तन बनाने का प्रयास किया। इसके बाद छोटा फ्लावर पाट बनवाया और भारतीय याद के रूप में अपने साथ ले गईं। उत्सव से लौटने के बाद शिवरतन प्रजापति ने बताया कि काली मिट्टी के उत्पाद एक बार फिर अपनी चमक बिखेरने लगे है। हमें भरोसा है कि जल्द ही इसे अपनी खोयी हुई ख्याति वापस मिलेगी।

BY Ran vijay singh

रफतउद्दीन फरीद
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