निरहुआ हारा या संगठन की कमजोरी ने अखिलेश यादव को दिलायी आजमगढ़ से बड़ी जीत

निरहुआ हारा या संगठन की कमजोरी ने अखिलेश यादव को दिलायी आजमगढ़ से बड़ी जीत
अखिलेश यादव निरहुआ

Mohd Rafatuddin Faridi | Publish: May, 26 2019 11:11:34 AM (IST) Azamgarh, Azamgarh, Uttar Pradesh, India

  • निरहुआ हारा या संगठन की कमजोरी ने अखिलेश को दिलाई बड़ी जीत।
  • पांच में से एक भी विधानसभा में नहीं जीती भाजपा।

आजमगढ़. यूपी में तीन दलों के गठबंधन के बाद भी बीजेपी की सुनामी रोकने रोकने में विपक्ष नाकाम रहा लेकिन आजमगढ़ की दोनों सीट बीजेपी ने बड़े अंतर से गंवा दी। ऐसे में चर्चा इस बात की शुरू हो गयी है कि आखिर मोदी की लहर यहां तक क्यों नहीं पहुंची। आजमगढ़ पर अखिलेश ने बड़ी जीत हासिल की है या फिर भाजपाइयों की गुटबंदी और आपसी खींचतान ने यह सीट खुद अखिलेश की झोली में डाल दिया है। आखिर क्या वजह थी कि भाजपाई सत्ता में होने के बाद भी 30 से 35 प्रतिशत बूथों पर प्रत्याशी एजेंट तक खड़ा नहीं कर पाए। आखिर इनका चुनावी प्लान लीक होकर मतदान से पहले ही विपक्ष के पास कैसे पहुंच गया। इसका जवाब खुद वे भाजपाई भी ढूंढ़ रहे हैं जो पार्टी के प्रति समर्पित है। कारण कि इस चुनाव में बीजेपी ने वोट जरूर 2014 के मुकाबले अधिक हासिल किया है लेकिन पांचों विधानसभा वे पिछले चुनाव की अपेक्षा बड़े अंतर से हारे हैं। अंदर खाने से संगठन में शामिल विभीषणों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठने लगी है।


यदि देखा जाय तो यह चुनाव वर्ष 2014 के चुनाव से कई मामलों में अलग था। सपा बसपा गठबंधन कर मैदान में उतरी थी। जिससे कहीं यादव नाराज थे तो कुछ स्थानों पर स्थानीय झगड़ों का भी असर था। इसी संसदीय क्षेत्र में कई जगह दलित और यादवों के बीच में संघर्ष हुआ जिससे भाजपा के पक्ष में माहौल बना। भाजपा ने दिनेश लाल यादव के रूप में निर्विवाद प्रत्याशी मैदान में उतारा है। प्रत्याशी को लेकर कोई नाराजगी नहीं थी। जैसा कि रमाकांत को लेकर सवर्णो में होती थी। निरहुआ का ग्लैमर भी बीजेपी को लाभ पहुंचा रहा था। निरहुआ के आने से अगर किसी को खतरा लग रहा था तो वे टिकट के दावेदार थे। फिर भी उम्मीद थी कि लड़ाई बराबर की होगी। कारण कि दलित यादव और मुस्लिम गठबंधन के साथ थे और इनकी आबादी यहां पचास प्रतिशत है। सवर्ण अदर बैकवर्ड पूरी ताकत से बीजेपी के साथ खड़ा था। इस सीट पर इनकी आबादी भी पचास प्रतिशत ही है।
ल्ेकिन भाजपाई निजी स्वार्थ और गुटबंदी से उबर नहीं पाए।

 

यूपी में सरकार इनकी थी लेकिन वे अपना दल की मुखिया केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया की सभा सगड़ी में नहीं करा पाए जबकि कार्यक्र्रम लगा था और यहां पटले मतों की संख्या भी काफी है। मंत्री का हेलीकाप्टर इसलिए नहीं उतरा क्योंकि हेलीपैड़ बाग के बीच बना दिया गया था आखिर बीजेपी का चुनाव प्रबंधन क्या कर रहा था। वे एक सुरक्षित हेलीपैड तक नहीं बनवा सके और जब सभा नहीं हो पाई तो ठिकरा प्रशासन पर फोड़ दिया।


यह जिला पिछड़ा बाहुल्य है लेकिन बीजेपी संगठन ने पूरे चुनाव में पिछड़े नेताओं को दरकिनार किया। जैसा की पूर्वांचल एक्सप्रेस वे के शिलान्यास के समय किया गया था। उस समय पिछड़े नेताओं ने समय रहते सीएम के सामने आवाज उठा दी थी तो मोदी की रैली का प्रभार वन मंत्री दारा सिंह चौहान को सौंप हालात को सामान्य बना दिया गया था लेकिन चुनाव में पिछड़ों की अनदेखी का ध्यान नहीं दिया गया। कुछ को जिम्मेदारी सौंपी भी गई तो फिर उन्हें हटा दिया गया। चुनाव प्रबंधन की जिम्मेदारी ज्यादातर उन सवर्ण नेताओं को सौंपी गयी जिनपर विधानसभा चुनाव में भीतरघात का आरोप लगा था।


हद तो तब हो गयी जब मतदान से पहले ही पार्टी का सिक्रेट प्लान लीक हो गया और पूरी फाइल विपक्ष के पास पहुंच गयी। पार्टी के लोगों ने इस मुद्दे को सोशल मीडिया पर उठाया लेकिन बड़ी खूबसूरती से इस मामले को यह कह कर दबा दिया गया कि चुनाव में सिक्रेट कुछ नहीं होता। यह सिर्फ अफवाह है। पार्टी सूत्रों की माने तो मतदान के दिन भाजपा के लोग बूथों पर अपना एजेंट तक नहीं तैनात कर सके।

 

30 से 35 प्रतिशत बूथ एजेंट से खाली रहे। यहां सीधे जनता ने मोदी के लिए चुनाव लड़ा और खुद जाकर मतदान किया। इसके बाद भी जीत का दावा पार्टी के पदाधिकारी करते रहे। जब परिणाम आया तो लोगों के होश उड़ गए। यह अलग बात है कि पार्टी के पदाधिकारी हार पर मंथन के बजाय पिछले चुनाव की अपेक्षा इस बार मिले एक लाख अधिक वोट का जश्न मना रहे है। जबकि पिछली बार जो विधानसभा पार्टी पांच हजार मतों से हारी थी इस बार वहां अंतर पचास हजार का है।

 

आजमगढ़ सीट पर विधानसभा वार मिले मत

प्रत्याशी गोपालपुर सगड़ी मुबारकपुर आजमगढ़ मेंहनगर डाक मत टोटल
अखिलेश यादव सपा 119084 110554 136460 129103 124393 1984 621578
दिनेश लाल यादव भाजपा 66144 71378 58400 85547 78786 1449 361704
अभिमन्यु सिंह सुभासपा 2508 895 2109 898 3667 1 10078
अनिल सिंह उलेमा कौंसिल 1906 1185 933 1193 1544 2 6763
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