क्षत्रिय महासभा ने एससी/एसटी एक्ट के विरोध में की बैठक, लिया ये फैसला

क्षत्रिय महासभा ने एससी/एसटी एक्ट के विरोध में की बैठक, लिया ये फैसला

Mohd Rafatuddin Faridi | Publish: Sep, 10 2018 07:01:26 PM (IST) Azamgarh, Uttar Pradesh, India

कहा सांसदों ने SC/ST एक्ट का विरोध न कर ठीक नहीं किया।

आजमगढ़. क्षत्रिय महासभा की सोमवार को बेलहा में हुई बैठक में एससी-एसटी एक्ट को प्रभावी बनाने का विरोध किया गया। सरकार से कानून वापस लेने की मांग की गयी।

 

उमाशंकर सिंह ने कहा कि जिस तरह अध्यादेश लाकर सांसद में एससी-एसटी एक्ट का कानून बनाया है उससे अब इसका खुलकर दुरुपयोग हो गया है। संसद में इस काले कानून को पारित होने में सभी सांसदों की रजामंदी थी। किसी भी सदस्य ने इसके विरोध में आवाज नहीं उठाई न तो इसके पर सवाल खड़ा किया। सरकार की इस नीति का हम पूरजोर विरोध करते है और जनजन से अपील करते है वे इस कानून के विरोध में खड़े होकर आपत्ति जताये।

 

जितेद्र सिंह ने कहा कि सरकार एक तरफ सबका साथ सबका विकास की बात करती है, दूसरी तरफ एससी-एसटी कानून के लिए अध्यादेश लाकर कहीं न कहीं समाज को बांटने का प्रयास करती है। सरकार की मंशा जातीय हिंसा भड़काना हैं। श्री सिंह ने कहा कि राज्यसभा व लोकसभा के किसी भी सदस्य द्वारा विरोध ना करना लोकतंत्र की हत्या है। महासभा इसकी घोर निंदा करता है, समर्थन देने वाले सभी सांसदों की आलोचना की गई। निश्चित रूप से सरकार को इस काले कानून को वापस लेना चाहिए। ऐसा ना करने पर क्षत्रिय महासभा लोकतांत्रिक तरीके से सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज करायेगा।

 

बैठक में दयानंद सिंह, उमाशंकर सिंह, राधेश्याम सिंह, विजय बहादुर सिंह, सत्य प्रकाश सिंह, राजबहादुर सिंह, सुरेंद्र सिंह, अवधेश सिंह, शिव कुमार सिंह, जय प्रकाश सिंह, रामदुलारे सिंह, विजय शंकर सिंह, भूपेंद्र सिंह, शेषनाथ सिंह, अवधेश सिंह आदि उपस्थित थे।

 

बताते चलें कि सूबे के कैबिनेट मंत्री स्वमी प्रसाद मौर्य भी सोमवार को आजमगढ़ पहुंचे थे और वहां उन्होंने अपने बयान में कहा कि सवर्ण समाज को एससीएसटी एक्ट से दिक्कत नहीं बल्कि जो लोग दलितों पर अत्याचार करते हैं उन्हें इससे परेशानी है। उन्होंने दावा किया कि आम सवर्ण लोग एससी एसटी एक्ट के विरोध में बिल्कुल नहीं हैं।

By Ran Vijay Singh

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