किसान जरूर कराएं भूमि की जांच, नहीं तो बंजर हो सकती है आपकी कृषि भूमि

लगातार रासायनिक उर्बरकों के प्रयोग से कृषि भूमि अपनी उर्बरा शक्ति को खोती जा रही है। इससे न केवल कृषि भूमि के बंजर होने का खतरा बढ़ रहा है बल्कि फसल का उत्पादन भी लगातार घट रहा है। जिले में लालगंज ब्लाक में मिट्टी की हालत सबसे खराब पाई गयी है। वहीं मार्टीनगंज में नाइट्रोजन की मात्रा अति न्यूज पाई गयी है।

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
आजमगढ़. लगातार रासायनिक उर्बरकों के प्रयोग से कृषि भूमि की उर्बरा शक्ति नष्ट होती जा रही है। इसका सीधा असर फसल उत्पादन पर पड़ रहा है। लागत लगाने के बाद भी किसान अच्छा उत्पादन नहीं कर पा रहा है। वहीं भूमि के बंजर होने का खतरा अलग से बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसान मिट्टी की जांच कराकर न केवल पोषक तत्वों की कमी को दूर कर सकते हैं बल्कि उत्पादन भी बढ़ सकते है। किसानों की मदद के लिए अभियान भी शुरू किया गया है।

बता दें कि किसानों द्वारा फसलों के उत्पादन के लिए बड़े पैमाने पर उर्वरक का प्रयोग किया जाता है। जिसके कारण उन्हें अपनी फसलों में ज्यादा लागत लगानी पड़ती है। वहीं भूमि में पोषक तत्वों की कमी लगातार बढ़ती जा रही है। इसे देखते हुए सरकार ने मृदा परीक्षण कार्यक्रम की शुरूआत की गई। ताकि किसान अपनी खेत की मिट्टी के बारे में जाने और जरूरी पोषक तत्वों का प्रयोग कर कम लागत में अच्छी उपज प्राप्त करें लेकिन जागरूकता के आभाव में लोग आज भी जांच से परहेज कर रहे हैं।

स्थिति यह है कि सरकार की यह योजना सफल होती नहीं दिख रही है। क्योंकि विभाग ने किसानों को मृदा हेल्थ कार्ड जारी कर जिम्मेदारी से मुक्ति पा ली है और किसान भी इसे गंभीरता से नहीं ले रहा है। स्थिति यह है कि कृषि भूमि अपनी गुणवत्ता लगातार खोती जा रही है। विभाग द्वारा कराये गए एक सर्वे के मुताबिक जिले में लालगंज विकास खंड के मिट्टी की हालत सबसे ज्यादा खराब मिली थी, जबकि मार्टीनगंज ब्लाक में नाइट्रोजन की मात्रा अति न्यून पाई गई थी।

जिला भूमि संरक्षण अधिकारी संगम सिंह का कहना है कि जनपद में मृदा परीक्षण शुरू होने के बाद गांव में कृषक गोष्ठियों का आयोजन किया गया। किसानों को उनके खेत की कमियों को दूर करने के उपाय बताए गए। साथ ही अनुदान पर उन्हें ढ़ैंचा का बीज भी उपलब्ध कराया गया है। उनका कहना है कि किसान मिट्टी की जांच कराता है तो फसल की लागत भी कम आयेगी। कारण कि मिट्टी में जिन पोषक तत्वों की कमी होगी फसल में उसी का प्रयोग करना होगा। इसलिए किसान को अनिवार्य रूप से अपने खेत की मिट्टी की जांच करानी चाहिए।

BY Ran vijay singh

रफतउद्दीन फरीद
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