आजमगढ़ में भव्य रूप से मनी मकर संक्रांति, संगम में हजारों ने लगाई डुबकी

आजमगढ़ में भव्य रूप से मनी मकर संक्रांति, संगम में हजारों ने लगाई डुबकी

Mohd Rafatuddin Faridi | Publish: Jan, 15 2018 05:43:52 PM (IST) Azamgarh, Uttar Pradesh, India

आजमगढ़ के तमसा-सलिनी नदी के संगम में मकर संक्रांति पर हजारों लोगों ने लगायी डुबकी।

आजमगढ़. मकर संक्रान्ति का पर्व सोमवार को धूमधाम से मनाया गया। लोगों ने संगम स्थल व प्रमुख नदी, सरोवरों में स्नान किया और भगवान भास्कर को नमन कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। दुर्वासा धाम पर तमसा-मंजूषा, दत्तात्रेय धाम पर तमसा-कुंवर, चन्द्रमा ऋषि के पास तमसा-सिलनी नदी के संगम में लोगों ने डुबकी लगायी। तमाम लोगों ने काशी व प्रयाग में स्नान के लिए एक दिन पहले प्रस्थान किया था।


सती अनुसूइया के पुत्र दुर्वासा ऋषि के आश्रम दुर्वासा धाम पर भोर से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का क्रम शुरू हो गया था। पूजन सामग्रियों के साथ ही खाने-पीने की भी दुकानें लगी हुई थीं। भोर में शुरू हुआ स्नान दोपहर बाद तक चलता रहा। लोगों ने स्नान के बाद तिल-गुण और खिचड़ी का दान किया। वहीं महराजगंज स्थित भैरव बाबा मंदिर पर भी सरोवर में स्नान के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। लोगों ने स्नान-ध्यान के बाद पूजन-अर्चन किया। भैरव नाथ को नारियल, रामदाना, काली मिर्च चढ़ाकर मन्नते मांगी। ब्राह्मणों द्वारा हवन भी कराया गया।


इसके अलावा दत्तात्रेय आश्रम, चन्द्रमा ऋषि आश्रम पर भी श्रद्धालुओं की भीड़ रही। अवंतिकापुरी (आंवक) स्थित सरोवर में भी लोगों ने डुबकी लगायी। इसके अलावा नगर में बहने वाली तमसा नदी के कदम घाट, गौरी शंकर घाट आदि पर भी लोगों ने स्नान ध्यान ? किया। ग्रामीण क्षेत्र के लोगों ने गांव के सरोवरों में स्नान किया। पुरोहितों ने घर-घर जाकर तिल-गुण और खिचड़ी का दान लिया। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां लोगों ने लाई-चूड़ा आदि का एक-दूसरे के घर भेजकर त्योहार मनाया वहीं खिचड़ी पहुंचाने का सिलसिला शुक्रवार को भी जारी रहा। उधर मातवरगंज स्थित सुन्दर गुरुद्वारे गुरुवार की शाम को लोहड़ी मनायी गयी। बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम कार्यक्रम प्रस्तुत किये और अन्य लोगों ने भजन-कीर्तन किया। अन्त में प्रसाद वितरण व लंगर का आयोजन किया गया।


दूसरी ओर बच्चों व युवाओं में इस पर्व को लेकर अलग ही उत्साह रहा। जगह-जगह बुलबुल व मुर्गे भी लड़ाये गये। बच्चों में उत्साह की स्थिति यह रही कि सुबह ही नहा धोकर तैयार हो गये । उन्हें इन्तजार था तो केवल इस बात का कि घर के बड़े लोग जल्द से जल्द दान कर लें तो उसके बाद लाई-चूड़ा और पतंगबाजी का आनन्द लिया जाये। दोपहर से पहले ही पतंगबाजी शुरू हुई, तो अंधेरा होने तक जारी रही। पतंग को आसमान में पहुंचाने से ज्यादा ध्यान लोगों ने दूसरों की पतंग काटने पर दिया। धूप निकलने से त्योहार को लेकर हर किसी में उत्साह देखा गया। मालटारी क्षेत्र के सिकदारपुर स्थित विश्वनाथ मन्दिर पर मेले का आयोजन किया गया और प्रसाद स्वरूप खिचड़ी का वितरण हुआ। मेले में चाट-पकौड़ी व जलेबी की दुकानें भी लगी हुई थीं।
by Ran Vijay Singh

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