जानिए कैसे सांप मित्र बन गया यह नौंवी पास युवक, अब तक बचा चुका है पांच हजार सांपो की जिंदगी

सपेरे की मनमानी व सांप काटने से बच्ची की हुई मौत से संजय को मिली प्रेरणा

सांपों को पकड़कर जंगल में छोड़ने के साथ ही संजय लोगों को करते जागरूक

कपड़े की दुकान चला संजय करते हैं परिवार का भरण पोषण लेकिन नहीं लेते किसी से सांप पकड़ने का कोई चार्ज

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
आजमगढ़. कपड़े की दुकान कर परिवार को भरण पोषण करने वाले एक युवक को जीवन एक घटना ने बदल कर रख दिया। संजय के यहां से कपड़े खरीदने वाले एक ग्राहक के घर सांप निकला और उसने युवक से मदद मांगी तो उनसे सपेरे का नंबर दे दिया। सपेरे द्वारा सांप पकड़ने के एवज में की गयी पांच हजार रूपये की डिमांड वह पूरी नहीं कर सका। परिणाम रहा कि सांप घर में छुपा रहा और उसकी आठ साल की पोती को काट लिया जिससे उसकी मौत हो गयी। इस घटना ने युवक की जिंदगी बदल दी और वह सांप को पकड़ने तथा उन्हें सुरक्षित जंगल में छोड़ने का संकल्प ले लिया। अब तक यह युवक पांच हजार से अधिक सांप पकड़कर जंगल में छोड़ चुका है। आज भी यह सिलसिला जारी है। युवक न केवल सांपों की जिंदगी बचाता है बल्कि लोगों को जागरूक भी करता है।

आजमगढ़ जिले के मेंहनाजपुर के रहने वाले संजय संजय मौर्य उर्फ गुड्डू ने मात्र नौंवी तक शिक्षा प्राप्त की है। संजय कस्बे में कपड़े की दुकानकर परिवार को भरण पोषण करता है। अगस्त 2019 में संजय अपनी दुकान पर बैठा था तभी मेहनाजपुर नई बस्ती का एक व्यक्ति आया और बताया कि उसके घर सांप निकला है। उसने संजय से मदद मांगी लेकिन संजय उसके साथ जाने के बजाय उसे एक सपेरे का नंबर दे दिया। उक्त व्यक्ति ने जब सपेरे से संपर्क किया तो उसने सांप पकड़ने के एवज में पांच हजार रूपये की डिमांड कर दी। उस व्यक्ति के पास इतना रूपया नहीं नहीं था। इसलिए उसने खुद सांप को भागने का फैसला किया लेकिन सांप घर में ही कहीं छिप गया।

अगले दिन सांप ने उसकी सात साल की बच्ची को डंस लिया और उसकी मौत हो गई। इस घटना ने संजय को झकझोर कर रख दिया। इसके बाद संजय ने फैसला किया कि वह अब सांप काटने से किसी की मौत नहीं होने देगा और सांपों को भी रक्षा करेगा। इसके बाद संजय ने सांपों को बचाने और उनसे सुरक्षा के लिए लोगों को जागरूक करना शुरू कर दिया। जहां भी सांप निकलने की सूचना मिलती है संजय वहां पहुंच जाता है और सांप को स्टील के एक राड के सहारे पकड़कर झोले में बंद कर लेता है। जब चार पांच सांप एकत्र हो जाते हैं तो उन्हें जंगल में छोड़ देता है। अब तक संजय 5000 से अधिक सांप पकड़ चुका है। खास बात है कि संजय किसी से सांप पकड़ने के एवज में कोई शुल्क नहीं लेता है।


संजय के अनुसार वास्तव में सांप इंसान के मित्र होते हैं। वह इंसान को देखकर खुद भागने की कोशिश करते हैं लेकिन जिस तरह सांप को देखने के बाद इंसान अपनी सुरक्षा को ध्यान में रख सांप को मार देता है उसी तरह दबने पर या इंसान के करीब आने पर सांप आत्मरक्षा के लिए उनपर हमला करता है। इसलिए वे इंसानों के साथ ही सांप को बचाना भी अपना फर्ज समझता है। संजय इस मुहिम में सपेरों व मदारियों को भी प्रेरित करता हैं कि वे सांपों को कैद में रखने के बजाय उन्हें जंगल में छोड़ दें। उनका दांत कभी न तोड़े। संजय की बात से प्रेरित होकर अब तक दर्जन से अधिक सपेरे और मदारी वाले सांपों को आजाद कर चुके हैं। संजय कहते हैं कि भारत में सांपों की 300 प्रजाति पाई जाती है जिनमें से 70 फीसदी जहरीले नहीं होते हैं। सर्प दंश से ज्यादा लोग डर से मर जाते हैं। कोई जहरीला सांप डस भी ले तो पीड़ित को तुरंत एंटी वेनम लगवाना चाहिए। हम सभी को समझना होगा कि सांप हमारे मित्र हैं और वे कीटों को आहार बनाकर हमारी मदद करते हैं।

BY Ran vijay singh

रफतउद्दीन फरीद
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