मुलायम के आजमगढ़ में सीएम को झटका

मुलायम के आजमगढ़ में सीएम को झटका

और शिब्ली एकेडमी ने ठुकराया सीएम का पांच लाख

आजमगढ. दारूल मुसन्निफीन शिब्ली एकेडमी ने सीएम द्वारा बजट में की गई पांच लाख रूपये की घोषणा को ठुकरा दिया है। कारण कि इसे राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संस्था का अपमान माना जा रहा है। इसके पीछे वजह भी है सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव की मौजूदगी में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने वर्ष 2012 में आईटीआई मैदान में वादा किया था कि एकेडमी की हर जरूरत को हम पूरा करेंगे। इसके बाद संस्था ने सरकार को 22 करोड़ का प्रस्ताव दिया था। उक्त प्रस्ताव को दरकिनार कर सरकार ने बजट में मात्र पांच लाख रूपये की घोषणा की।

बता दें कि दारूलमुसन्निफीन शिब्ली एकेडमी राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त हैं। इसकी स्थापना अल्लामा शिब्ली नोमानी ने की थी। नवंबर 2014 में इसने सौ साल पूरे किये। इस लम्बे समय में एकेडमी ने उर्दू भाषा, साहित्य, इस्लामी इतिहास, भारतीय इतिहास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसकी मासिक पत्रिका च्च्मअ़ारिफ़ज्ज् जून 2016 में अपने 100 वर्ष पूरे कर लेगी। उर्दू पत्रकारिता में इस के स्तर को कोई नहीं पा सका है। दारूलमुसन्निफीन के साहित्य की एक विशेषता यह है कि इसे में राष्ट्रीयता और राष्ट्रीय मूल्यों की महत्वता को दर्शाया गया है।

यह राष्ट्रीय एकता और भाईचारा की भावना को सुदृढ़ करता है। दारूलमुसन्निफीऩ शिब्ली एकेडमी स्थाई रूप से एक शोधात्मक संस्था है लेकिन समाज के प्रति वह अपनी जिम्मेदारियों से कभी पीछे नहीं रहा। स्वतन्त्रता संग्राम में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। महात्मा गाँधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू को भी इस एकेडमी से काफी लगाव था। बड़ा प्रेम था। वह यहाँ के आजीवन सदस्य थे और यहाँ बराबर ठहरते थे। आचार्य नरेन्द्र देव, जयप्रकाश नारायण, विनोवा भावे, राम मनोहर लोहिया भी यहां आ चुके हैं। पूर्व  राष्ट्रपति डा. जाकिर हुसैन और फख़्रूददीन अली अहमद इसकी प्रबन्ध समिति के सदस्य रहे। 1952 में पंडित जवाहरलाल नेहरू और मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के सहयोग से केन्द्र सरकार ने इसे साठ हज़ार रूपये की आर्थिक सहायता दी थी। इसके बाद से इस संस्था को कोई सरकारी सहायता नहीं मिली थी।
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वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव शिब्ली कालेज के गेस्ट हाउस में कई दिन रूके थे। इसके बाद जब अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बने तो अक्टूबर 2012 में आईटीआई मैदान में हुई सपा की सभा में स्वयं घोषणा की कि एकेडमी की जो भी जरूरत होगी उसे सरकार पूरा करेगी। सीएम ने स्वयं कई बार संस्था की उन्नति के लिए प्रस्ताव मांगा था। इसके बाद संस्था द्वारा कारपस फंड की स्थापना और आधुनिक पुस्तकालय की स्थापना के लिए 22 करोड़ का प्रस्ताव सरकार को भेजा किया। यह प्रस्ताव लंबे समय तक सरकार में लंबित रहा। संस्था के निदेशक  इस्तियाक अहमद जिल्ली ने बताया कि चुकि शासन ने खुद प्रस्ताव मांगा था इसलिए हमें उम्मीद थी कि सरकार डिमांड के अनुरूप बजट देगी लेकिन बजट में दारूल मुसन्निफीन जैसे राष्ट्रीय धरोहर के लिए 5 लाख की ग्रान्ट का एलान किया। जो सीधे सीधे संस्था का मजाक है यही वजह है कि संस्था ने सरकार का धन न लेने का फैसला किया है।
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