शिक्षा विभाग की लापरवाही से मौत का ग्रास बन रहे बच्चे

शिक्षा विभाग की लापरवाही से मौत का ग्रास बन रहे बच्चे
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मौन हैं अधिकारी, नहीं हो रही है कोई कार्रवाई

आजमगढ़. काश! जिले की बेसिक शिक्षा अधिकारी और उनके मातहत अपनी जिम्मेदारियों के प्रति गंभीर होते तो शायद मासूम बच्चों को अपनी जिंदगी न गवांनी पड़ती और ना ही आये दिन उनकी जिंदगी खतरे में पड़ती। कभी मिड डे मील का भोजन बच्चों के लिए मुसीबत बन रहा है तो कभी शौचालय का न होना। लेकिन अधिकारी है कि चुप्पी तोड़ने को तैयार नहीं है। दो माह के भीतर दो बच्चे जिंदगी गंवा चुके है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि कोई अभिभावक अपने बच्चे की जिंदगी को खतरे में क्यों डाले। जिलाधिकारी भी ऐसे मामलों के प्रति गंभीरता नहीं दिखा रहे है। जिससे स्थित और भयावह होती जा रही है।

मंगलवार को पवई थाना क्षेत्र के भुलेसरा सुल्तानपुर गांव में हुई घटना पर ध्यान दे तो गांव के परिषदीय विद्यालय में कक्षा एक में पढने वाला सत्यप्रकाश यादव का 6 वर्षीय पुत्र निखिल विद्यालय में शौचालय बंद होने के कारण स्कूल के पीछे शौच के लिए गया था। उस मासूम को क्या पता था कि कूंए का गड्ढ़ा उसके लिए मौत का सामान साबित होगा। यहां मामला सिर्फ नहीं है कि एक बच्चा गड्ढे में गिरा और मर गया। बल्कि गड्ढे में गिरे बच्चे को विद्यालय के लोगों ने बचाने तक की कोशिश नहीं की। प्रधानाध्यापक के लेकर शिक्षक तक कूए के पास खड़े तमासबीन बने रहे। और बच्चा पानी में डूब गया। 

ऐसी परिस्थित क्यों उत्पन्न हुई कि बच्चे को शौच के लिए बाहर जाना पड़ा जबकि सभी परिषदीय विद्यालयों में हजारों रूपये खर्च कर शौचालय का निर्माण कराया गया है। क्या यह जानना बीएसए और एबीएसए की जिम्मेदारी नहीं बनती। लेकिन अब तक विभाग के किसी अधिकारी ने चुप्पी नहीं तोड़ी है और ना ही कोई जिम्मेदार स्कूल तक पहुंचा है। हाल में एक निजी विद्यालय में शौच के लिए गये बच्चे की हत्या से भी अधिकारी सबक लिए होते तो शायद पवई में ऐसी नौबत नहीं आती।
गौर करे तो 27 जनवरी को तरवां थाना क्षेत्र के सरायभादी गांव निवासी किशन नाम के छात्र की मेंहनगर थाना क्षेत्र के कटहन स्थित निजी विद्यालय के पास हत्या हुई थी। यह बच्चा निजी विद्यालय में पढ़ता था और स्कूल में शौचालय न होने के कारण पीछे झाड़ में गया था जहां उसकी गला रेतकर हत्या कर दी गयी थी। इस घटना से अगर अधिकारियों ने अगर थोड़ा सा भी सबक लिया होता तो पवई में ऐसी घटना नहीं होती लेकिन इनकी सारी कार्रवाई और कोरम सिर्फ कागज में पूरा हो रहा है जिसका खामियाजा अभिभावक और बच्चे भुगत रहे है। 
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