सपा-बसपा युग जाते ही सत्ता से बेदखल हुआ आजमगढ़  

सपा-बसपा युग जाते ही सत्ता से बेदखल हुआ आजमगढ़  
yogi

यूपी की सियासत में हमेशा से आजमगढ़ का हस्‍तक्षेप रहा है। यही वजह है कि सियासी दलों ने इस जिले को हमेशा विशेष तरजीह दी है। 

आजमगढ़. यूपी की सियासत में हमेशा से आजमगढ़ का हस्‍तक्षेप रहा है। यही वजह है कि सियासी दलों ने इस जिले को हमेशा विशेष तरजीह दी है। चौधरी चरण सिंह से लेकर मुलायम सिं‍ह तक ने इसे अपनी राजनीति का केंद्र बनाया। इस जिले के रामनरेश यादव 1978 में यूपी के सीएम बने तो पिछले दो दशक में सरकार में हमेशा जिले के तीन से चार मंत्री रहे लेकिन यह पहला मौका है जब आजमगढ़ से किसी को सत्‍ता में जगह नहीं मिली। वैसे मधुबन सीट से जीते दारा सिंह चौहान के मंत्री बनने से थोड़ी लाज बच गयी लेकिन दारा पर उम्‍मीदों का बोझ काफी बढ़ गया है। मऊ के साथ ही आजमगढ़ के लोगों को भी उम्‍मीद वे विकाश में महत्‍वूपर्ण भूमिका निभाएंगे।


आजमगढ़ के पल्‍हनी ब्‍लाक के गेलवारा गांव में साधारण किसान परिवार में जन्मे दारा सिंह चौहान ने छात्र राजनीति से चलकर मंत्री पद तक का सफर पूरा किया है। वह बचपन से ही जुझारू प्रवत्ति के थे। पिता रामकिशुन चौहान का असम में निजी कारोबार था। वहीं उनका जन्म हुआ और जूनियर हाईस्कूल तक की शिक्षा भी। 1955 से असम में रहे इनके पिता 1993 में पैतृक गांव वापस आए और खेती-किसानी में लग गए। दारा सिंह चौहान ने इंटर और स्नातक तक की शिक्षा यहीं स्थानीय डीएवी कॉलेज से की। इसके बाद तो डीएवी पीजी कॉलेज से छात्रसंघ के चुनाव से राजनीति की शुरुआत की। उन्हें यहां किसी पद पर जीत नहीं मिली लेकिन मन में राजनीति की धुन पक्की अवश्य हो गई।


वह पहली बार विकास खंड पल्हनी के पल्हनी-छतवारा क्षेत्र से जिला पंचायत सदस्य चुने गए। इसके बाद जिले में कांग्रेस पार्टी से राजनीति का सफरनामा शुरू हुआ। यहां कोई पद नहीं मिला तो उन्होंने मऊ को अपना कार्यक्षेत्र बनाया। पहली बार बहुजन समाज पार्टी से साढ़े तीन साल राज्य सभा सदस्य रहे। इसके बाद बसपा छोड़ सपा का दामन थामा तो यहां भी इन्हें राज्यसभा में भेजा गया। 2009 में घोसी सीट से बसपा के टिकट पर सांसद रहे और संसदीय दल के नेता चुने गए। 2014 में घोसी सीट से ही बसपा से चुनाव लड़े लेकिन भाजपा के हरिनरायन राजभर से हार गए। इसके बाद उन्होंने एक बार पुन: पाला बदला और 2015 में भाजपा का दामन थाम लिया। शीर्ष नेतृत्व ने उन्हें भारतीय जनता पार्टी में पिछड़ा वर्ग का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया। पिछले दिनों विधानसभा चुनाव में वह भाजपा के टिकट पर विधायक चुने गए और अब नई सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाए गए हैं।


वैसे आजमगढ़ में बीजेपी को एक सीट मिली है, फूलपुर पवई विधानसभा से पूर्व सांसद रमाकांत यादव के पुत्र अरूणकांत यादव विधायक चुने गए हैं लेकिन राजनीति में अनुभव की कमी इनके मंत्री बनने के रास्‍ते में आड़े आ गई।
खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned