Mission 2019 : पीएम मोदी के रैली की भीड़ तय करेगी पूर्वांचल में भाजपा का भविष्य

Mission 2019 : पीएम मोदी के रैली की भीड़ तय करेगी पूर्वांचल में भाजपा का भविष्य

Sarweshwari Mishra | Publish: Jul, 14 2018 10:53:40 AM (IST) | Updated: Jul, 14 2018 03:11:07 PM (IST) Azamgarh, Uttar Pradesh, India

Loksabha Election 2019 : मंत्री और सांसद तक ताकत दिखाने के लिए है तैयार, आम आदमी को भी उम्मीद कुछ खास तोहफा देंगे पीएम

आजमगढ़. पीएम नरेंद्र मोदी आज मंदुरी में पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का शिलान्यास करने आ रहे है लेकिन वास्तव में विपक्ष इसे पीएम मोदी और बीजेपी का टेस्ट मान रहा है। राजनीति के जानकार भी मानते हैं कि पीएम मोदी के रैली की भीड़ 2019 में पूर्वांचल में भाजपा का भविष्य तय करेगी। यहीं वजह है कि रैली में भीड़ जुटाने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है। मंत्री से लेकर सांसद तक इस काम में लगे ही है साथ ही बूथ तक के कार्यकर्ताओं को भी भीड़ जुटाने की जिम्मेदारी सौंप दी गयी है। यहीं नहीं संघ भी कहीं न कहीं इस काम में हाथ बटा रहा है। आम आदमी को भी रैली को लेकर काफी उम्मीदें हैं लोगों का मानना है कि पीएम आयेंगे तो मंडल ही नहीं बल्कि पूरे पूर्वांचल को कुछ बड़ा तोहफा देंगे।

पूर्वांचल सपा बसपा का गढ़ माना जाता हैं लेकिन वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में यहां भाजपा को अप्रत्याशित सफलता मिली। आजमगढ़ संसदीय सीट को छोड़ दिया जाय तो इस दल ने अन्य जिलों में सपा बसपा का सूपड़ा साफ कर दिया। भाजपाई में इस जीत की खुमारी आज भी साफ दिखती है। तीन लोकसभा और एक विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में मिली हार के बाद भी ये मुगालते में जी रहे है। भाजपा के लोगों ने इस हार से सबक नहीं लिया है बल्कि पार्टी में गुटबंदी और बढ़ गयी है।
इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि जिले के नेता मोदी की रैली को सफल बनाने के बजाय आपसी लड़ाई में व्यस्त है। मजबूर होकर सीएम योगी को रैली की जिम्मेदारी वन मंत्री दारा सिंह चौहान को सौपनी पड़ी है। जबकि भाजपाई यह बात अच्छी तरह जानते हैं कि यूपी की सत्ता उनहें अपने कर्म से नहीं बल्कि मोदी मैजिक से हासिल हुई है। इस मुगालते का खामियाजा बीजेपी को 2019 में बीजेपी को भुगतना पड़ सकता है।

वहीं भाजपा विपक्ष की गोलबंदी से भी परेशान है। माना जा रहा है कि बीजेपी वर्ष 2019 में 2014 के प्रदर्शन को दोहराना चाह रही है इसके लिए पूर्वांचल एक्सप्रेस वे का शिलान्यास आजमगढ़ रखा गया है। कारण कि यह जनपद पूर्वांचल के मध्य में है और सपा के सबसे बड़े नेता मुलायम सिंह यादव का संसदीय क्षेत्र है। रैली में आसपास के आधा दर्जन जिलों के कार्यकर्ता भी पहुंच रहे हैं।

प्रधानमंत्री की इस यात्रा से आम लोगों ने भी काफी उम्मीदें पाल रखी हैं। लोगों को उम्मीद है कि मंडल में बहने वाली तमसा के उद्धार, लधु उद्योग, और बुनकरों के लिए वे कुछ खास घोषणाएं करेंगे। इसके अलावा प्रधानमंत्री वाराणसी से गोरखपुर नई रेल लाइन, मऊ से शाहगंज तक रेलवे लाइन का दोहरीकरण और कें्रदीय विश्वविद्यालय की घोषणा करेंगे। यहीं वजह है कि बड़ी संख्या में लोग पीएम को सुनने के लिए तैयारी में जुटे हैं।

विपक्ष की नजर भी पीएम की रैली पर है। सपा, बसपा और कांग्रेस के लोग इस बात पर नजर लगाए हुए हैं कि रैली में कितने लोग पहुंच रहे है। ऐसे में भाजपा के नेताओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती है भीड़ जुटाना। कारण कि आज सभी दल भीड़ को अपनी ताकत का पैमाना मानते रहे है। दूसरी बात ऐसा कम ही मौका मिलता है जब प्रधानमंत्री इस तरह छोटे जिले से ऐसी खास योजना का शुभारंभ करें। ऐसे में सभी नेता अपनी ताकत का एहसास भीड़ के जरिये कराने के लिए लालायित है। खास तौर पर टिकट के दावेदार। कारण कि इन्हें पता है कि लोकसभा चुनाव नजदीक है आज की मेहनत उन्हें कल टिकट दिलाने में मदद कर सकती है।

भाजपा प्रदेश नेतृत्व भी सभा में तीन लाख की भीड़ की उम्मीद पाले हैं। इसके लिए पूर्वांचल के करीब आधा दर्जन जिलों की जिला इकाई लक्ष्य दे दिया गया है। प्रत्येक जिले से 30 से 35 हजार लोगों को सभा में ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। अगर यह लक्ष्य पूरा होता है तो करीब 3.50 लाख लोग सभा में शामिल हो जायेगे। यदि भाजपाई ऐसा करने में सफल होते हैं तो उनके भविष्य के लिए अच्छा होगा। कारण कि विपक्षी दलों की नजर भी इस सभा पर हैं लोग यह भी चर्चा कर रहे है कि पार्टी का भविष्य सभा की भीड़ तय करेगी। यदि अपेक्षा के अनुरूप भीड़ रही तो भाजपाइयों के पास भी यह कहने का मौका होगा कि अभी मोदी मैजिक कायम है। यही वजह है कि भीड़ जुटाने के लिए पूरी ताकत लगायी जा रही है। अगर भीड़ नहीं जुटती है तो बीजेपी की मुश्किल बढ़नी तय है।

By- Ranvijay Singh

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