मासूमों संग अप्राकृतिक दुष्कर्म व हत्या का खुला राज, एक गिरफ्तार

 मासूमों संग अप्राकृतिक दुष्कर्म व हत्या का खुला राज, एक गिरफ्तार
Accused

1966 में हुई हत्‍या का बदला लेने के लिए दो मासूमों से दुराचार कर हत्‍या

आजमगढ़. दीदारगंज थाना क्षेत्र के सुरहन गांव में 21 दिनों के भीतर हुई दो मासूमों की हत्‍या से पर्दा उठ गया है। वर्ष 1966 में हुई परिवार के सदस्‍य की हत्‍या का बदला लेने के लिए आरोपी ने 23 अप्रैल को राघवेंद्र के छह वर्षीय पुत्र आर्यन के साथ मंदिर के पीछे दुराचार कर हत्‍या कर दिया था और 14 मई को गांव के अजय कुमार तिवारी के आठ वर्षीय पुत्र आदित्य को अगवा कर उसने इसलिए उसके साथ दुराचार कर मार दिया क्‍योंकि वह आर्यन की हत्‍या का चश्‍मददी था और राज खोलने की धमकी दे रहा था। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। उसके खिलाफ एनएसए भी लगाया गया है।





बता दें कि दीदारगंज थाना क्षेत्र के सुरहन ग्राम निवासी किशोरी गुप्ता के पुत्र राजन का रविवार को तिलक था। कार्यक्रम में शामिल पड़ोसी अजय कुमार तिवारी के आठ वर्षीय पुत्र आदित्य को वहां से अगवा कर लिया गया था और सोमवार की सुबह सुरहन गांव से लगभग एक किलोमीटर दूर स्थित ताल में उसकी लाश पाई गई थी। इस मामले में मृतक के पिता ने गांव के ही एक रितेश सिंह पुत्र संत प्रसाद सिंह के खिलाफ दुराचार कर हत्‍या की रिपोर्ट दर्ज करायी थी। पुलिस मामले की जांच में जुटी थी। वहीं इस गांव में 23 अप्रैल को राघवेंद्र सिंह का छह वर्षीय पुत्र आर्यन मंदिर के पीछे घायल अवस्‍था में पाया गया था। अस्‍पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गयी थी। परिवार के लोगों ने इसे दुर्घटना मान शव को दफना दिया था।
 



दोनों ही बच्‍चों की मौत सिर में चोट लगने के कारण हुई थी। इसलिए ग्रामीणों को शक हुआ कि कहीं आर्यन और आदित्‍य को तंत्र-मंत्र के चक्‍कर में तो नहीं मारा गया है। पुलिस ने भी इस बिंदु को गंभीरता से लिया और मंगलवार को आर्यन की लाश भी कब्र से निकाली गई। पोस्‍टमार्टम के बाद बड़ा खुलासा हुआ कि दोनों बच्‍चों की हत्‍या से पूर्व उनके साथा अप्राकृतिक दुष्‍कर्म किया गया था।




वहीं, रिपोर्ट पंजीकृत होने के बाद से ही रितेश फरार चल रहा था। पुलिस अधीक्षक अजय साहनी ने बताया कि दीदारगंज पुलिस को मुखबिर के जरिये जानकारी मिली कि रितेश कुशलगांव बस स्‍टैंड पर मौजूद है और वह कहीं भागने के फिराक में है। पुलिस ने बुधवार की भोर में उसे कुशलगांव बस अड्डे से गिरफ्तार कर लिया।






पूछताछ में आरोपी ने जो खुलास किया उससे पुलिस के भी होश उड़ गये। आरोपी के मुताबिक उसे पता चला कि वर्ष 1966 में परिवार के सदस्‍य राजमन सिंह की हत्‍या राघव के परिवार के लोगों ने की थी। जब उसे इसकी जानकारी हुई तो उसने बदला लेने का मन बनाया और 23 अप्रैल को आर्यन उसे गांव के कारेदेव धाम मंदिर के पास देख लिया। इसके बाद वह उसे बहला फुसलाकर मंदिर के पीछे लेजकार दुराचार किया और जब आर्यन ने चिल्‍लाने की कोशिश की तो उसका सर पेड़ से कई बार टकरा दिया, जिससे आर्यन का कान और सिर फट गया।  इसके बाद आरोपी ने आर्यन को गंभीर हाल में पुआल से ढ़क दिया। 


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आरोपी के मुताबिक घटना को आदित्‍य ने देख लिया था और वह बार-बार यह बात आर्यन की मम्‍मी को बताने की धमकी दे रहा था। इसी वजह से वह 14 मई की रात आदित्‍य को सैय्यद बाबा की मजार की तरफ ले गया और उसके साथ अप्राकृतिक दुराचार कर उसका सिर जमीन पर पटक दिया। इसके बाद उसे उठाकर पोखरे में फेंक दिया। रितेश को डर था कि यदि वह आदित्‍य को नहीं मारेगा तो वह उसे फंसा देगा।


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