योगीराज में ऐसे ढहाया गया आजमगढ़ में 1993 का अवैध कब्जा, दबंग कुछ नहीं कर सके

सगड़ी में अवैध निर्माण ढहाने के लिये लगायी गयी भारी पुलिस फोर्स।

आजमगढ़. लंबे इंतजार के बाद योगी आदित्‍यनाथ के यूपी की सत्‍ता में आने के बाद रविवार को सगड़ी तहसील क्षेत्र के बर्जला गांगेपुर गांव के दलितों को न्‍याय मिला। प्रशासन द्वारा गांव में दलितों के खलिहान के नाम से दर्ज भूमि पर अवैध रूप से बनाये गये नौ माकानों को ध्‍वस्‍त कर दिया। इस भूमि से बेदखली का आदेश वर्ष 1993 में हुआ था लेकिन प्रशसन द्वारा कार्रवाई नही की जा रही थी। अवैध कब्‍जा खाली कराने पहुंचे अधिकारियों को विरोध का भी सामना करना पड़ा लेकिन फोर्स के आगे दबंगों की एक न चली और बुलडोजर से माकान ध्‍वस्‍त कर दिये गये।




बताते हैं कि बर्जला गांगेपुर गांव की दलित बस्‍ती के पास गाटा संख्या 139, 141 नंबर की आठ विस्‍वा भूमि दलित के लिए खलिहान के नाम से आवंटित है। इस भूमि पर बस्‍ती के ही कुछ दबंगों ने मकान बनवा लिया था। उक्‍त भूमि को खाली कराने के लिए ग्राम सभा ने तहसील में मुकदमा कराया था। वर्ष 1993 में यहां बने नौ माकानों के बेदखली का आदेश हुआ था। इसके बावजूद प्रशासन ने कभी इसे खाली कराने की जहमत नहीं हटाई। ग्रामीणों द्वारा की जाने वाली शिकायत को प्रशासन नजरअंदाज करता रहा। मजबूर होकर लोगों ने हाईकोट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने 1 मई 2017 को खलिहान की जमीन से मकानों को खाली कराने का आदेश देते हुए 16 मई तक तहसीलदार को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया।




इसके बाद प्रशासन सक्रिय हुआ और रविवार को पूर्वाह्न 11 बजे तहसीलदार हीरालाल, रौनापार, बिलरियागंज, महराजगंज व जीयनपुर थाने की पुलिस, महिला पुलिस व पीएसी के साथ चार जेसीबी लेकर गांव में पहुंचे। इस दौरान कब्‍जेदारों ने प्रशासन का विरोध किया लेकिन फोर्स अधिक होने के कारण वे अपनी मनमानी नहीं कर सके। देखते ही देखते पतिराम पुत्र दुब्बर, मुक्ति देव पुत्र सौदागर, चनवता पत्नी रामपति, श्यामलाल व दीपचंद पुत्रगण सिद्धू, तप्पेराम पुत्र हरदेव, रामनाथ, हरिनाथ, शिवनाथ पुत्रगण बद्री का पक्का मकान को गिरवा दिया। यह कार्रवाई पूरे दिन चलती रही। इस दौरान गांव में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। तहसीलदार हीरालाल ने कहा कि जिस पीड़ित के पास मकान बनवाने के लिए जमीन नहीं रहेगी उसे ग्रामसभा की जमीन का आवंटन करने का प्रयास किया जाएगा।
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रफतउद्दीन फरीद Desk/Reporting
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