अगर बारिश के बाद आलू में लग रहा है झुलसा रोग तो किसान तत्काल करें यह उपाय

दिसंबर के महीने में झुलसा का सर्वाधिक होता है खतरा लेकिन बेमौसम बरसात से नवंबर में ही बढ़ा संकट

त्वरित प्रबंधन कर फसल को बचा सकते हैं किसान, नहीं तो प्रभावित हो सकता है उत्पादन

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
आजमगढ़. आलू की खेती अगेती या पिछेती यह झुलसा रोक के प्रति संवेदनशील होती है। आलू की फसल को सर्वाधिक नुकसान भी इसी रोग से पहुंचता है। आम तौर पर यह रोग दिसंबर के महीने में फसल में लगता है लेकिन इस बार बेमौसम बरसात से इस रोग का खतरा अभी से शुरू हो गया है। कहीं कहीं अगेती फसलों में इसके लक्षण भी मिले हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि तत्काल प्रबंधन कर किसान रोग से होने वाली क्षति को रोक सकते है। नही ंतो यह रोग उत्पादन को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है।

कृषि विज्ञान केंद्र कोटवां के फसल सुरक्ष वैज्ञानिक डा. रूद्र प्रताप सिंह कहते हैं कि आलू की फसल झुलसा रोग के प्रति अत्यंत संवेदनशील होती है। प्रतिकूल मौसम बदली, बूंदा-बांदी व नम वातावरण में अगेती व पिछेती फसल में झुलसा रोग का प्रकोप बहुत तेजी से फैलता है, जिससे फसल को भारी क्षति पहुंचती है। ऐसी परिस्थिति में आलू की अच्छी पैदावार के लिए रक्षात्मक तरीका अपनाया जाना चाहिए।

उन्होंने बताया कि झुलसा रोग दो तरह के होते हैं, अगेती झुलसा और पिछेती झुलसा। अगेती झुलसा दिसंबर महीने की शुरुआत में लगता है। इस समय आलू की फसल में पिछेती झुलसा रोग लग सकता है। अगेती झुलसा में पत्तियों की सतह पर छोटे-छोटे भूरे रंग के धब्बे बनते हैं, जिनमें बाद में चक्रदार रेखाएं दिखाई देती है। रोग के प्रभाव से आलू छोटे व कम बनते हैं। बीमारी में पत्तों के ऊपर काले-काले चकत्तों के रूप दिखाई देते हैं जो बाद में बढ़ जाते हैं।

डा. आरपी सिंह ने बताया कि आलू की फसल को अगेती व पिछेती झुलसा रोग से बचाने के लिए किसानों को जिक मैगनीज कार्बामेट 2.0 से 2.5 किग्रा को 800 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टर की दर से पहला छिड़काव बोवाई के 30-45 दिन बाद अवश्य करना चाहिए। रोग नियंत्रण के लिए दूसरा व तीसरा छिड़काव कापर आक्सीक्लोराइड 2.5 से 3.0 किग्रा. 800-1000 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर की दर से 10-12 दिन में अंतर में करें। दूसरे व तीसरे छिड़काव के साथ ही माहू कीट का नियंत्रण आवश्यक है। इसके प्रकोप से आलू बीज उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसलिए अच्छा उत्पादन प्राप्त करने के लिए किसानों को सजग रहने की जरूरत है।

BY Ran vijay singh

रफतउद्दीन फरीद
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