जिला पंचायत उपचुनाव: मुलायम के गढ़ में दांव पर दो बाहुबलियों का भविष्‍य

Akhilesh Tripathi

Publish: Sep, 17 2017 02:50:24 (IST)

Azamgarh, Uttar Pradesh, India
जिला पंचायत उपचुनाव: मुलायम के गढ़ में दांव पर दो बाहुबलियों का भविष्‍य

यह लड़ाई किस स्‍तर तक जायेगी यह तो 26 सितंबर को साफ होगा लेकिन बड़े उलटफेर की आशंका के बीच राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गयी है।

रणविजय सिंह की रिपोर्ट

आजमगढ़.  मुलायम सिंह यादव के संसदीय क्षेत्र में सिर्फ कहने के लिए जिला पंचायत अध्‍यक्ष की कुर्सी की लड़ाई है। वास्‍तव में यहां दो बाहुबली भविष्‍य के लिए लड़ रहे हैं। यह लड़ाई किस स्‍तर तक जायेगी यह तो 26 सितंबर को साफ होगा लेकिन बड़े उलटफेर की आशंका के बीच राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गयी है। सभी दलों की नजर इस पर टिकी है। वहीं अगर किसी की चांदी है तो जिला पंचायत सदस्‍यों की जो इस समय नेपाल से लेकर गोवा तक मौज मस्‍ती कर रहे हैं।

 

बता दें कि जिला पंचायत अध्‍यक्ष के कुर्सी की लड़ाई असल में त्रिस्‍त‍रीय पंचायत चुनाव के दौरान ही शुरू हो गयी थी। जब सपा ने पूर्व मंत्री दुर्गा प्रसाद यादव के भतीजे प्रमोद यादव को टिकट दिया और फिर दुर्गा और विधायक आलमबदी के दबाव में उसे काटकर मीरा यादव को प्रत्‍याशी बना दिया।

 

इसके बाद से ही चाचा और भतीजे के बीच जंग जारी है। पिछले दिनों दुर्गा प्रसाद ने प्रमोद को जेल भी भेजवा दिया था। सपा में चल रही गुटबाजी जग जाहिर है। पूर्व मंत्री बलराम यादव जिला पंचायत अध्‍यक्ष मीरा यादव के ससुर हवलदार यादव के राजनीतिक गुरू हैं लेकिन वर्तमान में बलराम यादव और हवलदार के बीच छत्‍तीस का आंकड़ा हैं। गुरू चेले की लड़ाई लोकसभा चुनाव से चल रही है।

प्रमोद यादव द्वारा जिला पंचायत अध्‍यक्ष के खिलाफ अविश्‍वास प्रस्‍ताव लाने के बाद सपा के भीतर घमासान बढ़ गई। बलराम यादव खुलकर न सही लेकिन उनके समर्थक जिप सदस्‍य प्रमोद के साथ दिख रहे है। बलराम और दुर्गा में भी नहीं पटती है। इसका भी फायदा प्रमोद को मिल रहा है।

 

वहीं दुर्गा प्रसाद यादव भतीजे को सबक सिखाने के लिए मीरा यादव की कुर्सी किसी भी कीमत पर बचाना चाहते है। बाहुबली दुर्गा को सीधी चुनौती बाहुबली भुपेंद्र सिंह मुन्‍ना से मिल रही है। मुन्‍ना सिंह पूरी ताकत से प्रमोद के साथ खड़े है।

इस लड़ाई में सबसे अहम किरदार है भाजपा के पूर्व सांसद बाहुबली रमाकांत यादव, जिनके पास करीब डेढ़ दर्जन जिला पंचायत सदस्‍य है। माना जा रहा था कि हवलदार से बदला लेने के लिए रमाकांत यादव प्रमोद के साथ है लेकिन भाजपा में हाल के दिनों में रमाकांत की पूछ कम होने के बाद उन्‍हें इस बात का खतरा लगने लगा है कि बीजेपी टिकट काट सकती है।

 

सूत्रों की मानें तो रमाकांत यादव फिर सपा में वापसी चाह रहे है।  अगर सब ठीक ठाक रहा तो वे अपने सदस्‍यों को मीरा के समर्थन के लिए कह सकते है। यदि बात नहीं बनी तो उनके समर्थक प्रमोद के साथ जायेंगे। हालत यह है कि जिला पंचायत अध्‍यक्ष की कुर्सी अबुझ पहेली बन गयी है। मुकाबला भी नजदीकी होना तय है  लेकिन यह चुनाव मुन्‍ना सिंह, रमाकांत यादव और दुर्गा जैसे बाहुबलियों की प्रतिष्‍ठा तथा भ्‍विष्‍य का फैसला करेगा।

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