बीजेपी छोड़कर आया यह नेता, बन सकता है आजमगढ़ में सपा के बुरी हार का कारण  

बीजेपी छोड़कर आया यह नेता, बन सकता है आजमगढ़ में सपा के बुरी हार का कारण  
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अखिलेश यादव का खेमा पिछले चुनाव का बदला लेने को तैयार बैठा है, जाने पूरी कहानी...

आजमगढ़. समाजवादी पार्टी सैफई में ही नहीं बल्कि पूर्वांचल में भी गुटबाजी से परेशान है। चुनाव से पहले यह गुटबाजी खतम नहीं हुई तो कम से कम आजमगढ़ में मुलायम का किला ढह जायेगा। कारण कि यहां दावेदारों से अधिक नेताओं में एक दूसरे को श्रेष्ठ साबित करने की जंग चल रही है। इस लड़ाई का खामियाजा समाजवादी पार्टी पहले भी भुगत चुकी है। इसके बाद भी न तो नेता चेत रहे हैं और न ही शीर्ष नेतृत्व।

बता दें कि समाजवादी पार्टी के अस्तित्व में आने के बाद से ही आजमगढ़ उसका गढ़ रहा है। जब भी आजमगढ़ व आसपास के जिलों में इस दल ने अच्छा प्रदर्शन किया है और सत्ता का सुख भोगा है। 2007 के चुनाव में बसपा को आजमगढ़ में 6 और सपा को चार सीट मिली। 

रामदर्शन यादव भाजपा छोड़ फिर सपा में है जिसके बाद से 2012 के कैंडिडेट...

बसपा पूर्ण बहुमत से सत्ता में आयी थी। उसके पूर्व हुए चुनाव में स्थिति यही थी लेकिन सीटें ज्यादा सपा की झोली में थी। उस समय सपा ने यूपी पर राज किया था। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को दस में से नौ सीटें मिली और सपा की पूर्ण बहुमत से सरकार बनी। शायद दसों सीटें सपा के खाते में होती यदि टिकट कटने के बाद पूर्व जिलाध्यक्ष रामदर्शन यादव ने भाजपा का दामन न थामा होता। 


वर्तमान हालात पर गौर करें तो एक बार फिर रामदर्शन सपा में हैं और मुबारकपुर से चुनाव लड़ रहे हैं। पूर्व प्रत्याशी अखिलेश यादव का खेमा रामदर्शन से पिछले चुनाव का बदला लेने को तैयार बैठा है। सदर में वन मंत्री दुर्गा प्रसाद यादव को अजेय कहा जाता है। 

लेकिन इस चुनाव में इन्हें अपने ही भतीजे और सपा नेता प्रमोद यादव के विद्रोह कासामना करना पड़ रहा है। चाचा ने भतीजे के जिला पंचायत अध्यक्ष का टिकट कटवाया था। अब भतीजा चाचा की लुटिया डुबोने के लिए पूरी तरह तैयार है। मेंहनगर में विधायक बृजलाल सोनकर के कृत्यों से जनता नाराज है।

हाल में विधायक और अधिवक्ताओं के बीच हुए विवाद ने माहौल को और खराब किया है। वहीं यहां कई और नेता टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। इसे लेकर पिछले दिनों सर्किट हाउस में हुई समीक्षा बैठक के दौरान महिला जिलाध्यक्ष और विधायक के बीच मारपीट की नौबत आ गयी थी। 

यहां पार्टी कई खेमों में बटी हुई है। सगड़ी, निजामाबाद, दीदारगंज, फूलपुर की हालत इससे अलग नहीं है। मौका मिलने पर पार्टी के लोग ही पार्टी के प्रत्याशी की गर्दन काटने को तैयार हैं। इससे निपटना समाजवादी पार्टी के लिए बड़ी चुनौती है।
 
 
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