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UP Assembly Election 2022: आजमगढ़ की इस विधानसभा ने यूपी को दिया सीएम फिर भी नहीं बदली व्यवस्था

UP Assembly Election 2022: आजमगढ़ जिले की फूलपुर पवई विधानसभा ने चार दशक पूर्व यूपी को सीएम दिया लेकिन आज तक इस क्षेत्र के लोगों ने समुचित विकास नहीं देखा। शिक्षा, चिकित्सा, यातायात से लेकर अन्य सुविधाओं से आज भी यहां के लोग महरूम है। खास बात है कि पहली बार यहां बीजेपी का विधायक है और यूपी में बीजेपी की सत्ता फिर भी विकास की दौड़ में यह क्षेत्र लगातार पिछड़ रहा है।

आजमगढ़

Published: December 01, 2021 11:22:35 am

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
आजमगढ़. UP Assembly Election 2022: यूपी विधानसभा चुनाव 2022 में कुछ महीने ही बचे हैं। राजनीतिक दल चुनाव तैयारियों में जुटे हुए हैं। एक बार फिर वादों और दावों की झड़ी लगाई जा रही है। विकास को लेकर बड़े-बड़े दावे किये जा रहे हैं, तो जनता से वादे करने में भी दल पीछे नहीं है लेकिन यहां के लोंगों को जनप्रतिनिधयों पर न तो भरोसा है और ना ही उनके वादों पर। कारण कि यूपी को सीएम देने के बाद भी यहां की सूरत नहीं बदली है। चिकित्सा, शिक्षा, यातायात, सड़क की हालत तो यहां बदतर है ही उद्योग धंधों का भी सवर्था अभाव है। सपा सरकार ने एक ट्रामा सेंटर दिया भी लेकिन आठ साल में यह बनकर तैयार नहीं हुआ।

अधूरा पड़ा ट्रामा सेंटर
अधूरा पड़ा ट्रामा सेंटर

बता हो रही है फूूलपुर-पवई विधानसभा क्षेत्रत्र की। जनता की उम्मीदें इस चुनाव में क्या हैं यह जानने के लिए पत्रिका टीम ने क्षेत्र के राजापुर सिकरौर, ऊदपुर, चकसुदनी, मेंजवा आदि गांवों का दौरा किया। युवाओं और बुजुर्गाे से बात की और उनकी समस्याएं जानीं। गांवों में तो समस्याओं का अंबार था लोग परेशान हैं लेकिन जनप्रतिनिधियों और सरकार से कोई उम्मीद नहीं करते।

इसके पीछे वजह भी है। इस क्षेत्र ने वर्ष 1977 में राम नरेश यादव के रूप में यूपी को मुख्यमंत्री दिया था। चंद्रजीत यादव के बाद सर्वाधिक चार बार सांसद रहे रमाकांत यादव भी इसी क्षेत्र के है और यहां से चार बार विधायक रहे हैं लेकिन यह क्षेत्र विकास से कोसों दूर है। यहां के लोग सड़क, बिजली, पानी की समस्या से तो जूझ ही रहे हैं क्षेत्र की स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था भी बदतर है।

आसिफ अहमद, सुहेल, गुफरान, बदरूद्दीन, नूरूलहक, रईश, मोहम्मद आदिब, फैजान, लईक रहमान, मोहम्मद इस्तियाक, अंबर, अरमान, डा. यासिर उमर, रेहान, अब्दुल सुहेल, रवि प्रकाश सिंह, रामाश्रय यादव, रामदुलारे यादव, संदीप विश्वकर्मा आदि ग्रामीणों के मुताबिक उनकी समस्याओं पर कोई सरकार ध्यान नहीं देती। चाहे वह पूर्ववर्ती कांग्रेस, सपा अथवा बसपा की सरकार रही हो या वर्तमान बीजेपी सरकार। सिर्फ चुनाव के समय लंबे चौड़े वादे होते हैं। चुनाव के बाद कोई मुड़कर नहीं देखता है। वर्तमान में यूपी में बीजेपी की सरकार है और अरूणकांत यादव उन्हीं की पार्टी के विधायक फिर भी व्यवस्था जस की तस है।

सबसे बड़ी समस्या

छात्र- क्षेत्र में अच्छे स्कूल कालेज नहीं हैं। जो हैं उसमें शिक्षकों का आभाव है। प्राथमिक शिक्षा का स्तर निम्न है।

किसान- क्षेत्र के फूलपुर में पूर्वांचल की सबसे बड़ी मिर्चा मंडी है लेकिन निर्यात की अच्छी व्यवस्था व अच्छी मंडी न होने के कारण लोगों की रूचि इसकी खेती से कम हो रही है। अन्य फसलों का वे उत्पादन करते है तो बाजार न मिलने के कारण औने पौने दामों पर बेचना पड़ता है।

व्यवसाय- लघु उद्वोग को बढ़वा देने के लिए कोई योजना नहीं है। बिजली और यातायात संकट के कारण जो व्यवसाय हैं वे भी सिमट रहे हैं। सरकार स्तर पर कोई सुविधा नहीं मिल रही है।

युवा-युवाओं के लिए रोजगार एक बड़ी समस्या है। पढ़े लिखे युवा रोजगार न मिलने के कारण बेकार हैं। स्व. रोजगार के लिए चल रही योजनाओं का लाभ भी इन्हें नहीं मिल रहा।

चिकित्सा- सपा सरकार में फूलपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में ट्रामा सेंटर का निर्माण शुरू हुआ जो आज भी अधूरा है। स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह जिला मुख्यालय पर निर्भर है।

फूलपुर-पवई विधानसभा एक नजर में

इस विधानसभा में फूलपुर, राजापुर सिकरौर, कनेरी, ऊदपुर, सुदनीपुर, चमावा, अंबारी, खानजहांपुर, आंधीपुर, कटार, उदपुर आदि गांव आते हैं। यहां बीजेपी के अरूणकांत यादव विधायक है। वर्ष 2012 में यहां सपा के श्याम बहादुर यादव विधायक चुने गए थे है। इसके पूर्व वर्ष 2007 में पर्वू सांसद रमाकांत यादव के पुत्र अरूण यादव सपा से विधायक थे।

विधानसभा की टॉप-10 प्राथमिकताएं
-क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है। शासकीय अस्पताल खुलने चाहिए, ट्रामा सेंटर का निर्माण पूरा होना चाहिए।
-शिक्षा के लिए क्षेत्र में पर्याप्त डिग्री कालेज नहीं हैं। इनकी संख्या बढ़े।
-क्षेत्र के कस्बों में अनियमित कालोनियों की भरमार है। इन्हें नियमित किये जाने की जरूरत है।
-पर्यावरण के क्षेत्र में कोई काम नहीं हुआ है। पर्यावरण की दिशा सुधारी जाए।
-ग्रामीण क्षेंत्रों में परिवहन व्यवस्था ठीक से नहीं है। निजी वाहन चालक मनमानी करते हैं।
-महिलाओं को स्वालंबी बनाने के लिए स्वरोजगारपरक कोर्स चलाएं जाएं।
-ग्रामीण इलाकों में पेयजल और नाली निकास की सुविधा पर ध्यान दिया जाए।
-ग्रामीण इलाकों में कई जगहों पर नदी और नालों पर संपर्क पुल और पुलिया बने।
- ग्रामीण इलाकों में संपर्क मार्ग और सड़कों की हालत खस्ता है। इन्हें ठीक किया जाए।

ग्रामीणों की प्राथमिकताएं
-क्षेत्र में बेहतर बेहतर सड़क और जल निकासी की व्यवस्था हो।
-चिकित्सा व्यवस्था दुरुस्त हो, ताकि इलाज के लिए दूर ना जाना पड़े।
-सरकारी स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई का स्तर हो बेहतर।
-बुजुर्गों को सामाजिक संरक्षण मिले इसके लिए क़ानून बनाया जाए।
-पात्रों को पेंशन दी जाय और इसकी राशि बढ़ाई जाए।

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