साथ आए सभी बागी नेता, इस पार्टी को सबक सिखाने का बनाया प्लान

निकाय चुनाव में सपा, बसपा और भाजपा के बागियों ने लगाया निर्दलियों पर दांव, अपनी-अपनी पार्टी को सबक सिखाने की बनायी योजना।

आजमगढ़. निकाय चुनाव में वर्षो बाद सिंबल पर चुनाव लड़ रहे राजनीतिक दलों की मुसीबत कम नहीं हो रही है। सत्ताधारी बीजेपी से लेकर विपक्षी दल सपा और बसपा भीतरघात और बगावत से जूझ रही है। टिकट न मिलने से नाराज सभी नेता एक प्लेटफार्म पर दिख रहे है और इनका मकसद सिर्फ पार्टी प्रत्याशी को नीचे से नंबर एक बनाना है। इसके लिए सब मिलकर निर्दल पर भी दाव लगाने के लिए तैयार हैं। इससे तीनों दलों की मुसीबत बढ़ गई है और पार्टी के बड़े नेता अपनी इज्जत बचाने के लिए मैदान में कूद गए हैं।


बता दें कि राजनीतिक दल निकाय चुनाव को लोकसभा चुनाव का सेमीफाइनल मानकर लड़ रहे हैं। आजमगढ़ नगरपालिका सीट पर भाजपा का कब्जा है। बीजेपी ने अध्यक्ष इंदिरा जायसवाल को दरकिनार अजय सिंह को मैदान में उतारा है। इंदिरा के पुत्र दीनू ने निर्दल पर्चा भरा लेकिन बाद में वापस ले लिये। इसके अलावा पार्टी में आधा दर्जन दावेदार थे जो टिकट न मिलने से नाराज है।


बसपा ने पूर्व नगपालिका अध्यक्ष शीला श्रीवास्तव को दरकिनार कर सुधीर सिंह पपलू को मैदान में उतारा है। शीला निर्दल लड़ रही है तो पार्टी के पुराने नेता रूपेश सिंह ने टिकट न मिलने के कारण पार्टी से बगावत कर दी है। जिसका नुकसान पार्टी को उठाना पड़ रहा है।


सपा की गुटबाजी किसी से छिपी नहीं है। पार्टी ने पदमाकर लाल वर्मा को मैदान में उतारा है। जो दुर्गा प्रसाद यादव के गुट के है। दो गुट तो अपने पत्याशी को टिकट न मिलने से नाराज है ही साथ ही जो दावेदार किसी गुट के नहीं थे और टिकट नही पाये वे भी पार्टी की खटिया खड़ी करने की सारी जुगत लगा रहे है।


पार्टी के बड़े नेता भी इससे वाकिफ है। यहीं वजह है कि पदमाकर के लिए पूर्व मंत्री दुर्गा प्रसाद यादव गलियों की खाक छान रहे हैं तो बसपा में सुधीर के लिए पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सुखदेव राजभर से लेकर विधायक गुड्डू जमाली व अन्य बड़े नेता पूरी ताकत झोक दिये है। रहा सवाल भाजपा का तो कार्यकर्ताओं को एकजुट करने और रूठों को मनाने के लिए प्रदेश अध्यक्ष जिले का दौरान कर चुके है और भी कई बड़े नेता मैदान में उतरने वाले है।
इतनी सारी कवायद के बाद भी कोई पार्टी इस स्थिति में नहीं है जो खुलकर अपनी जीत का दावा कर सके।

 

कारण कि भितरघात इनके लिए मुसीबत बनी हुई है। नाराज नेता अपनी पार्टी को हराने के लिए विकल्प खोज रहे है। इससे दो निर्दल प्रत्याशियों की चांदी दिख रही है। सूत्रों की माने तो सारे बागी इस बात को लेकर एकजुट हो गये है कि पार्टी को सबक सिखाना है। सपा बसपा और भाजपा यहां न जीते इसके लिए अंतिम समय तक यह देखने का फैसला किया गया है कि कौन निर्दल सबसे मजबूत है। ये बागी अंतिम समय में उसी का समर्थन कर टिकट न मिलने का बदला चुकाने की तैयारी कर रहे है।
by RAN VIJAY SINGH

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रफतउद्दीन फरीद
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