लिंक एक्सप्रेस-वे के लिए किसानों की खड़ी फसल प्रशासन से रौदा, जमकर बवाल

मुआवजे की मांग पर अड़े किसानों से अधिकारियों की नोकझोंक, पुलिस ने लाठी चार्ज कर भीड़ को खदेड़ा

किसान लगा रहे प्रशासन पर मनमानी का आरोप, कई थाने की फोर्स मौके पर तैनात

अतरौलिया थाना क्षेत्र के हैदरपुर गांव में हुआ विवाद, कुछ बोलने के लिए तैयार नहीं हैं अधिकारी

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
आजमगढ़. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी योजना गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे का निर्माण शुरू करने के लिए रविवार को प्रशासन ने किसानों की खड़ी फसल जेसीबी से पलटवा दिया। इसके बाद किसान आक्रोशित हो उठे और मुआवजे की मांग जेसीबी के सामने खड़े हो गये। विवाद इतना बढ़ गया कि प्रशासनिक अधिकारियोें से किसानों की नोकझोंक शुरू हो गयी। इसके बाद पुलिस ने किसानों पर लाठी चार्ज कर दिया। इसके बाद भीड़ तितर बितर हो गयी। किसानों के आक्रोश को देखते हुए भारी संख्या में फोर्स तैनात कर दी गयी है।

पूर्वांचल एक्सप्रेस वे से गोरखुपर के लिए लिंक एक्सप्रेस-वे बनाया जा रहा है। 91.352 किमी लंबा यह एक्सप्रेस-वे चार लेन का होगा। साथ ही दो अतिरिक्त लेने बनाया जा रहा है। आजमगढ़ के सलालपुर में एक्सप्रेस-वे के पास इसका अंतिम बिंदु है। अब तक 10 प्रतिशत से अधिक काम कराया जा चुका है। यह परियोजना मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना है। इसलिए इसे समय से पूरा करने का दबाव कार्यदायी संस्था पर है। सरकार चुनाव से पहले इसका निर्माण पूरा कराना चाहती है।

एक्सप्रेस-वे अतरौलिया थाना क्षेत्र के हैदरपुर गांव से होकर गुजरा है। एक्सप्रेस वे की भूमि पर किसानों की गेंहू की फसल है। रविवार को प्रशासन ने निर्माण कार्य आगे बढ़ाने से लिए दोपहर करीब 12 बजे किसानों की फसल जेसीबी से रौदवाने लगा। इसकी जानकारी होने पर सैकड़ों की संख्या में किसान मौके पर पहुंच गए और मुआवजे की मांग करने लगे। अधिकारियों ने किसानों पर दबाव बनाकर उन्हें भगाने की कोशिश की तो किसान अड़ गए। इसके बाद अतरौलिया सहित कई थाने की फोर्स मौके पर बुला ली गयी। कार्यदायी संस्था के साथी ही प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। अधिकारियों से भी किसानों की झड़प् हो गयी। इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज शुरू कर दिया।

पुलिस की लाठीचार्ज से भीड़ तितर बितर हो गयी लेकिन थोड़ी देर बाद किसान फिर मौके पर पहुंच गए। किसान मुआवजे के लिए नारेबाजी कर रहे हैं। प्रशासनिक अधिकारी उन्हें समझाने में जुटे हैं लेकिन किसान मुआवजे के अलावा कुछ सुनने को तैयार नहीं है। खड़ी फसल बर्बाद करने व किसानों पर लाठीचार्ज के मुद्दे पर कोई अधिकारी कुछ बोलने के लिए तैयार नहीं है।

BY Ran vijay singh

रफतउद्दीन फरीद
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned