सपा के गढ़ अखिलेश को उन्हीं के अंदाज में जवाब, भाजपा ने उतार दिया नेताओं की फौज

आजमगढ़ जिला यूपी की राजनीति का केंद्र बनता जा रहा है। कभी मुलायम और अखिलेश को जिताने के लिए समाजवादी पार्टी ने मंत्री और विधायकों की फौज उतारी थी आज बीजेपी सत्ता में है तो सपा का किला ध्वस्त करने के लिए यहां मंत्री, विधायक और सांसदों को मैदान में उतार दिया है। मंत्री से लेकर विधायक और सांसद तक गांव के गलियों की खाक छानते नजर आ रहे है।

By: Ranvijay Singh

Updated: 21 Aug 2021, 10:45 AM IST

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
आजमगढ़. यूपी विधानसभा चुनाव करीब आने के साथ ही आजमगढ़ जिला यूपी के राजनीति का केंद्र बनता जा रहा है। सपा, बसपा, कांग्रेस, भीमआर्मी पूरी ताकत के साथ मैदान मेें उतर चुकी है। सपाई भगवान परशुराम के बहाने ब्राह्मण मतों के ध्रुवीकरण की कोशिश कर रहे हैं तो बसपा ब्राह्मण उत्पीड़न को मुद्दा बना रही है। वही भाजपा सपा को उसी के दाव से चित करने की कोशिश में जुटी है। पार्टी ने बूथ विजय अभियान के बहाने संगठन के साथ ही मंत्री, विधायक और सांसदों को भी मैदान में उतार दिया है। आजमगढ़ से ही पूरेे पूर्वांचल को साधने की कोशिश हो रही है।

बता देें कि पिछलेे चुनावों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेेत्र राजनीतिक दलों का केंद्र हुआ करता था। सभी दल यहीं से पूरे पूर्वांचल को साधनेे की कोशिश करते थे लेकिन अब राजनीति का केंद्र आजमगढ़ बनता दिख रहा है। अखिलेश यादव आजमगढ़ में कार्यालय बनवा रहे है। सपा पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि सपा मुखिया यहीं सेे पूरे पूर्वांचल को डील करेंगे।

बसपा ने मुस्लिम मतों के ध्रुवीकरण के लिए आजमगढ़ जिले के विधायक शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली को विधानमंडल का नेता बना दिया है। वहीं पार्टी के कोआर्डीनेटर लगातार जिले में रुककर मऊ, बलिया सहित आसपास के जिलों में कार्यक्रम चला रहे हैं। भीम आर्मी पिछलेे दो महीनों से दलित उत्पीड़न को लेकर मैदान में है। वहीं कांग्रेस घर-घर पहुंचने के लिए जय भारत अभियान चला रही है।

अब भाजपा भी मैदान में कूद गयी है। बीजेपी सपा को उसी के दाव से चित कर समाजवादियों के मजबूत किले के भेदना चाहती है। बूथ विजय अभियान के तहत भाजपा ने अपने सांसद, विधायक, मंत्री, पूर्व मंत्री, पूर्व विधायक और प्रदेश के पदाधिकारियों को मैदान में उतार दिया है। पहली बार बीजेपी के बड़े नेता चट्टी चौराहे और गांव की गलियों में नजर आ रहे हैं। सब मिलाकर स्थिति दिलचस्प होे गयी है।

Ranvijay Singh
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