अपने ही जाल में फंसी बीजेपी, कांग्रेस सहित विपक्ष को मिल गयी संजीवनी

मिशन 2019 पर पानी फेर रहा है एससी एसटी एक्ट।

आजमगढ़. पिछले चार साल से विपक्ष को लागातार मात दे रही बीजेपी अपने ही बिछाए जाल में बुरी तरह फंस गयी है। इससे न केवल विपक्ष को संजीवनी मिल गयी है बल्कि बिना कुछ किए उनका वोट प्रतिशत बढ़ता दिख रहा है जो वर्ष 2019 के आम चुनाव में बीजेपी पर भारी पड़ सकता है। खुद पार्टी के लोग दबी जुबान यह मान रहे हैं कि सरकार ने खुद अपने पैर में कुल्हाड़ी मार लिया है। वहीं सपा, बसपा और कांग्रेसी पहली बार बीजेपी सरकार के किसी फैसले से अंदर ही अंदर खुश हैं।

 

बता दें कि कभी एससी एसटी एक्ट बसपा के लिए मुसीबत बन गया था। इस एक्ट के लागू होने के बाद सवर्ण उत्पीड़न को सबसे अधिक मुद्दा बीजेपी ने ही बनाया था। सवर्णो ने पूरी तरह बसपा का साथ छोड़ दिया था। इसके बाद मायावती को मुख्यमंत्री रहते इसे सरल बनाने के लिए मजबूर होना पड़ा था।

 

पिछले दो दशक से यह मुद्दा पूरी तरह शांत था लेकिन दलित मतों में पैठ बनाने और मायावती का वर्चस्व तोड़ने के लिए प्रयासरत बीजेपी ने इस एससी एसटी एक्ट को कठोर बनाकर सवर्णो की दुखती रग पर हाथ रख दिया है। जबकि सवर्णो को बीजेपी का वोट बैंक माना जाता है। एक्ट में बदलाव के बाद से ही सवर्णो में गुस्सा है लेकिन विपक्ष भी इसपर कुछ बोलने की स्थित में नहीं है। कारण कि सपा, बसपा और कांग्रेस को यह अच्छी तरह से पता है कि इस मुद्दे पर बीजेपी का विरोध करना सीधा दलितों को नाराज करना है।

 

रहा सवाल सवर्णो का तो आज वे पूरे देश में विरोध प्रदर्शन कर रहे है। बुधवार को हिंदू महासभा के जिलाध्यक्ष ने कलेक्ट्रेट के पास आत्मदाह का प्रयास किया था। शायद यह गुस्सा उसी समय फूट पड़ता जब केंद्र सरकार ने एक्ट में बदलाव किया था लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी के निधन के बाद यह मामला थोड़ा शांत हो गया था कारण कि हर कोई उनके निधन से मर्माहत था। लोगों को शांत देख बीजेपी ने मान लिया था कि उसने दलित को भी साध लिया और सवर्ण भी नाराज नहीं हुए लेकिन आज के विरोध प्रदर्शन ने बीजेपी का होस उड़ा दिया है।

 

अब उसे डर सताने लगा है कि इसका परिणाम क्या होगा। अगर सवर्णो ने 2019 में साथ छोड़ दिया तो उसके दोबारा सरकार बनाने के सपने का क्या होगा?, नेताओं के चेहरे पर बेचैनी साफ दिख रही है लेकिन उनके पास विकल्प भी नहीं बचा है। खुद पार्टी के नेता मान रहे हैं कि सरकार के एक फैसले ने उनकी राह को मुश्किल कर दिया है।

By Ran Vijay Singh

BJP Congress
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रफतउद्दीन फरीद Desk/Reporting
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