तहसील दिवस पर इंसाफ मांगने आया बुजुर्ग को एसडीएम ने जड़ा थप्पड़, दांत टूटा

पीडित बुजुर्ग ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर न्याय की लगाई गुहार

आजमगढ़. योगी राज में समाधान दिवस में समाधान मिलना तो दूर अब अधिकारी ही दबंगई पर उतर आये है। कुछ ऐसा ही हुआ निजामाबाद तहसील दिवस पर आयोजित समाधान दिवस में जहां दबंगों के खिलाफ शिकायती पत्र लेकर पहुचे 70 वर्षीय बुर्जुग को एसडीएम ने ऐसा थप्पड जड़ा कि बुजुर्ग के दांत ही बाहर आ गये। घटना के बाद पीडित बुजुर्ग ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई है।


निजामाबाद तहसील के फरीदूनपुर गांव निवासी 70 वर्षीय प्रेम सागर पाठक गांव के दबंगो द्धारा अपनी जमीन पर कब्जा किये जाने व कच्चे मकान का पानी रोके जाने को लेकर निजामाबाद तहसील में आयोजित तहसील दिवस पर प्रार्थना पत्र देने पहुंचे थे। पीड़ित बुजुर्ग का आरोप है कि जब वह समाधान दिवस में जिलाधिकारी के सामने अपनी समस्या का बता रहा था और आदेशों की कापी को दिखा रहा था उसी दौरान एसडीएम के अधीनस्थों ने कहा कि आप की बात सुन ली गयी है आप चलिए और उसके बाद समाधान दिवस के सभागार से उसे घसीटकर बाहर निकाला गया। जहां एसडीएम अनिल कुमार सिह ने उसे ऐसा थप्पड जड़ा कि उसका दांत टूट गया। एसडीएम के इस व्यवहार से भयभीत पीड़ित जिलाधिकारी कार्यालय पर पहुंचा और न्याय की गुहार लगाई। पीड़ित का आरोप है कि गांव के दबंग भूमिधरी 83क/52 कड़ी पट्टे की जमीन पर तहसीलकर्मीयों की मिलीभगत से कब्जा जमा लिये है और दबंगई के बल पर आरसीसी रोड बना लिया तथा अब उनके कच्चे मकान का पानी रोक कर उसे गिराकर उस पर भी कब्जा करना चाहते है।






वहीं एसडीएम अनिल कुमार सिंह का कहना है कि उनके उपर लगाये जा रहे आरोप बेबुनियाद है और अज्ञात कारणों से लगाये जा रहा है। पीडित समाधान दिवस में जिलाधिकारी के सामने तेज आवाज में चिल्ला रहे थे जिस पर जिलाधिकारी ने तत्काल राजस्व कर्मीयों की टीम को मौके पर भेजने का निर्देश दिया। इसके बाद भी पीड़ित वही पर बैठ कर चिल्लाने लगा, जिस पर मेरे द्धारा समाधान दिवस में कोई व्यवधान न हो इसके लिए उनके बांह को पकड कर उठाया गया और वे फिर बाहर निकल गये।


मौके पर गयी टीम ने पीड़ित के बेटे वेद प्रकाश पाठक की मौजूदगी में भूमि का सीमांकन किया। जिसमें पीडित की भूमि पर किसी भी प्रकार का कब्जा नही मिला। एसडीएम ने कहा कि उनके बेटे ने बताया कि उनके पिता मानसिक रूप थोड़ा सा विक्षिप्त है वे अनावश्यक भाग दौड़ करते रहते है।
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अखिलेश त्रिपाठी
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