आजमगढ़ व मऊ में सक्रिय है सिमी का स्लिपर सेल

आजमगढ़ व मऊ में सक्रिय है सिमी का स्लिपर सेल
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Ashish Kumar Shukla | Publish: Apr, 04 2016 09:30:00 PM (IST) Azamgarh, Uttar Pradesh, India

यहीं का रहने वाला है सीमी का पहला अध्यक्ष, एनआईए को आधा दर्जन मोस्ट वांटेंड की है तलाश

आजमगढ़. एनआईए अफसर तंजील अहमद की हत्या के बाद एक बार फिर खुफिया एजेंसियों की नजर आजमगढ़ जिले पर है। सूत्रों की मानें तो आजमगढ़ और मऊ में सिमी के स्लिपर सेल सक्रिय हैं और केरल में सिमी कैंप चलाने के मामले के आरोपी जिले के फरिहा निवासी वासिक बिल्ला सहित आधा दर्जन मोस्ट वांटेड आतंकियों की तलाश में एनआईए लगी भी है। यहीं नहीं जिले के असदुल्लाह उर्फ हड्डी की गिरफ्तारी पिछले दिनों आतंकी यासीन भटकल के साथ हो चुकी है जो कि इंडियन मुजाहिद्दीन का मास्टरमाइंड रहा है। ऐसे में घटना का तार आजमगढ़ से जोड़कर देखना स्वाभाविक है। 

गौर करें तो 1993 में हुए मुम्बई बम विस्फोट में जिले के अबू सलेम का नाम आया था। तभी से इस जिले में संदिग्धों की गतविधियां शुरू हुई। माफिया डान हाजी मस्तान और इब्राहिम दाउद के रिश्ते भी इस जिले रहे है। सिमी का पहला राष्ट्रीय अध्यक्ष शाहिद बद्र आजमगढ़ के मनचोभा गांव का रहने वाला है। वर्ष 2001 में शाहिद को गिरफ्तार भी किया गया था। पिछले एक दशक में देश के विभिन्न हिस्सों में हुए बम धमाकों में भी इस जिले का नाम आ चुका है। अब भी छह मोस्ट वांटेड आतंकी एनआईए की पकड़ से दूर है। इसमें सबसे अहम 2007 में केरल के कोट्टायम में हुए सिमी के विशेष प्रशिक्षण शिविर चलाने के मामले में आरोपी बनाया गया फरिहां निवासी वासिक बिल्ला है। जिसकी तलाश में एनआईए वर्ष 2007 से घूम रही है। कई बार एनआईए के अधिकारी उसकी तलाश में आजमगढ़ भी आ चुके है।

 वर्ष 2014 में उसके घर फरारी की नोटिस भी चस्पा की जा चुकी है। सूत्रों की माने तो एनआईए अधिकारी तंजील अहमद भी इन आतंकियों की तलाश में आजमगढ़ आ चुके है। रविवार को तंजील अहमद की हत्या के बाद घटना का तार आजमगढ़ से जोड़कर देखा जा रहा है। इसके पीछे पुख्ता कारण भी है। पिछले दिने नेपाल बार्डर पर इंडियन मुजाहिद्दीन केे मास्टर मांइड यासीन भटकल की गिरफ्तारी हुई थी। उसके साथ जिले का मोस्ट वांटेड असदुल्लाह उर्फ हड्डी भी पकड़ा गया था। खुफिया एजेंसियों को पहले से ही शक था कि आईएम के लोग यहां यहां सक्रिय है और उनका स्लीपर सेल आजमगढ़ और मऊ में काम कर रहा है। हड्डी की गिरफ्तारी के बाद इन अटकलों को बल मिला कारण कि नेपाल का बार्डर गोरखपुर से जुडा है और यहां से आजमगढ़ की दूरी काफी कम है। 

तस्करी का सारा कारोबार इसी रास्ते से होता है। पाकिस्तान से नकली नोट भी इसी रास्ते से जिले में पहुंचती है। ऐसे में आतंकियो अथवा स्लीपर सेल तक सुविधा मुहैया कराने का इससे अच्छा रास्ता नहीं हो सकता। यहीं नहीं अभी 31 जनवरी 2016 को एनआईए की रिपोर्ट पर महराजगंज पुलिस ने सोनौली बार्डर से पीसीओ में काम करने वाले आजमगढ़ के खालिसपुर गांव निवासी फैसल को गिरफ्तार किया था। फैसल पर खांचा व्यापार के जरिये भारतीय अर्थव्यवस्था को चूना लगाने का आरोप लगा था। यह सारी चीजे कहीं न कहीं साफ करती है कि कुछ तो गड़बड़ है।
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