आजमगढ़ बना पान मसाले के नकली कारोबार का हब 

जर्दा, गुटखा, कत्था, सिगरेट तक किया जाता है तैयार, असली डिब्बे में पैक नकली माल खरीद रहे हैं लोग

आजमगढ़. जिले में ब्रांडेड के नाम पर नकली का कारोबार कोई नई बात नहीं है। वर्षों से यह खेल यहां चलता रहा है लेकिन पिछले कुछ दिनों से यह नकली जर्दा, गुटखा, कत्था आदि के कारोबार का जनपद हब बन चुका है। पान दरिबा के पास तो हफ्ते में दो बार मंडी सजती है लेकिन अधिकारी है कि आंख-कान बंद किये हुए हैं। परिणाम है कि आम आदमी असली पान मसाले का पैसा देता है और नकली पदार्थ उसके हाथ लगते हैं। इनका सेवान कर लोग जल्दी ही गंभीर बीमारी का शिकार होकर जान गवां बैठते हैं।

बता दें कि नशीले पदार्थों का मूल्य टैक्स के जरिये सरकार निरंतर बढ़ा रही है। इससे दुकानदारों की बचत कम हुई है। इसलिए अधिक आय के चक्कर में दुकानदार भी आसानी से नकली कारोबारियों के झासे में फंस रहे हैं। गौर करें तो करीब 8 साल पहले हुसेनगंज के पास नकली कत्था फैक्ट्री पकड़ी गयी
थी। 

वहीं शंकरपुर चेकपोस्ट पर भी ट्रांसपोर्ट कम्पनी परिसर में नकली जर्दा फैक्ट्री के संचालन का पर्दाफास हो चुका है। यही नहीं करीब 3 साल पहले शहर कोतवाली से बमुश्किल 700 मीटर दूरी पर स्थित कोलघाट में नकली गुटखा (आशिक) बनाने की फैक्ट्री पकड़ी गयी थी। इसके बाद भी प्रशासन कभी इस कारोबार को गंभीरता से नहीं लिया। आज भी हुसेनगंज क्षेत्र में नकली पान मसाला फैक्ट्रियों का संचालन होता है। यही नहीं प्रत्येक रविवार व बुधवार को पान दरिबा के पास नकली गुटखा, जर्दा आदि की मंडी लगती है। एजेंट दरिबा में घुमते रहते हैं और वहां से ग्राहकों को बाहर ले जाकर नकली माल उपलब्ध कराते हैं। अहम बात है कि नकली उत्पाद हमेशा बड़े ब्रांडों का बनाया जाता है जैसे भोला, रत्ना, गोपाल जर्दा आदि। आम आदमी के लिए इसकी पहचान मुश्किल है। सामान असली है या नकली सेवन के बाद ही पता चलता है। 

वैसे वर्तमान में लाखों रुपये का माल बाजार में उतारा गया है और कारोबारियों ने बड़ी चूक की है। 1 अपै्रल से भोला एलो का मूल्य कम्पनी ने 84 रुपया कर दिया है जबकि मार्केट में उपलब्ध नकली जर्दे के डिब्बे पर 60 रुपया प्रिंट है। अन्य उत्पादों में भी इस तरह की चूक देखने को मिल रही है। अहम बात है कि एफडीए के लोग शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। रहा सवाल पुलिस का तो कहीं न कहीं इनका संरक्षण कारोबारियों को प्राप्त है।
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अखिलेश त्रिपाठी
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