नक्सली हमले में शहीद हुआ आजमगढ़ का लाल, शहादत पर हर किसी को गर्व

बिहार प्रांत के औरंगाबाद जिले के सोनदााहा जंगल में नक्सली हमले का शिकार हुए थे सिनोद

आजमगढ़. बिहार प्रांत में औरंगाबाद जिले के सोनदाहा जंगल में सोमवार को नक्सलियों द्वारा बारूदी सुरंग बिछाकर किए गए हमले में जिले ने एक होनहार बेटा खो दिया। सीआरपीएफ जवान की शहादत की सूचना से गांव में ही नहीं बल्कि आसपास के क्षेत्र में भी मातम पसरा है लेकिन परिजन और जिले के लोग बेटे की शहादत पर गर्व महसूस कर रहे हैं। शहीद के घर शोक व्यक्त करने वालों का तांता लगा है। देर शाम शव घर पहुंचने की संभावना है।

निजामाबाद क्षेत्र के गौसपुर घूरी ग्राम निवासी किसान तुफानी राम के दो पुत्रों में बड़ा विनोद मुंबई में रहकर प्राइवेट नौकरी करता है। छोटा पुत्र सिनोद (24) वर्ष 2011 में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल में आरक्षी पद पर भर्ती हुआ। इलाहाबाद में प्रशिक्षण के बाद उसे उड़ीसा में तैनाती मिली। ढाई वर्ष पूर्व सिनोद की तैनाती बिहार प्रांत में सीआरपीएफ की कोबरा कमांडो यूनिट में की गयी। तभी से वह यहां तैनात था। सोमवार को सिनोद अपने साथी जवानों के साथ बिहार के औरंगाबाद व गया जिले की सीमा पर स्थित सोनवाहा जंगल में कांबिंग पर निकला था।

जवानों का वाहन जैसे ही डुमरी नाले के पास पहुंचा नक्सलियों द्वारा किए गए सीरियल आईईडी बिस्फोट में सीआरपीएफ के दर्जनभर जवान शहीद हो गए। शहादत देने वाले जवानों में यूपी के दो, बिहार के तीन, पश्चिम बंगाल के दो, पंजाब के एक, मध्य प्रदेश के एक सहित अन्य जवान शामिल बताए गए हैं। मंगलवार की सुबह सीआरपीएफ के असिस्टेंट कमांडेंट द्वारा शहीद के भाई विनोद को फोन पर छोटे भाई की शहादत की सूचना मिली।

मौत की खबर पाते ही मृतक की मां कवलपत्ती, पत्नी जान्हवी सहित परिजनों में कोहराम मच गया। निधन की सूचना पर दिवंगत सिनोद की बहन रीता भी रोते-बिलखते मायके पहुंची। एक अन्य बहन अनीता का इंतजार किया जा रहा है। सीआरपीएफ अधिकारियों के अनुसार पोस्टमार्टम के बाद शव को शहीद के पैतृक गांव भेजा जा रहा है। देर शाम तक शव पहुंचने की उम्मीद है।
वाराणसी उत्तर प्रदेश
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