मुलायम के गढ़ में बसपा के बाहुबली ने बढ़ाई सपा-भाजपा की मुसीबत

मुलायम के गढ़ में बसपा के बाहुबली ने बढ़ाई सपा-भाजपा की मुसीबत
Mulayam, Mayati and Modi

भाजपा नई रणनीति तो सपा बाहुबली की काट खोजने में जुटी, बाहुबली अखंड के मैदान में आने से सपा के साथ भाजपा की बढ़ी मुसीबत, चर्चाः भाजपा गठबंधन हुआ तो भासपा को दे सकती है अतरौलिया सीट

आजमगढ़. बसपा ने सपा के कद्दावर नेता माध्यमिक शिक्षा मंत्री के पुत्र संग्राम यादव के खिलाफ बाहुबली अखंड प्रताप सिंह को मैदान में उतारकर जबरदस्त दांव खेला है। उसके इस दांव से सपा ही नहीं भाजपा की भी मुसीबत बढ़ गयी है। कारण, कि भाजपा के अब तक जितने भी दावेदार सामने आये थे सभी सवर्ण है। अखंड के आने के बाद सवर्णो का झुकाव सबसे अधिक उनकी तरफ दिख रहा है। ऐसे में भाजपा को अब सपा और बसपा को घेरने के लिए नये सिरे से रणनीति बनानी होगी। वैसे चर्चा है कि भाजपा यह सीट अब गठबंधन होने की स्थित में भासपा की झोली में डाल सकती है। यदि ऐसा हुआ और भासपा ने किसी राजभर या निषाद प्रत्याशी को मैदान में उतारा तो लड़ाई दिलचस्प हो सकती है।

बता दें कि सवर्ण बाहुल्य क्षेत्र होने के बाद भी यहां भाजपा की हालत हमेशा से खस्ता रही है। वैसे बसपा ने सवर्ण प्रत्याशी सुरेंद्र मिश्र को मैदान में उतार कर वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में बलराम यादव को मात दी थी। इस बार भी बसपा से  ब्राह्मण प्रत्याशी को ही दावेदार माना जा रहा था, पार्टी ने ब्राह्मण प्रत्याशी रमेश चंद दुबे को प्रत्याशी बनाया था। लेकिन हाल में हाल में उनका टिकट काटकर शुक्रवार को बाहुबली अखंड प्रताप सिंह को उम्मीदवार घोषित कर दिया गया।

करीब 31 सवर्ण प्रतिशत आबादी वाले इस विधानसभा क्षेत्र में बसपा द्वारा अखंड को उतारे जाने से सवर्ण मतों का ध्रवीकरण तय माना जा रहा है। सवर्ण आवादी को देखते हुए ही यहां से भाजपा के विपुल सिंह और रमाकांत मिश्र भी टिकट की दावेदारी कर रहे थे लेकिन अखंड के मैदान में आने के बाद इनकी दावेदारी कमजोर पड़ी है। वहीं यदि भाजपा सवर्ण प्रत्याशी उतारती है तो इसका सीधा लाभ सपा को मिलेगा। इसलिए भाजपा नेतृत्व टिकट पर मंथन करने को मजबूर है। वहीं दूसरी तरफ चर्चा इस बात की भी है कि भाजपा और भासपा के बीच गठबंधन लगभग तय हो चुका है।

पार्टी सूत्रों की मानें तो पार्टी प्रदेश में 20 से 21 सीट भासपा को देने के लिए तैयार है जिसमें एक सीट अतरौलिया है। यदि ऐसा होता है तो भाजपा के दावेदारों के चुनाव लड़ने की उम्मीद पर पानी तो फिर जायेगा लेकिन भासपा निषाद अथवा राजभर जाति का उम्मीदवार मैदान में उतारकर लड़ाई दिलचस्प बना सकेगी। कारण कि अतरौलिया में निषाद जाति के लोगों की संख्या काफी अधिक है। इस जाति का प्रत्याशी पहले भी यहां से जीत हासिल कर चुका है।
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