यहां बिना पुस्तक के स्कूल आ रहे बच्चे, सरकारी गोदाम में सड़ रही किताबें

-विद्यालय खुलने से पहले ही शासन ने उपलब्ध करा दी थी 99 प्रतिशत पुस्तक

-ढुलाई टेंडर में देरी के कारण अब तक स्कूलों पर नहीं पहुंच पाई हैं किताबें

By: Ranvijay Singh

Published: 07 Sep 2021, 02:01 PM IST

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
आजमगढ़. सरकार परिषदीय स्कूलों को पब्लिक स्कूलों के बराबरी पर खड़ा करने का दावा कर रही है लेकिन यहां स्कूल आधी अधूरी तैयारी के बीच खोल दिये गए हैं जिसका खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। परिषदीय जूनियर खुले एक पखवारा और प्राथमिक खुलेे एक सप्ताह हो चुके हैं लेकिन बच्चे आज भी बिना पुस्तक के स्कूल जा रहे है। ऐसा नहीं कि पुस्तक उपलब्ध नहीं है। सरकार ने स्कूल खुलने से पहले ही 99 प्रतिशत बुक उपलब्ध करा दी थी लेकिन विभागीय लापरवाही के कारण वह अब तक बच्चों तक नहीं पहुंच पायी है।

बता दें कि जिले में 2702 परिषदीय विद्यालय हैं। इनमें 528 कम्पोजिट विद्यालय,1720 प्राथमिक विद्यालय तथा 454 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। इनमें पढ़ रहे चार लाख 25 हजार बच्चों को निशुल्क पुस्तकें वितरित करने के लिए शासन ने जून से लेकर अब तक कई चक्रों में 28 लाख 72 हजार पुस्तकों के सापेक्ष 27 लाख 72 हजार पुस्तकें जिला मुख्यालय पर भेज दी है। पुस्तक आने के बाद पांच सदस्यीय टीम से पुस्तक का सत्यापन कराया गया।

सत्यापन के बाद पुस्तकें ब्लाक मुख्यालय फिर वहां से स्कूल पर भेजी जानी थी लेकिन आज भी पुस्तकें जिला मुख्यालय स्थित सरकारी गोदाम में सड़ रही हैं। क्योंकि ब्लाक मुख्यालयों तक उनकी ढुलाई के लिए अभी तक टेंडर नहीं हो सका है। पुस्तकों को वितरित करने के लिए ढुलाई टेंडर न होने से बच्चों का पठन-पाठन अधर में लटक गया है। अधिकारी मौन साधे हैं। विद्यालय के लोग कहते हैं कि जब पुस्तक आयेगी तब वितरण किया जाएगा।

वहीं दूसरी तरफ सरकार ने जून तक ही बच्चों को निःशुल्क पुस्तक उपलब्ध कराने का निर्देश जारी किया था। जूनियर हाई स्कूल 24 अगस्त को खोले गए थे जबकि प्राथमिक विद्यालय एक सितंबर से चल रहे हैं। बच्चे बिना पुस्तक, यूनीफार्म के विद्यालय जाते हैं। वहां मिड-डे-मील का भोजन लेते हैं और खेल कूद कर घर लौट आते हैं।

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अतुल कुमार सिंह का कहना है कि टेंडर की प्रक्रिया चल रही है जल्द ही पुस्तक का वितरण कर दिया जाएगा। वहीं प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक बसंत कुमार का कहना है कि कक्षा पहली से आठवीं तक स्कूल खुले हैं। हम पुस्तक के आभाव में उन्हें कॉमन चीजें बता रहे हैं। पुस्तक वितरण के बाद कोर्स की चीजें पढ़ाई जाएंगी।

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