किसानों के लिए वरदान साबित होगा टिश्यू कल्चर से उत्पादित गन्ना, आएगे अच्छे दिन

किसानों के लिए वरदान साबित होगा टिश्यू कल्चर से उत्पादित गन्ना, आएगे अच्छे दिन

Sarveshwari Mishra | Publish: Sep, 09 2018 03:48:19 PM (IST) Azamgarh, Uttar Pradesh, India

उत्पादन में बढ़ोतरी और लागत में कमी का लाभ भी किसानों को मिल रहा है

आजमगढ़. सठियांव चीनी मिल टिश्यू कल्चर प्रणाली से हजारों गन्ने के पौधे पैदा कर रही है। इस विधि से तैयार पौधे पूरी तरह से रोग से मुक्त होते हैं। वहीं उत्पादन में बढ़ोतरी और लागत में कमी का लाभ भी किसानों को मिल रहा है। टिश्यू कल्चर से उत्पादित गन्ने के पौधों में क्रांति आ सकती है।

 

 

इस बदलाव का लाभ किसान बखूबी उठा रहे हैं। चीनी मिल सठियांव मे चीनी, एथनॉल, बिजली उत्पादन के साथ ही किसानों के लिए गन्ने का पौधा उत्पादन के लिए टिश्यू कल्चर व मृदा परीक्षण के लिए मृदा परीक्षण की लैब की स्थापना की गई है। इससे अब किसानों को नई-नई गन्ना प्रजातियों के बीज व उपज मृदा परीक्षण कराकर कृषि क्षेत्र में किसान खुशहाल होगा। अब किसानों को अच्छे उन्नतिशील बीजों के लिए दर-दर भटकना नहीं होगा। साथ ही मृदा परीक्षण के जरिए अनावश्यक उर्वरक से भी किसान बचेंगे।

 

 

 

चीनी मिल परिसर में सवा करोड़ की लागत से बना टिश्यू कल्चर लैब किसानों के लिए वरदान साबित हो सकता है। इस लैब से उन्नतिशील प्रजाति के गन्ने का पौधा तैयार कर किसानों को कम मूल्य पर उपलब्ध कराया जाएगा। चीनी मिल के परिक्षेत्र के सदस्य किसानों को मात्र ढाई सौ रुपये प्रति सैकड़ा और परिक्षेत्र के बाहर आम तौर पर पांच सौ रुपये प्रति सैकड़े की दर से देय होगा। टिश्यू कल्चर लैब अक्टूबर माह तक दो लाख पौधे तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें लैब पूरी तरह सक्षम नजर आ रहा है।

 

 

कृषि वैज्ञानिक डा. आरएन द्विवेदी का कहना है कि लैब तीन ब्राइटी कोषा 0118, कोषा 0238, कोषा 8272 उपलब्ध हैं। शासन से अभी और प्रजातियां आनी हैं। अब किसानों को गन्ना उत्पादन करने में कम लागत में स्वस्थ्य गन्ना उत्पादन करने में कोई बाधा नहीं आएगी। चीनी मिल जहां फायदे में रहेगी, वहीं इस प्रकार का लैब पूरे प्रदेश में तीसरे नंबर का है। इससे किसानों को गन्ने की खेती करने में कोई समस्या नहीं होगी। अब किसानों को पांच साल तक उन्नतिशील प्रजाति के बीज उनके आर्थिक विकास में भी लाभदायक सिद्ध हो सकते हैं। मृदा परीक्षण लैब से भी किसानों फायदा हो सकता है कि खेत की मिट्टी की परीक्षण कराने के पश्चात इसमें किस पोषक तत्व की कमी है, पता चल जाएगा और उस कमी को पूरा करने के लिए उसी के अनुपात मे उर्वरक का प्रयोग कर फसल उत्पादन करने में आसानी होगी।

By-Ranvijay Singh

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