आजमगढ़ से संदिग्ध फैसल गिरफ्तार

आजमगढ़ से संदिग्ध फैसल गिरफ्तार

ग्रामीणों ने कहा पूरी तरह निर्दोष है आरोपी

आजमगढ. पड़ोसी देश नेपाल की सीमा पर स्थित सोनौली बार्डर पर एक पीसीओ से विदेशों में बात कराकर भारतीय अर्थ व्यवस्था को चूना लगा रहे गिरोह का भंडाफोड़ होने के बाद पुलिस के रडार पर चढ़ा जनपद का निवासी फैसल उर्फ असलम रविवार की दोपहर पुलिस के हत्थे चढ़ गया। देश की खुफिया एजेंसी एनआईए की रिपोर्ट पर महराजगंज जिले से आई फोर्स व जिले के रानीकी सराय थाने की पुलिस द्वारा की गई संयुक्त छापेमारी के दौरान स्थानीय खालिसपुर ग्राम निवासी फैसल रविवार की दोपहर गिरफ्तार कर लिया गया। इस कार्रवाई के दौरान गांव वालों ने पुलिस टीम से गिरफ्तारी के बाबत पूछताछ करना चाहा किन्तु उन्हें कोई जवाब नहीं मिला।

सोमवार को समाचार पत्रों में प्रकाशित खबर के बाद खालिसपुर गांव के लोग अवाक रह गए। गांव के लोगों ने एक स्वर से गिरफ्तार किए गए फैसल को निर्दोष बताया। इस संबंध में जागरण द्वारा की गई जांच पड़ताल के बाद जानकारी मिली कि खालिसपुर ग्राम निवासी व दिव्यांग मु. इफ्तेखार की पांच पुत्रों में सबसे बड़ा 25 वर्षीय फैसल ने कक्षा सात तक पढ़ाई की है। परिवार की माली हालत ठीक न होने के कारण पिता मुंबई में नौकरी करता है। सबसे बड़े पुत्र फैसल पर भी परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी महसूस हुई और वह करीब पांच महीने पूर्व कमाने की गरज से सोनौली बार्डर पर चला गया। वहां उसने जितेन्द्र नामक पीसीओ संचालक के यहां पांच हजार रुपये माहवार पर नौकरी कर ली। एक सप्ताह पूर्व उसने जब पीसीओ संचालक से घर जाने की बात कही तो उसने व्यस्तता का हवाला देते हुए कहा कि तुम घर से किसी को बुला लो तब जाओ। फैसल ने हाई स्कूल पास अपने छोटे भाई खालिद को सोनौली बुला लिया। चार दिन पूर्व फैसल अपने घर आ गया। उधर महराजगंज थाने की पुलिस ने उक्त पीसीओ पर छापा मारा और फैसल के भाई खालिद सहित तीन लोगों को दबोच लिया। खालिद के अलावा पकड़े गए लोगों ने मौके से बरामद दर्जनों मोबाइल सिम, लैपटाप व डिवाइस के बाबत सारा आरोप फैसल पर मढ़ दिया। हिरासत में लिए गए खालिद से मिली जानकारी के बाद महराजगंज थाने की पुलिस ने रानी की सराय पुलिस की मदद से रविवार की दोपहर फैसल को उसके घर से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस फैसल को अपने साथ महराजगंज ले गई। फैसल की गिरफ्तारी से खालिसपुर गांव के लोग हैरान हैं। उसकी गिरफ्तारी के बाबत गांव के 60 वर्षीय ताहिर का कहना है कि पूरे परिवार की माली हालत उनके जर्जर मकान को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि दिव्यांगता के बावजूद परिवार के भरण-पोषण के लिए फैसल का पिता घर छोड़कर नौकरी करने के लिए मजबूर है।

परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए फैसल ने कमाने की सोची और घर से निकला। यदि वह राष्ट्रविरोधी कार्यों में लिप्त होता तो परिवार की हालत ऐसी नहीं होती और वह घर नहीं मिलता। वहीं फैसल के बड़े पिता एजाज अहमद का कहना है कि मेरा भतीजा फैसल पूरी तरह निर्दोष है। छोटे भाई व दिव्यांग मु. इफ्तेखार की 22 विस्वा भूमि पिछले छह वर्षों से गांव के ही एक व्यक्ति के यहां गिरवी है। माली हालत ठीक न होने के कारण आज तक भूमि को मुक्त नहीं कराया जा सका। परिवार चलाने के लिए घर से निकले फैसल के ऊपर ऐसा आरोप लगेगा कभी सोचा भी नहीं था। गांव के ही सुभान अहमद का कहना है कि इस परिवार के बारे में पूरी जांच-पड़ताल कर लेनी चाहिए। पांच हजार रुपये की नौकरी करने वाले फैसल पर राष्ट्रद्रोह जैसा आरोप पूरी तरह निराधार व गलत है। 

वहीं गांव के सुभान अहमद का कहना है कि गिरफ्तार फैसल अभी पांच माह पूर्व घर से कमाने निकला था और पुलिस का आरोप है कि वह पिछले दो वर्षों से देश की सीमा पर गलत कार्य करने में सक्रिय था। इस बात की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। खालिसपुर गांव में सोमवार को जब अखबार नवीसों के पहुंचने का क्रम शुरू हुआ तो गांव के लोगों की जुबान पर बस यही बात कि हमें कानून और मीडिया पर भरोसा है। आप लोग स्वयं इस मामले को बारिकी से देखें और यदि फैसल निर्दोष है तो उसकी रिहाई कराकर गांव को कलंकित होने से बचा लें। वहीं गिरफ्तार फैसल की मां नूरजहां का बेटे की गिरफ्तारी के बाद रो-रोकर बुरा हाल है। खैर मामला देश की अर्थव्यवस्था से जुड़ा है। पुलिस व खुफिया एजेंसियां भी अपने स्तर से इस मामले की जांच पड़ताल में जुटी है। नतीजा जल्द ही सामने आने की उम्मीद है।

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