यूपी बोर्ड उत्तर पुस्तिका मूल्यांकन में अनियमितता पर शिक्षक पर लगा जुर्माना, तीन साल का प्रतिबंध

-एक अन्य विद्यालय को जारी की गयी कारण बताओ नोटिस

By: Ranvijay Singh

Published: 26 Sep 2021, 12:18 PM IST

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
आजमगढ़. यूपी बोर्ड की परीक्षा की उत्तर पुस्तिका मूल्यांकन में लापरवाही बरतने तथा बोर्ड द्वारा लगाए गए जुर्माने की रकम को जमा न करने के मामले को माध्यमिक शिक्षा परिषद ने गंभीरता से लिया है। ग्रामीण ज्ञानस्थली इंटर कालेज के प्रवक्ता से परीक्षा समिति द्वारा जुर्माना की राशि भू-राजस्व की भांति वसूल कर राजकीय कोष में जमा कराने की तैयारी की जा रही है। इसके साथ ही तीन साल तक परिषद के समस्त पारिश्रम कार्यों पर प्रतिबंध लगाया गया है। वहीं एक अन्य मामले में मुहम्मद मसूद खां इंटर कालेज मगरावां के प्रबंधक को कारण बताओ नोटिस जारी की गयी है।

बता दें कि यूृपी बोर्ड परीक्षा वर्ष 2020 की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में त्रुटि पाई गयी थी। मामले को गंभीरता से लेते हुए सचिव उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद प्रयागराज ने ग्रामीण ज्ञानस्थली इंटर कालेज के अंग्रेजी प्रवक्ता सुभाष चंद पर तीन साल के लिए उत्तर पुस्तिका के मूल्यांकन कार्य से प्रतिबंधित करते हुए 10 हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया था लेकिन आरोपी प्रवक्ता द्वारा अब तक अर्थदंड की धननाशि जमा नहीं की गयी। मामले को गंभीरता से लेते हुए बोर्ड ने जुर्माना की राशि भू-राजस्व की भांति वसूली कर राजकीय कोष में जमा कराने की तैयारी कर रहा है।

जिला विद्यालय निरीक्षक डा. वीके शर्मा ने बताया कि ग्रामीण ज्ञानस्थली इंटर कालेज पल्हना के अंग्रेजी प्रवक्ता सुभाष चंद्र ने उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में अनियमिता बरती है। सचिव उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद प्रयागराज ने अवगत कराया है कि परीक्षा समिति की 28 जून को हुई बैठक में निर्णय लिया गया कि प्रवक्ता सुभाष चंद प्रवक्ता को अंग्रेजी विषय की उत्तर पुस्तिका के मूल्यांकन में की गई त्रुटि के लिए परिषद के समस्त पारिश्रमिक कार्यों के लिए तीन वर्ष तक आमंत्रित न किया जाए। साथ ही उनपर 10 हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया है।

उन्होंने बताया कि इसी तरह मुहम्मद मसूद खां इंटर कालेज मगरावां में प्रबंध समिति अस्तित्व में नही है। कालातीत प्रबंध समिति कार्य नहीं कर सकती है। फिर भी प्रबंधक मनमाने तरीके से अधिकार न होते हुए भी नियम विरुद्ध कार्य कर रहे हैं। इसलिए वेतन वितरण अधिनियम 1971 के अंतर्गत कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। जवाब न मिलने पर इनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

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