आजमगढ़ के इस गांव में है ऐसी कमी कि, यहां नहीं टिकती दुल्हनें, जो पति को छोड़कर गयीं, फिर नहीं लौटीं

आजमगढ़ के जहांगीरपुर गांव का है मामला, गांव में अब कोई अपनी लड़की की शादी भी नहीं करना चाहता।

 

रण विजय सिंह

आजमगढ़. आजादी के 70 साल बाद आज भी एक गांव ऐसा है जहां के लोगों को अनपढ़ और गवांर कहा जाता है। यहां तक कि इस गांव में कोई अपनी लड़की की शादी नहीं करना चाहता। अगर किसी लड़की की शादी हो भी जाय तो वह ज्यादा समय मायके में ही गुजारती है। कई दुल्हन तो शादी के कुछ दिन बाद ही पति को छोड़कर चली गयी फिर कभी ससुराल नहीं लौटी। कुछ ने दहेज में मिला सामान मायके भेज दिया। इसके पीछे वजह मात्र एक है गांव में बिजली का न होना है लेकिन सरकार से लेकर अधिकारी तक कोई इनका दर्द समझने के लिए तैयार नहीं है।


बात हो रही है निजामाबाद विधानसभा क्षेत्र के जहांगीरपुर गांव के दलितबस्ती की। इस दलित बस्ती में सैकड़ों परिवार रहते हैं जो मेहनत मज़दूरी कर किसी तरह परिवार का भरण पोषण करते है। यहां तमाम परिवार टूटे फूटे कच्चे मकान अथवा टीनशेड डालकर रहते हैं। सरकारों द्वारा दलितों के साथ भेदभाव का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि पूरे गांव में वर्षो पहले से बिजली है लेकिन दलित बस्ती आज भी अछूती है।


वर्ष 2014 के चुनाव में लालगंज संसदीय सीट पर बीजेपी ने जीत हासिल की और पार्टी की सरकार बननी तो लोगों में उम्मीद जगी कि दलित सांसद है वे उनके दर्द को समझेंगी। हुआ भी ऐसा पार्टी के के मंडल प्रभारी डा. शैलेंद्र यादव व जहांगीरपुर के बूथ प्रभारी पल्टू प्रजापति के प्रयास से सांसद गांव में आयी और वहां के लोगों का दर्द देखने के बाद हाल में विद्युतीकरण कराया। गांव में पोल गड़ गए, बस्ती के भीतर तार खींचकर ट्रांसफार्मर भी लगा दिया गया लेकिन बिजली नहीं पहुंची।


कारण कि चार पोल गाड़ने का काम विभाग ने अधूरा छोड़ दिया। विभाग के लोगों को कहना है कि ब्राह्मण और लाला बस्ती के लोग चारो पोल गाड़ने का विरोध कर रहे हैं। वहीं ग्रामीणों का दावा है कि सड़क के किनारो पोल गाड़कर विभाग

 

बिजली चालू कर सकता है लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा।
बिजली न होने का दुष्परिणाम यहां की युवा पीढ़ी झेल रही है। दलित बस्ती के लालसा पुत्र पांचू बताते हैं कि उन्होंने अपने पुत्र प्रताप की शादी वर्ष 2015 में गांगेपुर गांव में की थी। बहू ढेर सारा इलेक्ट्रानिक सामान लेकर आयी लेकिन जब उसे पता चला कि यहां बिजली ही नहीं है तो निराश रहने लगी और 2016 में उनके बेटे को छोड़कर चली गयी। इस तरह के ममाले यहां पहले भी हो चुके हैं। वहां मौजूद कई बहुओ ने बताया कि उन्होंने मजबूर होकर अपना दहेज में मिला इलेक्ट्रानिक सामान अपने मायके वालों को वापस कर दिया। गांव में किसी के पास टीवी नहीं है।


गांव की अस्सी वर्षीय सजना देवी, छात्रा करिश्मा सरोज, अंजली भारती, मनीषा भारती, हरिश्चंद राम, फूलादेवी, देवनारायण, शिमला देवी, संग्राम, लालधर, पतिराज, धनौता आदि बताते हैं कि गांव में लोग मोबाइल तक चार्ज करने के लिए तरस जाते हैं। बच्चे पढ़ नहीं पाते। यहां तक कि अब कोई उनके गांव में शादी तक करने के लिए तैयार नहीं है। लोग कहते हैं कि यहां के लोग अनपढ़ गवांर हैं, बिजली नहीं है तो कौन अपनी बेटी देगा। अगर किसी की शादी किसी तरह हो गयी तो दुल्हन यहां रहने के लिए तैयार नहीं होती, मायके भाग जाती हैं। अधिकारी हमारा दर्द सुनने के लिए तैयार नहीं हैं।

रफतउद्दीन फरीद Desk/Reporting
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned