आजादी के बाद पहली बार आजमगढ़ में बनें ऐसे हालात  

आजादी के बाद पहली बार आजमगढ़ में बनें ऐसे हालात  
azamgarh violence

आजमगढ़ में सामने आई प्रशासन की लापरवाही, अधिकारी सिर्फ एक दूसरे की पीठ थपथपाने में जुटे हैं और... 

आजमगढ़. तेरे पैरो के नीचे जमी नहीं है, कमाल है तुझे फिर भी यकीं नहीं
मैं इन बेपनाह अंधेरों को सुबह कैसे कहूं, मैं इन नजारों का अंधा तमाशबीन नहीं
किसी नामचीन शायर द्वारा लिया गया यह शेर आज आजमगढ़ प्रशासन पर बिल्कुल सटीक बैठता है। प्रशासन अपनी नकामी को छिपाने के लिए तानाशाही पर उतर आया है। जो आजादी के बाद से अब तक इस जिले में कभी नहीं हुआ था वह जिला प्रशासन और पुलिस की लापरवाहीं के चलते हो गया लेकिन अब भी अधिकारी सिर्फ एक दूसरे की पीठ थपथपाने में जुटे हैं ।

इन्हें लगता है कि इन्टरनेट सेवा बंदकर या लोगों की आवाज को दबाकर ये अपनी नाकामी पर पर्दा डाल देंगे। पर सच है कि इन्हीें की कार्रवाईयां हकीकत बयां कर रही है। शनिवार को खोदादापुर में सांप्रदायिक हिंसा के बाद रविवार के सुबह आजमगढ़ पहुंचे आईजी जोन एसके भगत ने कहा कि हमें खुशी है कि मेंरे अधिकारियों ने काफी अच्छे ढंग से स्थित को संभाला ।

लेकिन उनके जाते ही शाम को खोदादापुर की हिंसा सरायमीर, खरेवां मोंड, बनगाव तक फैल गई और कई बाइक, आरामशीन को आग के हवाले कर दिया गया और एडीजी कानून व्यवस्था दलजीत चौधरी को सोमवार को आजमगढ़ आकर स्वयं कमान संभालनी पड़ी। अब भी वे जिले में कैंप किये हुए हैं। 

पैरा मिलिट्री और 14 कंपनी अतिरिक्त पीएसी लगाने के बाद हालात पर काबू पाया जा सका। अगर प्रशासन इतना ही सक्रिय था तो पैरा मिलिट्री की नौबत क्यों आयी। यहीं नहीं यदि प्रशासन बेहतर काम कर रहा था और हालात नियंत्रण में थे तो एक ही झटके में शासन ने कमिश्नर, डीआईजी और एसपी को क्यों हटा दिया। 

इससे साफ है कि जिले में पुलिस की नाकामी को शासन भी समझ गया। बात यहीं समाप्त नहीं होती अब तक किसी बड़े अधिकारी ने मातहतों से यह जानने का प्रयास नहीं किया कि जब होली के दिन से हालात बिगड़े और फरीदाबाद में हिंसा हुई तो उसके बाद नामजद लोगों को गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया।

फूलपुर के भोरमऊ, पवई की घटना को गंभीरता से क्यों नहीं लिया गया, तीन मई जिस आटो चालक की पिटाई के बाद इतनी बड़ी सांप्रदायिक हिंसा की नीव पड़ी उसमें पुलिस ने क्या कार्रवाई की। बस फरमान जारी कर दिया कि 18 मई तक नेट सेवा रोक दी जाय। अब जिले में बवाल से ज्यादा चर्चा प्रशासन की नाकामी और उसकी कार्यप्रणाली की हो रही है। 

Show More
खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned