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UP Vidhan Sabha Election 2022: ग्राउंड रिपोर्ट- ध्यान देते तो मालिक से मजदूर न बनते 2 लाख बुनकर

UP Vidhan Sabha Election 2022: यूपी विधानसभा चुनाव की घोषणा हो चुकी है। आजमगढ़ जिले के मुबारकपुर क्षेत्र में जिले को पूरे विश्व में पहचान दिलाई। मुबारकपुर की बनी साड़ियों की आज भी पूरी दुनिया में डिमांड है लेकिन दुर्भाग्य यहां के लोगों को बारी बारी से सभी को मौका दिया। यहां तक कि एक बुनकर को भी विधायक बनाया लेकिन किसी ने यहां के कारोबार और समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया। हालत यह है कि यहां के बुनकर मालिक से मजदूर बनकर रह गए हैं।

आजमगढ़

Published: January 10, 2022 12:00:59 pm

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
आजमगढ़. UP Vidhan Sabha Election 2022: मुबारकपुर विधानसभा क्षेत्र जिसने आजमगढ ही नहीं बल्कि वाराणसी को भी नई पहचान दी। यहां की बनी बनारसी साड़ियां देश में ही नहीं बल्कि विदेश में विख्यात थी। कभी यहां के दो लाख बुनकर खुशहाल थे। साड़ियां विदेश जाती थी तो उनको अच्छी कीमत मिलती थी लेकिन पिछले तीन दशक में सरकारों की उपेक्षा से न केवल साड़ी व्यवसाय गर्त में चला गया बल्कि बुनकर मालिक से मजदूर बन गये। आज यहां सिर्फ पलायन है और मजदूरी कर दो वक्त की रोटी का इंतजाम कर रहा है। विपणन केंद्र बना है लेकिन उसपर कुछ समृद्ध लोगों का कब्जा है। बुनकर मजदूरी कर गुजर बसर कर रहा है।

साड़ी बनाते बुनकर
साड़ी बनाते बुनकर

मुस्लिम बाहुल्य होने के कारण यहां चुनावी सरगर्मी पूरे शबाब पर है। बुनकरों के विकास को लेकर बड़े बडे दावे और वादे भी किये जा रहे है लेकिन हकीकत गांव में जाने के बाद साफ दिखती है। जनता की उम्मीदें इस चुनाव में क्या हैं यह जानने के लिए पत्रिका टीम आजमगढ़ के मुबारकपुर विधानसभा के अमिलो, इब्राहिमपुर, पिचरी, मुबारकपुर, सठियांव, बम्हौर गांव का दौरा किया। युवाओं और बुजुर्गो, महिलाओं, छात्राओं, मजदूरों से बात की और उनकी समस्याएं जानीं। गांवों में तो समस्याएं थी ही लेकिन नगरपालिका की स्थित भी बहुत अच्छी नहीं दिखी।

यहां लोगों ने अपनी जरूरत और प्राथमिकताओं पर खुलकर बात की। लोग चाहते हैं कि मुबारकपुर का साड़ी उद्योग और बेरोजगारी प्रमुख मुद्दा बने। साथ ही चाहते हैं कि सड़क, बिजली पानी, शिक्षा, चिकित्सा पर सरकार ध्यान दे। सूरज सिंह, अंकित कुमार, रामाश्रय यादव, संतोष कुमार, हरिकेश यादव, मिथिलेश पांडये, राजीव चौबे, असरफ, रहमान, अब्दुल सत्तार, एहसान अहमद, सुहेल, गुफरान, फैजान, इस्तियाक, यासिर आदि ग्रामीणों के मुताबिक उनकी समस्याओं पर कोई सरकार ध्यान नहीं देती। उन्होंने बुनकर समाज से आने वाले हफीज को कभी यह सोच कर विधायक बनाया था कि शायद वे ही उनका दर्द समझ ले लेकिन वे भी कभी मुड़कर नहीं देखे। आज हमारा व्यवसाय पूरी तरह खत्म होने की कगार पर है। अपने ही करघे पर मजदूरी करनी पड़ रही है। पानी बिजली की समस्या दिन प्रतिदिन बढ़ रही है।

सबसे बड़ी समस्या

बुनकर- बेराजगारी को दूर करने के लिए साड़ी उद्योग को प्राथमिकता दी जाय। बुनकरों के लिए खास योजनाएं बनायी जाय। बुनकर क्षेत्र में कम से कम 20 घंटे विद्युत आपूर्ति की जाय।

छात्र- क्षेत्र में अच्छे स्कूल कालेज नहीं हैं। जो हैं उसमें शिक्षकों का आभाव है। प्राथमिक शिक्षा का स्तर निम्न है।

किसान- इस क्षेत्र में उद्योग की काफी संभावनाएं है। चीनी मिल होने के कारण कृषि के अवसर भी अच्छे हैं लेकिन सरकार द्वारा कृषि को बढावा देने के लिए कोई योजना नहीं ला रही है। छोटी मंडी की स्थापना की जाय और किसानों को समय पर जरूरी संसाधन मुहैया कराई जाय।

व्यवसायी- लघु उद्योग को बढ़वा देने के लिए कोई योजना नहीं है। बिजली और यातायात संकट के कारण जो व्यवसाय हैं वे भी सिमट रहे हैं। सरकार के स्तर पर कोई सुविधा नहीं मिल रही है।

युवा-युवाओं के लिए रोजगार एक बड़ी समस्या है। पढ़े लिखे युवा रोजगार न मिलने के कारण बेकार हैं। स्व. रोजगार के लिए चल रही योजनाओं का लाभ भी इन्हें नहीं मिल रहा।

मुबारकपुर विधानसभा
इस विधानसभा में जमुड़ी, सठियांव, शाहगढ़, बम्हौर, इब्राहिमपुर, पिचरी, अमिलो आदि गांव आते हैं। यहां बसपा के शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली विधायक है। वर्ष 2012 में भी यहां जमाली ने जीत हासिल की थी। इसके पूर्व वर्ष 2007 में बसपा के ही पूर्व मंत्री चंद्रदेव राम यादव करेली यहां से चुनाव जीते थे। अब करैली सपा में हैं। जमाली ने हाल ही में बसपा छोड़ दिया है।

विधानसभा की टॉप प्राथमिकताएं
-बुनकर बाहुल्य क्षेत्र होने के बाद भी यहां करधा उद्योग के विकास के लिए कोई योजना नहीं है। इसके लिए खास योजना बनायी जाय।
-विपणन केंद्र को वास्तविक बुनकरों को आवंटित कर केंद्र में छोटी मार्केट विकसित की जाय।
-क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है। शासकीय अस्पताल खुलने चाहिए।
-शिक्षा के लिए क्षेत्र में पर्याप्त डिग्री कालेज नहीं हैं। इनकी संख्या बढ़े।
-क्षेत्र के कस्बों में अनियमित कालोनियों की भरमार है। इन्हें नियमित किये जाने की जरूरत है।
-पर्यावरण के क्षेत्र में कोई काम नहीं हुआ है। पर्यावरण की दिशा सुधारी जाए।
-ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन व्यवस्था ठीक से नहीं है। निजी वाहन चालक मनमानी करते हैं।
-महिलाओं को स्वालंबी बनाने के लिए स्वरोजगारपरक कोर्स चलाएं जाएं।
-ग्रामीण इलाकों में पेयजल और नाली निकास की सुविधा पर ध्यान दिया जाए।
-ग्रामीण इलाकों में कई जगहों पर नदी और नालों पर संपर्क पुल और पुलिया बने।
- ग्रामीण इलाकों में संपर्क मार्ग और सड़कों की हालत खस्ता है। इन्हें ठीक किया जाए।

ग्रामीणों की प्राथमिकताएं
-क्षेत्र में बेहतर बेहतर सड़क और जल निकासी की व्यवस्था हो।
-चिकित्सा व्यवस्था दुरुस्त हो, ताकि इलाज के लिए दूर न जाना पड़े।
-सरकारी स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई का स्तर हो बेहतर।
-बुजुर्गों को सामाजिक संरक्षण मिले इसके लिए कानून बनाया जाए।
-महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हर घर में शौचालय बनवाया जाय।
-पात्रों को पेंशन दी जाय और इसकी राशि बढ़ाई जाए।
-बुनकरों के लिए लोन की वयवस्था को आसान बनाया जाय।

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