जब अपनों के बीच पहुंचा जिले का ये लाल तो खुशियों से खिल उठा आजमगढ़ का आंगन

जब अपनों के बीच पहुंचा जिले का ये लाल तो खुशियों से खिल उठा आजमगढ़ का आंगन

संजरपुर की माटी में जन्में एक नौजवान पर जिले को नाज

आजमगढ़.  जीवन है इंसान का,काँटों का मैदान।
                     रो-रो कर मूरख जिये,हँस-हँस कर विद्वान।।
                        तूफ़ानों के बीच जो,करते नैय्या पार।
                       मंज़िल उनके चूमती,क़दमों को सौ बार।।


उपरोक्त पंक्तियों को निःसंदेह ही अपने जीवन में चरित्रार्थ किया है संजरपुर की माटी में जन्में एक ऐसे नौजवान ने जिसको लोग आर.ए.खान के नाम जानते व पहचानते हैं।

जी हाँ ! सही समझा आपने हम उसी संजरपुर की बात कर रहे हैं जिसके माथे पर आतंकियों का गाँव होने का एक ऐसी बदनामी का बदनुमा दाग़ लगा है जिसको माथे पर सजाकर कोई भी समाज में चलना पसन्द नहीं करेगा। उसी को लेकर इस जनपद को लोगों ने क्या कुछ नहीं कहा किसी ने आतंक का गढ़ तो किसी ने आतंक की नर्सरी तक कह डाला गया। 

उसी माटी में १९६९ में स्व.मोहम्मद ताहा के आँगन में जन्मा अपनी धुन का पक्क़ा जिसकी प्रारम्भिक शिक्षा उसी संजरपुर के मक़तब में हुई तथा हाईस्कूल की परीक्षा स्थानीय बी.आई.सी.इण्टर कालेज,बीनापारा से सन् १९८४में प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण करने के बाद इण्टरमीडिएट एंव ग्रेजुएशन शिबली नेशनल कालेज से१९८९ में उत्तीर्ण करने के बाद पोस्ट ग्रेजुएशन गढ़वाल विश्वविद्यालय से किया। तत्पश्चात प्रतियोगियात्मक परीक्षा की तैयारी कराने की दिशा में अपने कैरियर को देखा।

इनके द्वारा सन् २०००में देहरादून में प्रयाग़ आई.ए.एस. एकेडमी की स्थापना की गयी। सन् २००३में मात्र तीन वर्ष में सिविल सर्विसेज़ में इस संस्थान से तीन आई.ए.एस.अठारह पी.सी.एस. तथा दो दर्जन से अधिक पीसीएस(जे) में प्रतियोगी कामयाब रहे। अबतक सैकड़ों की संख्या में प्रतियोगी सिविल सर्विसेज़ में इस संस्थान से सफलता प्राप्त करके के नये आयाम स्थापित कर चुके हैं।

देखते ही देखते यह संस्थान उत्तराखण्ड का नम्बर वन संस्थान के रूप में परिवर्तित हो चुका है।प्रतियोगितात्मक शिक्षा को प्रमोट करने के लिये सरकार द्वारा २०१५में पुरस्कृत किया गया। इनके द्वारा कई पुस्तकों का लेखन भी किया गया है। जिसमें से उत्तराखण्ड सामान्य ज्ञान सर्वाधिक लोकप्रिय एंव सर्वश्रेष्ठ है जिसको सभी कोचिंग सेन्टर पढ़ाते हैं।


विगत तीन वर्षों से संविधान विशेषज्ञ के रुप में सभी परिचर्चा में भाग ले रहे हैं।
विगत वर्ष उत्तराखण्ड की सरकार ने मदरसा बोर्ड का चेयरमैन बनाकर सम्मानित किया है। चेयरमैन बनने के बाद पहली बार अपनी जन्मस्थली पहुँचने पर संजरपुर ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र ने अपने इस होनहार पुत्र,भाई का स्वागत करने के लिये उमड़ पड़े।
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