आखिर क्यों आजमगढ़ में सैकड़ों महिलाएं उतरीं सड़क पर

अधिकारियों पर लगाया मनमानी का आरोप, बोली छह माह से निलंबित है दुकान फिर भी नहीं कर रहे दूसरे कोटेदार का चयन

आजमगढ़. यूपी में सत्ताक भले ही बदल गई हो लेकिन आम आदमी की मुसीबत कम होने का नाम नहीं ले रही है। सोमवार को ऐसा ही एक मामला सगड़ी तहसील क्षेत्र के महराजगंज ब्लानक के इटौरा दयाल गांव का सामने आया। यहां गांव की सरकारी गल्लेग की दुकान पिछले दो दशक से एक ही व्यकक्ति के पास है और वह खुलेआम ग्रामीणों का शोषण कर रहा है। अहम बात है कि छह माह पूर्व शिकायत की जांच में अनियमितता मिलने पर कोटे को निलंबित कर दिया गया लेकिन स्थारई प्रबंध आज तक नहीं किया गया। मजबूर गांव की महिलाओं ने सोमवार को डीएसओ कार्यालय का घेराव कर प्रदर्शन किया। अधिकारी के आश्वािसन पर वे वापस लौटी।


जिला पूर्ति कार्यालय पर प्रदर्शन कर रही महिलाओं का आरोप था कि गांव का कोटेदार दबंग किस्मप का है। वह कभी समय से खाद्यान और तेल का वितरण नहीं करता है। जब कभी वितरण करता भी था तो मानक से कम देता है। चीनी वह कभी नहीं देता। विरोध करने पर कोटदार गांव के लोगों से मारपीट पर उतारू हो जाता है और धमकी देता है। खाद्यान समय से न मिलने के कारण गरीबों को काफी दिक्कात का सामना करना पड़ता है।


अधिकारियों से वे कोटेदार की शिकायत वषो से करते आ रहे है लेकिन अधिकारी हमेशा उसे बचाने का प्रयास करते है। छह माह पूर्व दबाव बनाने पर अधिकारियों ने जांच की तो अनियमितता मिलने पर दुकान निलंबित कर दिया और गांव के कोटे को दूसरी जगह अटैच कर दिया। अब खाद्यान के लिए लोगों को दूर तक भटकना पड़ता है।


हम लंबे समय से मांग कर रहे है कि दुकान को निरस्तत कर ग्रामसभा की बैठक बुलाकर नये सिरे से कोटेदार का चयन किया जाय लेकिन विभाग के लोग सुनते ही नहीं है। मजबूरन आज आज उन्हेंो धरना प्रदर्शन और कार्यालय का घेराव करना पड़ रहा है। ग्राम प्रधान विजेंद्र सिंह ने बताया कि कोटेदार की अनियमितता से सभी त्रस्त  है लेकिन अधिकारी क्यो् उसका पक्ष लेते है समझ से परे है। बहरहाल जिला पूर्ति अधिकारी द्वारा कार्रवाई का आश्वा सन देने पर ग्रामीण लौट गए लेकिन तत्काहल मांग पूरी न होने पर धरने की चेतावनी दी।

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