Baghpat: 40 हजार का बिल नहीं चुकाने पर सवा साल से नर्सिंग होम में ही रखे हुए हैं नवजात को- Video

Highlights

  • Baraut थाना क्षेत्र के ऊषा नर्सिंग होम के डॉक्‍टरों पर लगा आरोप
  • पीड़ित ने नवजात को दूसरे शख्‍स को बेचने का भी लगाया आरोप
  • Doctor ने आरोपों को बताया निराधार, कहा- बच्‍चा उसी समय दे दिया था

By: sharad asthana

Updated: 06 Jan 2020, 02:56 PM IST

बागपत। दंपती ने एक नर्सिंग होम (Nursing Home) के डॉक्टरों पर 40 हजार रुपये का बिल जमा नहीं करने पर बच्चा नहीं देने का आरोप लगाया है। बच्चा मांगने पर धमकी देने का आरोप लगाते हुए पीड़ित परिवार कोतवाली बड़ौत (Baraut) में पहुंचा। पीड़ित ने तहरीर देकर थाना पुलिस (Police) से कार्रवाई की मांग की है। वहीं, नर्सिंग होम की डॉक्टर ने खुद पर लगाए गए आरोपों को निराधार बताकर जांच कराने की मांग की है। फिलहाल, पुलिस के अधिकारी ने भी बच्चा बेचने की आशंका जताई है।

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सवा साल पुराना है मामला

दरअसल, मामला करीब सवा साल पुराना है। मोहर सिंह की पत्नी शिखा के साथ कोतवाली बड़ौत क्षेत्र के बिजरौल गांव में रहते हैं। 15 सितंबर 2018 को शिखा को बड़ौत में ही ऊषा नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था। यहां पर उसे एक बेटा पैदा हुआ था। आरोप है कि डॉक्टरों ने डिलीवरी का का बिल 40 हजार रुपये बना दिया था। इसे दंपती जमा नहीं कर पाया। दंपती का आरोप है कि डॉक्टर ने रुपयों के बदले उनके बच्चे को अस्पताल में ही रख लिया था। उसके बाद जब भी वे बच्चे को लेने जाते तो डॉक्टर रुपये लाने की बात कहकर उन्‍हें भगा देते। थोड़े-थोड़े करके वे उनको कई बार रुपये दे चुके हैं। अब जब दंपती बचे हुए रुपये लेकर नर्सिंग होम में पहुंचे तो भी डॉक्टर ने बच्चा नहीं दिया। दंपती ने यह आरोप भी लगाया कि नवजात को मुजफ्फरनगर के किसी शख्‍स को बेच दिया गया है।

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थाने में दी तहरीर

बेटा नहीं मिलने से परेशान पीड़ित दंपती कोतवाली बड़ौत पहुंचा। उन्होंने तहरीर देते हुए बच्चा दिलाने और डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। पीड़ित मोहर सिंह ने कहा कि 15 सितंबर 2018 को न‍र्सिंग होम में उनको लड़का हुआ था। उन्‍होंने अपना बच्‍चा मांगा तो उनसे पहले पैसे जमा करने को कहा गया। बच्‍चे को अस्‍पताल वालों ने रख लिया था। उनको 40 हजार रुपये का बिल बताया गया था। उन्‍होंने कई बार थोड़-थोड़े करके अस्‍तपाल के रुपये दिए लेकिन बच्‍चा नहीं मिला।

यह कहा डॉक्‍टर ने

वहीं, नर्सिग होम की डॉक्‍टर डॉ. तेषु हुड्डा का कहना है कि 15 सितंबर 2018 में एक पेशेंट आया था। उसका ऑपरेशन स बच्‍चा हुआ था। उसको खून की कमी भी बताई गई थी। बाद में उसको खून भी चढ़ाया गया था। उन्‍होंने अस्‍पताल का पूरा हिसाब कर दिया था। बच्‍चा उनको सौंप दिया गया था। उनको फंसाया जा रहा है। उनके ऊपर लगे आरोप निराधार हैं। इस बारे में बागपत के अपर पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार सिशौदिया ने कहा कि बड़ौत में ऐसा मामला सामने आया है। ऊषा नर्सिंग होम में बच्‍चा हुआ था। मुजफ्फरनगर के आदमी को उसको बेचने का आरोप लगा है। बड़ौत थाने के एसआई को जांच के निर्देश दिए गए हैं। जांच के बाद जो भी तथ्‍य मिलेंगे, उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

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