गोशाला में भूख-प्यास से तड़प कर दम तोड़ रहे गोवंश, VIDEO देखकर खौल जाएगा खून

गोशाला में भूख-प्यास से तड़प कर दम तोड़ रहे गोवंश, VIDEO देखकर खौल जाएगा खून

Iftekhar Ahmed | Publish: Feb, 28 2019 02:11:08 PM (IST) Bagpat, Bagpat, Uttar Pradesh, India

गोशाला में गोवंशों के खाने के लिए चारे की व्यवस्था नहीं होने से बिगड़े हालात

बागपत. गाय पर देश में राजनीति तो खूब होती है। गाय के नाम पर आम नागरिक से लेकर पुलिस इंस्पेक्टर तक की बेकाबू भीड़ जान ले लेती है। लेकिन, जब गायों की सेवा की बात आती है तो कोई भी इस के लिए तैयार दिखाई नहीं देता है। हालात ये है कि राज्यभर में गो रक्षा और गो सेवा के नाम पर जो गोशाला बनाए गए हैं। वह भी गायों के लिए एक कैद खाना बन गया है, जहां गोवंश तिल-तिलकर मरने को मजबूर हैं।

यह भी पढ़ें: पाकिस्तान को सबक सिखाने पर भाजपा विधायक ने पीएम मोदी के लिए कर दिया ऐसा काम

उत्तर प्रदेश के बागपत में फरवरी माह में लाखों की लागत से बनकर तैयार हुई गौशाला गोवंशों लिए मौत गृह बन गई है। यहां चारे की किल्लत से जूझ रहे गोवंश मौत के आगोश में समाने लगे हैं। लेकिन, इस गोशाला के जिम्मेदार लोग इतना सब कुछ होने के बाद भी कोई कदम उठाने के लिए तैयार नहीं है। गोवंशों की इस हालत पर समाज के लोगों में आक्रोश फैल रहा है। इस लापरवाही से गुस्साए लोगों ने जिला प्रशासन से तुरंत कड़ा कदम उठाने की मांग की है।

यह भी पढ़ें: पाक पर हमले के बाद हिंदू धर्म गुरु बोले, देशवासी बिल्कुल न करें यह काम, नहीं तो हो सकता है नुकसान

बागपत के मितली गांव में चार फरवरी को गौवंश आश्रय स्थल का उदघाटन किया था। इस मौके पर ग्रामीणों के चेहरे पर खुशी नजर आ रही थी। इस मौके पर सीडीओ बागपत और विधायक केपी मलिक भी मौके पर पहुंचे थे और गोवंश को मीठा खिलाकर इस गो आश्रय स्थल का शुभारंभ किया था, लेकिन अब यह आश्रय स्थल गोवंशों के लिए मौत गृह बन गया है। प्रशासन की अनदेखी के चलते 20 दिनों में दो बछड़े और दो गाय की मौत हो चुकी हैं। वहीं, चारे की व्यवस्था न होने से कई गोवंशों की हालत नाजूक बनी हुई हैं। सांड छोटे गौवंशों को टक्कर मारकर उन्हें चोटिल कर रहे हैं। उनके उपचार के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। इससे नाराज इलाके के लोगों ने डीएम से गौशाला में चारे और चोटिल गौवंशों के इलाज की व्यवस्था कराने की मांग की है। वहीं, ग्राम प्रधान पति सतीश राणा का कहना है कि गौवंशों के चारे के लिए आसपास के गांवों के किसानों से सम्पर्क कर चारे की व्यवस्था की जा रही हैं।

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned