Special Interview: देश की पहली महिला WWE रेसलर ने कहा- 'सीएम योगी को इतना भी नहीं मालूम'

डब्लूडब्लूई (WWE) रेसलर और यूपी की बेटी कवीता दलाल (KAVITA DALAL) से पत्रिका की खास बातचीत।

By: Rahul Chauhan

Updated: 03 Jan 2019, 02:32 PM IST

सचिन त्यागी

बागपत। युवाओं में पिछले कुछ वर्षों से डब्लूडब्लूई (WWE) का क्रेस तेजी से बढ़ा है। जहां इसमें अभी तक विदेशी रेसलर लड़ते नजर आते थे, अब इसमें भारतीय रेसलर्स भी अपनी बाजुओं का जोर दिखा रहे हैं। यूपी की बेटी कवीता दलाल (KAVITA DALAL) भी इसमें देश का नाम कर रही हैं। पत्रिका ने उनसे पूछे कुछ सवाल, जिनके मिले ये जवाब-

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सवाल- योगी सरकार में खिलाडियों का कैसा ख्याल रख रही है, आगे बढाने के लिए क्या किया जा रहा है?

जवाब- कवीता कहती हैं कि योगी जी अच्छा काम करते हैं। इतना तो उनसे मेरा सम्पर्क नहीं रहा, मैं तो इस बात से भी थोड़ी निराश हूं कि जब वो प्लेयर्स के लिए इतना कुछ कर रहे हैं तो क्या उनको इतना मालूम नहीं कि यूपी की एक पहली महिला डब्लूडब्लूई में देश का नाम रोशन कर रही है, उसकी भी खबर ले लेनी चाहिए।

kavita dalal

सवाल- बागपत के स्कूल में आने का क्या उद्देश्य है?

जवाब- मेरी हमेशा से कोशिश रही है कि जो चीज मैंने देखी है, मैंने सहन की है, मैं चाहती हूं की मैरी छोटी बहनें वो चीज सहन ना करें। मैं उनको हमेशा मोटिवेट करने का काम करती हूं। मेरा लडकियों के आगे बढ़ाने का सपना है। डब्यूडब्यूई की रेस्लिंग छोटे कपडों में होती है, लेकिन मैंने सूट सल्वार पहनकर फाईट की है। इसके पीछे मेरी सोची थी कि जो लडकियां मेरे पास आये उनके सामने यह समस्या न आये।

सवाल- सरकार की तरफ से क्या सहयोग मिला?

जवाब- मुझे सरकार से कोई अपेक्षा नहीं है, क्योंकि जब मैं वेट लिफटिंग करती थी, तब मैंने बहुत सारे मेडल भी लिए। मुझे लगता है कि जो हमारा हिन्दुस्तान की खेल नीति है, वो प्रोपर तरीके से काम नहीं कर रही। जो नीचे लोग हैं, वह प्लेयर्स से बहुत ज्यादा भेदभाव करते हैं। ये चीज मैंने सहन की है और इतने सारे मेडल लेने के बाद जब मैं जॉब के लिए सीएम के पास गयी थी और लाईन में अपने डाक्यूमेंट लेकर खडी थी। तो मुझे तब ये बात समझ आयी की क्या फायदा हमारी मेहनत का, हमें भीख मांगनी पड रही है। वहां पर मुझे ऐसा लगा था कि आज के बाद मैं लाईन में नहीं लगूंगी।

kavita dalal

सवाल- आज यहां पहुंची है क्या उद्देश्य है?

जवाब- मुझे जहां भी मौका मिलता है मैं लडकियों को मोटीवेट करने का काम करती हूं। सबसे ज्यादा जो मेरा मेन टारगेट है इस समय डब्लूडब्लूई मार्च में बॉम्बे में ट्राई लेने आ रहा है और ये लडकियों के लिए बहुत अच्छा मौका है। तो मैं उनको बताना चाहती हूं, क्योकि आप इसमें अपनी किस्मत जरूर आजमा सकते हैं। अपने आप को साबित कर सकते हैं और समाज को जवाब दे सकती हैं कि हम कामयाब हो गये।

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सवाल- देश में लड़कियों को लेकर सोच को क्या कहेंगी?

जवाब- लडकियों की काबलियत को यहां पर कम आंका जाता है कि आप रेस्लिंग नहीं कर सकते या आपके अंदर इतनी ताकत नहीं है। लड़कियों को हमेशा कमजोर की नीयत से देखा जाता है, लेकिन लडकियों ने कामयाब होकर इंडिया का राम रोशन किया है।

सवाल- समाज को लेकर आपके सामने क्या समस्या आयी?

जवाब- मुझे समाज का बहुत ज्यादा विरोध सहना पडा और किसान परिवार से हूं तो मुझे बहुत सारी आर्थिक परेशानी भी आई। लेकिन मेरे अंदर एक ही पॉजेटिव बात थी कि मैं कभी रूकी नहीं। ऐसी सोच के खिलाफ मैंने काम किया, मुझे लोगों की सोच बदलनी थी। वो मैं डब्लूडब्लूई में आकर कर पाई।

सवाल- छोटे कपडों को लेकर क्या ब्यान होते रहते हैं?

जवाब- जो लोग सोचते हैं कि रेस्लिंग छोटे कपडे में होती है तो मैंने सूट सिल्वार पहनकर रेसलिग कर यह दिखा दिया है और उनकी सोच को बदला है।

सवाल- रेसलिंग से लडकियों के साथ छेड़छाड़ की घटनाएं रूक सकती है?

जवाब- इससे हम अंकुष की बात तो नहीं कर सकते हैं, जो लोगोें की गंदी सोच है, जो उनके दिमाग की सोच है। उसको कोई नहीं बदल सकता, लेकिन उनसे मुकाबला करने के लिए हम तैयार हो सकते हैं। हर लडकी को इतना मजबूत होना चाहिए।

Rahul Chauhan
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