जेई ने बिजली विभाग में किया करोड़ों का घोटाला, जांच करने एमडी की टीम पहुंची

जेई ने बिजली विभाग में किया करोड़ों का घोटाला, जांच करने एमडी की टीम पहुंची

Ashutosh Pathak | Publish: May, 21 2019 02:05:04 PM (IST) Bagpat, Bagpat, Uttar Pradesh, India

  • बिजली विभाग में करोड़ों का घोटाला
  • जेई पर हर महीने गबन करने का आरोप
  • एमडी की टीम जांच करने पहुंची बागपत

बागपत। विभाग में हुए गबन के मामले में एमडी की टीम सोमवार का बागपत पहुंची, जहां विद्युत वितरण खंड प्रथम ने बागपत कार्यालय का रिकार्ड खंगाला। जिससे गबन की रकम का सही आकंलन किया जा सके। इस अवसर पर एसई द्वारा गठित की गई विभागीय टीम ने भी मेरठ से आई टीम का पूरा सहयोग किया। टीम ने लेजर के अलावा आरोपी को जारी की गई रशीद बुकों के संबध में भी जाकारी ली। इस दौरान अधिशासी अभियंता भी टीम के साथ मौजूद रहे।

दरअसल गत 15 मई को टीजी-2 वर्तमान में गाजियाबाद में जेई के पद पर तैनात सुरेश कुमार को विभाग में किए गए करीब 1.45 करोड़ का गबन करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में जांच के बाद जेई समेत 5 अधिकारियों के विरूद्ध कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। जेई को गबन के आरोप में जेल भेजा जा चुका है, जबकि अन्य अधिकारियों को निलम्बित करते हुए उनके विरूद्ध कार्रवाई की संस्तुति की गई है।

ये भी पढ़ें : इस बात को लेकर बीच सड़क पर दुकानदार और महिला के बीच जमकर हुई मारपीट,पिटाई देखें लाइव वीडियो

इस प्रकरण की जांच के लिए एसई रामवीर सिंह ने एक टीम का गठन किया था। टीम को एक सप्ताह के अंदर अपनी जांच रिपोर्ट देने के लिए कहा गया था। इसके अलावा विद्युत वितरण निगम के एमडी ने भी अपने स्तर से एक जांच टीम गठित की थी और टीम को तीन दिन के अंदर जांच कर अपनी रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे। एमडी की टीम सोमवार को बागपत पहुंची और एसई रामवीर से इस मामले में विचार विमर्श किया।

टीम में महाप्रबंधक लेखा एवं सम्प्रेक्षा आडिट एचके अग्रवाल, अधिशासी अभियंता शुभम शर्मा आईटी नोएडा, अधिशासी अभियंता वाणिज्य एके सिंह व अमित कुमार लेखाधिकारी मेरठ शामिल हैं। एसई से मिलने के बाद टीम सीधे अधिशासी अभियंता विद्युत वितरण खंड प्रथम बागपत के कार्यालय पहुंची और वहां पहुंचकर रिकार्ड की जांच शुरू की।

टीम आरोपी की नियुक्मि तिथि 13 फरवरी 2008 से उसकी तैनाती अवधि 8 मार्च 2019 तक के रिकार्ड की जांच करेगी ताकि गबन की वास्तविक राशि का आकंलन किया जा सके। टीम ने लेखा रजिस्टरों के अलावा बिल बुकों का निरीक्षण किया। इसके अलावा टीम आरोपी की तैनाती अवधि में उसे जारी की गई रशीद बुकों के संबंध में जांच करेगी और पता लगायेगी कि आरोपी को कितनी रशीद बुक जारी की गई थी तथा अभी उसके पास कितनी रशीद बुक शेष हैं।

वहीं एसई ने बताया कि उनके द्वारा गठित टीम जांच में एमडी की टीम का सहयोग कर रही है ताकि जांच कार्य शीघ्र पूरा कर रिपोर्ट एमडी को भेजी जा सके। एसई ने बताया कि जांच पूरी होने के बाद ही गबन की वास्तविक राशि का पता चल सकेगा। इस मामले में टीम अन्य अधिकारियों की भूमिका की भी जांच करेगी।

आरोपी प्रति माह करता था गबन

बताया जा रहा है कि आरोपी ने पहले माह करीब एक लाख रुपये का गबन किया था। जब यह मामला पकड़ में नहीं आया तो आरोपी का हौसला बढ़ गया और उसने इसके बाद प्रति माह गबन करना शुरू कर दिया और प्रति माह यह राशि भी बढ़ती चली गई। दिसम्बर 2018 से मार्च 2019 से उसने जमा किए गए बिलों की राशि में से करीब 1.45 करोड़ रूपये का गबन किया। इससे पूर्व उसने कितना गबन किया था, इससे जांच के बाद ही पर्दा उठ सकेगा।

 

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned