National Webinar - प्राकृतिक नियमों के पालन से ही प्रकृति का संतुलन

लिटरेचर एण्ड सोसायटी विषय पर नेशनल वेबिनार का आयोजन में मुख्य वक्ता सहायक आचार्य अंग्रेजी डॉ. किरण देशवाल ने कहा उत्तम साहित्य उन्नत समाज का परिचायक

By: Gourishankar Jodha

Published: 10 Jan 2021, 10:30 AM IST

शाहपुरा। साहित्य समाज का दर्पण है। उत्तम साहित्य उन्नत समाज का परिचायक है। किसी भी राष्ट्र की भाषा एवं साहित्य के अध्ययन के आधार पर वहां की सभ्यता एवं संस्कृति के विकाश का सहज ही आकलन किया जा सकता है।
यह बात मुख्य वक्ता सहायक आचार्य अंग्रेजी डॉ. किरण देशवाल ने कही। वे कस्बे के बाबा गंगादास राजकीय महिला महाविद्यालय में शनिवार को प्राचार्य डॉ. अनामिका सिंह के निर्देशन में आयोजित लिटरेचर एण्ड सोसायटी विषय पर नेशनल वेबिनार में बोल रहे थे।

विद्यार्थियों को साहित्य की पुस्तकें पढ़ाना चाहिए
संयोजक सह आचार्य अंग्रेजी डॉ. सरिता बंग ने कहा कि विद्यार्थियों को साहित्य की अच्छी पुस्कतें पढऩी चाहिए। इससे ना केवल उनके ज्ञान में वृद्धि होगी, बल्कि वे जिम्मेदार नगारिक भी बनेंगे। इस अवसर पर महेश कुमार वेबिनार के तकनीकी सहायक थे।

प्रकृति के जीवों और नियमों को आत्मसात करने पर जोर
इसी प्रकार चिमनपुरा के बीएनडी राजकीय कला महाविद्यालय में वन्य जीवन परिस्थिति का लोक जीवन एवं प्रकृति के नियमों के संदर्भ में वेबीनार का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता सह आचार्य भूगोल डॉ. सीताराम कुमावत ने जैव विविधता विषय पर विवेचन करते हुए व्याख्यान दिया।

प्रकृति के जीवों और उनके नियमों को आत्मसात करें
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य डॉ. आर एल स्वामी ने प्रकृति के जीवों और उनके नियमों को आत्मसात किए जाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक नियमों के पालन से ही प्रकृति का संतुलन बना रह सकता है। डॉ. राकेश पारीक ने जैव विविधता के अन्य पक्षों पर प्रकाश डाला। डॉ. उर्मिल महलावत ने धन्यवाद ज्ञापित किया। संचालन डॉ. एकता गोस्वामी ने किया।

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