टिड्डी उड़ पाती उससे पहले हो गई उन पर ड्रोन से 'सर्जिकल स्ट्राइकÓ

कोरोना महामारी के दौरान पाकिस्तान से आने वाले टिड्डी दल ने न सिर्फ किसानों की नींद उड़ा दी है, बल्कि कृषि विभाग की बेचैनी भी बढ़ा दी है।

By: Ashish Sikarwar

Published: 28 May 2020, 10:29 PM IST

जयपुर. कोरोना महामारी के दौरान पाकिस्तान से आने वाले टिड्डी दल ने न सिर्फ किसानों की नींद उड़ा दी है, बल्कि कृषि विभाग की बेचैनी भी बढ़ा दी है। मंगलवार देर रात कानपुरा के खारड़ा में पहाड़ी की तलहटी एवं आस-पास क्षेत्र में उतरे टिड्डी दल को टै्रक्टर मशीन एवं दमकलों एवं ड्रोन से बुधवार अलसुबह करीब 4 बजे 'रासायनिक हमलाÓ कर भी खत्म करने की कोशिश की गई। हालांकि ड्रोन ज्यादा देर नहीं उड़ पाया। गनीमत रही कि टिड्डियों की वजह से फसलों में नुकसान नहीं हुआ। जानकारी के अनुसार नागौर जिले के डिडवाना क्षेत्र से सीकर होते हुए आए टिड्डियों के दल ने मंगलवार देर रात को सामोद के निकटवर्ती कानपुरा के खारड़ा में पहाड़ी की तलहटी, खाली पड़ी भूमि एवं आस-पास के पेड़-पौधों पर जगह बनाई। टिड्डियों के दल की सूचना पर कृषि आयुक्त डॉ. ओमप्रकाश, अन्य अधिकारी तथा राजस्व विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे।

 

बार-बार बैट्री बदलकर एक घंटे उड़ाया ड्रोन
सहायक कृषि मनीषा शर्मा के नेतृत्व में अन्य महिला कृषि पर्यवेक्षकों व कार्मिकों की टीम ने पानी, क्लोरोपाइरीफाश व लेम्बडा आदि को मिलाकर रासायनिक घोल किया। इसके बाद १६ टै्रक्टरों में लगे ड्रमों में घोल को भरा गया। इस दौरान जयपुर व चौमूं से भी चार दमकलें और पानी के टैंकर मंगवाए गए। इनकी सहायता से रातभर टिड्डियों को मारने का अभियान शुरू किया, जहां स्प्रे किया जाना मुश्किल था, वहां विभागीय अधिकारियों की मौजूदगी में दस लीटर रासायनिक घोल से भरी टंकी के साथ ड्रोन उड़ाया। हालांकि ड्रोन का बैट्री बैकअप मात्र १५ मिनट का होने के कारण बार-बार बैट्री बदलकर ड्रोन को करीब एक घंटे तक उड़ाया गया।

 

मशीन से करवाया स्प्रे
बुधवार सुबह कृषि अधिकारियों ने कानपुरा खारड़ा में बची हुई टिड्डियों को नष्ट करवाने के लिए जयपुर से फोगर मशीनें मंगवाकर फोगिंग करवाई। इससे पहले टिड्डियां कई पेड़ों की पत्तियों को चट कर गई थीं। बची हुई टिड्डियां उड़कर आमेर व जमवारामगढ़ तहसील होते हुए दौसा जिले में चली गई थी। गुरुवार को ये फिर आंधी (जमवारामगढ़) पहुंची, जहां से अलवर जिले में प्रवेश कर गईं।

 

चेतावनी को किया नजर अंदाज
नई दिल्ली. भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के प्रभारी और प्रधान वैज्ञानिक डॉ. जेपीएस डबास का कहना है कि खाद्य व कृषि संगठन (एफएओ) ने अफ्रीका से रवाना हुए टिड्डी दल की ईरान और पाकिस्तान फिर लगातार आगे बढऩे की जानकारी दी थी, लेकिन उस चेतावनी को अनसुना कर दिया गया। नतीजतन, ये प्राकृतिक आपदा यहां तक पहुंच गई। समय रहते इस आपदा को रोक लिया जाता तो इन टिड्डियों को आसानी से पश्चिमी राजस्थान में ही रोका जा सकता था। जिन हेलीकॉप्टर और ड्रोन की अनुमति अब दी जा रही है वो अगर रेगिस्तानी क्षेत्र में दे देते तो यह टिड्डियां इतना आगे नहीं बढ़ पाती। वहां घनी आबादी क्षेत्र नहीं है और हवाई स्प्रे के जरिए टिड्डी आसानी से समाप्त होती, लेकिन अब जहां टिड्डियां है वहां परिस्थितियां अलग है। मानसून तक यह और भयावह भी हो सकती हैं। मानसून में टिड्डियों की ब्रीडिंग शुरू हो जाएगी और पाकिस्तान की ओर से भी बड़े दल की आने की संभावना है।
ऐसे किया जा सकता है नियंत्रण
-टिड्डी का नियंत्रण रात्रि में 3 से सुबह 6 बजे तक ही सम्भव है।
- टिड्डी के खात्मे के लिए योजनाबद्ध रणनीति आवश्यक है।
-इसकी प्रभावी मॉनिटरिंग की जाए।
-अलग-अलग दिशा में टिड्डियों के फैलाव पर नजर रखें।
- खाली खेतों में इन्हें निशाना बनाया जा सकता है।
- किसानों और कृषि नियंत्रण केंद्रों का सहयोग लिया जाए।
- हवाई स्प्रे के जरिए टिड्डी आसानी से समाप्त हो जाती हैं।

Ashish Sikarwar
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