खूनी खनन लील चुका कई जिंदगी

खूनी खनन लील चुका कई जिंदगी
खूनी खनन लील चुका कई जिंदगी

Dinesh prashad Sharma | Updated: 23 Sep 2019, 11:48:58 PM (IST) Bagru, Jaipur, Rajasthan, India

अरावली पहाडिय़ों में अवध खनन तो हो ही रहा है, जहां लीज में खनन किया जा रहा वहां भी नियम विरूद्ध खनन किया जा रहा है, लेेकिन सुनने वाला कोई नहीं है।

दौलतपुरा. ग्रामीण क्षेत्र ने खनन विभाग ने लीज भले ही आवंटित कर दी हो, लेकिन लीज आवंटित के बाद खनन विभाग इस ओर कोई ध्यान नहीं देता। क्षेत्र में अरावली पहाडिय़ों में अवध खनन तो हो ही रहा है, जहां लीज में खनन किया जा रहा वहां भी नियम विरूद्ध खनन किया जा रहा है, लेेकिन सुनने वाला कोई नहीं है। यहां पर लीज धारकों ने नियम ताक पर रख दिए तथा इतनी गहराई तक खनन कर चुके कि कई स्थानों पर तो हादसे हो गए है। यहां टोड़ी मोड़ व खोराश्यामदास मेंं खनन कार्य करने के दौरान दो वर्ष के दौरान करीब एक दर्जन से अधिक लोग काल का ग्रास बन चुके हैं, लेकिन फिर भी संबन्धित विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहा। जिससे लीज धारकों के हौसले बुलन्द नजर आ रहे हंै। कुछ लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि लीज धारक प्रभावशाली होते हंै इसलिए इनके खिलाफ कोई आवाज नहीं उठाते है। ऐसे में साल दर साल हादसे बढ़ रहे हैं।
पहाड़ निगला, अब तलहटी भी नोंच रहे

कालवाड़ . खनिज विभाग सोता रहा और जयपुर-फलौदी मेगा हाइवे से मात्र आधा किलोमीटर की दूरी पर लालपुरा के नाथावाली पहाड़ को खनिज माफिया निगल गए और पाताल को नोंचने पर आमादा हैं। लालपुरा बस स्टैंड पावर हाऊस से आईदानकाबास-महरियों का बास जाने वाले रास्ते पर बांडी नदी के किनारे नाथावाली डूंगर करीब एक किमी. लम्बा तथा कई मीटर ऊंचाई तक था और इसे तीन चार किलोमीटर की दूरी से आसानी से देखा जाता था, लेकिन खनिज विभाग के अनदेखी के कारण पत्थर व मोरम का खनन करने वाले माफिया इसे डकार गए। कंप्रेशर मशीनों से बड़े बड़े हॉल कर ब्लास्टिंग से इसे तोड़ा गया। कई सालों तक हुए खनन के बाद अब पहाड़ का अस्तित्व ही खत्म हो गया।
लालपुरा का नाथावाली का पहाड़ क्षेत्र का ऐसा पहला पहाड़ है, जो अवैध खनने के कारण 90 सदी तक नष्ट हो चुका है। पहाड़ को माफियाओं ने करीब 50 फीट की गहराई तक खोद दिया है। जयरामपुरा के पास दादर एवं आसोजई पहाड़ों में पिछले 5 सालों में खनन के दौरान तीन लोगों की मौत हो चुकी है और हादसे में लगभग आधा दर्जन लोग घायल हो चुके हैं।

खनन अधिकारी लाचार, कार्रवाई के लिए नहीं मिलता पुलिस बल
पावटा. पावटा परिक्षेत्र के बुचारा, पंंच पहाड़ी, पाछूडाला, भूरी भडाज, रामपुरा, कालीबाय, फतेहपुरा समेत दो दर्जन स्थानों पर डेढ़ दशक खनन कार्य बे-रोकटोक जारी है। खनन माफियाओं के लिए खनन कार्य कामधेनू साबित हो रहा है। खनन माफियाओंं की दबंगई के कारण बुचारा व बनाडी बांध क्षेत्र में खान विभाग के अधिकारी की ओर से कार्रवाई तो दूर जाने से भी कतराते हैं। वहीं खनन अधिकारी और पुलिस एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर पल्ला झाड़ रहे हैं। यहीं हालात कालीबाय व भूरी भडाज गांव का है। यहां औसतन 200 ट्रैक्टर ट्रॉली बजरी के रोज निकाले जाते हैं। बनाड़ी बांध जिसकी डूब क्षेत्र का मुआवजा दिए जाने के बाद गत 10 सालों से लगातार बांध क्षेत्र में बजरी खनन हो रहा है। इसी प्रकार पंच पहाड़ी फतेहपुरा पाछूडाला सहित कई गांवों में चेजा पत्थर के करीब 100 ट्रक रोज निकल रहे हैं। बुचारा ग्राम में अवैध खनन से निकाला जा रहा पत्थर अजीतगढ़, सीकर जिले व जयपुर के कई गांवों में लगे पत्थर पिसाई प्लान्टों में पहुंचाया जा रहा है। यहां गत दिनों खान ढह जाने से एक जने की मौत भी हो चुकी है। बुचारा ग्राम में गत साल अवैध खनन को रोकने गए पुलिस दस्ते पर खनन माफियों ने हमला कर पुलिस द्वारा पकड़े गए ट्रैक्टर व व्यक्तियों को छुड़ा ले गए थे।

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