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दूसरों के घर कर रहे गुलजार, खुद के बेजार

- जॉबवर्क करने की मजबूरी
- सरकारी योजनाओं का भी नहीं मिल रहा लाभ
- बगरू के हस्तशिल्प कारीगरों के हाल बेहाल
- हस्तशिल्प कारीगर बोले... दर्द ना जाने कोय...

बगरू

Published: November 02, 2021 08:59:51 pm

जयपुर. दूसरों के घर-आंगन को सजाने वाले बगरू के हस्तशिल्प कारीगरों (Artisan) के लिए सरकारी उदासीनता के कारण स्वयं का घर खर्च चलाना भी मुश्किल हो रहा है। कला और हुनर की गहन जानकारी होने के बाद भी उनके सामने फाकाकशी की नौबत आ रही है। बगरू में करीब 7000 हस्तशिल्प कारीगर हैं जो बामुश्किल रोजीरोटी का जुगाड़ कर पा रहे हैं। इनका सरकारी स्तर पर बाकायदा आर्टिजन कार्ड भी बना हुआ है। ये आर्टिजन प्रतिमाह महज आठ से दस हजार कमा पा रहे हैं। जबकि ये ब्लॉक प्रिंटिंग और टाई एंड डाई के खासे जानकार हैं। इनके बनाए उत्पादों की विदेशों तक खासी मांग रहती है, लेकिन अपनी मेहनत का इन्हें पूरा लाभ नहीं मिल पाता है। मजबूरी में ये सभी मुफलिसी में जिंदगी गुजार रहे हैं।
दूसरों के घर कर रहे गुलजार, खुद के बेजार
प्रतीकात्मक
क्या है आर्टिजन कार्ड
हस्तशिल्प कारीगरों के लिए आर्टिजन कार्ड बनाया जाता है। यह आधार जैसा ही परिचय पत्र है। जिससे पहचान होती है कि संबंधित व्यक्ति किसी खास क्षेत्र के कारीगर हैं।

कार्ड से यह मिलता है लाभ
केंद्र सरकार की ओर से कारीगरों के लिए आर्टिजन कार्ड बनाए जाते हैं। कारीगर द्वारा व्यवसाय के लिए मुद्रा लोन व अन्य ऋण लिया जाता है तो ब्याज में 50 प्रतिशत की छूट दी जाती है। यानि लोन में इन्हें सब्सिडी मिलती है। वहीं हस्तशिल्प कारीगरों को प्रधानमंत्री बीमा योजना से भी बीमित कर दिया जाता है। सरकार द्वारा यदि हस्तशिल्प या इससे जुड़े मेलों का आयोजन किया जाता है तो कारीगरों को न्यूनतम दर पर स्टॉल आवंटित किए जाते हैं। आर्टिजन कार्ड में 72 प्रकार के कारीगरों को शामिल किया गया था।
प्रचार प्रसार का अभाव व जानकारी नहीं होने से पिछड़े
आर्टिजन को मिलने वाले मुद्रा लोन के स्थान पर नई तीन योजनाएं शुरू हो गई है। जिनके बारे में जरूरतमंदों को जानकारी नहीं होने से वे इसका फायदा नहीं उठा रहे हैं। वहीं उद्योग विभाग की ओर से भी प्रचार प्रसार के अभाव में आर्टिजन लाभ से वंचित हैं। कोविड के कारण दो साल से हस्तशिल्प मेलों का आयोजन बंद रहा। साथ ही हाट बाजारों में स्टॉल आवंटन भी नहीं हो पाया। मेलों में आने जाने सहित अन्य भत्ते भी कागजी फेर में उलझ गए हैं।
हकदार रह जाते हैं वंचित
बगरू में करीब 80 फीसदी जॉबवर्क होता है। यहां कुछ प्रभावशाली लोगों ने परिचितों, जरूरतमंदों के आर्टिजन कार्ड बना रखे हैं, जो इससे फायदा उठा रहे हैं जबकि वास्तविक हकदार इससे वंचित रह जाते हैं।
इनका कहना है....
मैंने लोन के लिए आवेदन किया था, लेकिन कई कमियां बताकर उसे रोक दिया गया। इसके साथ ही जो सरकारी योजनाएं आर्टिजन के लिए हैं उनका सरलीकरण किया जाना चाहिए, जिससे सभी इसका लाभ ले सकें। विभाग व बैंकों के कई चक्कर लगाने व कागजी प्रक्रिया में उलझने से योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा।
- धीरज छीपा, आर्टिजन कार्डधारी, बगरू
महिला आर्टिजन के लिए अलग से कोई सरकारी योजना संचालित हो रही है या नहीं इसकी जानकारी नहीं है। विभाग व बैंकों के कई चक्कर लगाने व कागजी प्रक्रिया में उलझने से योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा।
- शांति देवी बोल्या, आर्टिजन कार्डधारी, बगरू
अधिकारी बोले...
केन्द्र व राज्य सरकार की ओर से चली आ रही कोई योजना बंद नहीं हुई है। योजनाओं में फेरबदल किया गया है। जानकारी के अभाव में आर्टिजन व अन्य युवा इसका लाभ नहीं ले पा रहे हैं। पहले चली आ रही योजनाओं से भी बेहतर योजनाएं अभी संचालित हो रही हैं। प्रधामनंत्री रोजगार सृजन योजना, मुख्यमंत्री लघु उद्योग प्रोत्साहन योजना व महिलाओं के लिए इन्दिरा महिला शक्ति उद्यम प्रोत्साहन योजना संचालित हो रही है। कोविड के कारण हस्तशित्प मेले व हाट बाजार बंद हो गए थे। अब सभी की शुरुआत हो गई है।
- त्रिलोकचन्द वर्मा, सहायक निदेशक, जिला उद्योग केन्द्र जयपुर

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