अब 16 विवाह स्थलों पर नजर

पालिका ने जारी किए नोटिस, सात दिन का दिया समय

By: Kashyap Avasthi

Published: 12 Oct 2018, 11:25 PM IST

चौमूं. शहर में निर्धारित मापंदडों के विपरीत चल रहे विवाह स्थलों में दो को सीज करने के बाद पालिका प्रशासन ने नियम विरुद्ध चल रहे 16 विवाह स्थलों को नोटिस जारी किए हैं। अध्यक्ष ने शुक्रवार को कार्यालय टिप्पणी करते हुए शहर में संचालित विवाह स्थलों समेत अवैध विवाह स्थलों पर क्या कार्यवाही की। इसकी जानकारी मांगी है, लेकिन शहरभर में यही चर्चा बनी रही कि 16 विवाह स्थलों को पालिका प्रशासन सीज करेगा या नहीं। या फिर दो ही विवाह स्थलों को सीज करके इतिश्री कर ली जाएगी।
सूत्रों के अनुसार भरतपुर में मई, 2017 में एक विवाह स्थल की दीवार गिरने के बाद ढाई दर्जन लोगों की मौतों के बाद सरकार ने प्रदेश भर में विवाह स्थलों की जांच पड़ताल करने के आदेश जारी किए थे, जिसके चलते चौमूं नगरपालिका क्षेत्र में भी पालिका प्रशासन ने टीम गठित करके यहां संचालित विवाह स्थलों की जांच की थी, जिसमें सभी 18 विवाह स्थल कृषि भूमि पर मिले। साथ ही किसी ने भी निर्धारित मापदंडों की पालना नहीं कर रखी थी, जिस पर विवाह स्थलों के संचालकों को 12 जून 2017 को नोटिस जारी किए गए, लेकिन विवाह संचालकों ने इसकी परवाह नहीं की। इसे लेकर राजस्थान पत्रिका में २४ जुलाई 2017 को 'करोड़ों बकाया फिर भी पालिका मेहरबानÓ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया तो नगरपालिका ने फिर 8 अगस्त 2018 को नोटिस जारी किए। इसका समाचार भी पत्रिका में 9 अगस्त को चौमूं के 18 विवाह स्थलों के संचालकों को नोटिस जारी शीर्षक से प्रकाशित किया, लेकिन विवाह संचालकों ने परवाह नहीं की। बल्कि कई गार्डन के तो नाम तक बदल दिए गए। इसे पालिका प्रशासन ने गम्भीरता से लेते हुए पालिका के अधिशासी अधिकारी ने 11अक्टूबर 2018 को कार्रवाई करते हुए नाम बदलकर संचालित किए जा रहे जयविलास व राजविलास गार्डन को सीज कर दिया। इसे लेकर अधिशासी अधिकारी व अध्यक्ष में तकरार भी हुई।
अध्यक्ष ने की कार्यालय टिप्पणी

सूत्रों की मानें तो पालिकाध्यक्ष ने शुक्रवार को कार्यालय टिप्पणी की है कि अधिशासी अधिकारी द्वारा दो गार्डन सीज किए गए हैं, जिसकी जानकारी उन्हें नहीं दी गई, बल्कि मीडिया से मिली। इस संबंध में अवगत करवाएं कि उनमें नियमानुसार क्या कमियां थीं। यह भी बताएं कि चौमूं शहर में कुल कितने मैरिज गार्डन चल रहे हैं एवं मैरिज गार्डन चलाने के लिए क्या-क्या मापदंड हैं और जो मैरिज गार्डन चल रहे हैं, वे सब नियमानुसार वैध हैं या नहीं। साथ ही ये स्थानीय निकाय विभाग के इजाजतशुदा है या नहीं। और सभी मैरिज गार्डनों की नियमानुसार जमा करवाए गए शुल्क की स्थिति क्या है। अवैध मैरिज गार्डन पर क्या कार्यवाही हुई है एवं आगे की नियमानुसार की जाने वाली प्रस्तावित कार्यवाही की जानकारी मांगी गई है।
कार्रवाई से मचा हड़कम्प

पालिका प्रशासन की ओर से दो विवाह स्थलों को सीज करने के बाद अन्य विवाह स्थलों के संचालकों एवं बुकिंग करवा चुके लोगों में हड़कम्प मचा हुआ है। सूत्रों की मानें तो नवम्बर 2018 में देवउठनी एकादशी से वैवाहिक कार्यक्रमों की शुरुआत होगी। शादी-विवाह से जुड़े लोगों ने पहले से ही अधिकतर विवाह स्थलों को बुक करवा रखा है। शुक्रवार को दो-तीन विवाह स्थलों के संचालक पालिका कार्यालय भी पहुंचे, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों के नहीं मिलने के कारण बैरंग लौटना पड़ा।
कार्यशैली पर उठेंगे सवाल

यूं तो पालिका प्रशासन ने शहर के 16 विवाह स्थलों के संचालकों को नोटिस करके सात दिवस का मौका दिया, जिसमें विवाह स्थलों से जुड़े जरूरी दस्तावेज व पंजीयन शुल्क सहित जानकारी कार्यालय में उपलब्ध करवाने के आदेश दिए हैं। यदि सात दिवस में नोटिस के जवाब व विवाह स्थलों का नियमन नहीं करवाया तो कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। अब सवाल ये है कि पालिका प्रशासन पूर्व में भी इन संचालकों को कई बार नोटिस दे चुकी है, लेकिन इनके खिलाफ किया कुछ नहीं। इस बार फिर से नोटिस जारी किए गए हैं। सवाल ये है कि क्या प्रशासन दो विवाह स्थलों को सीज करने की तर्ज पर अन्य विवाह स्थलों को सीज करेगी या मामले को ठंडे बस्ते में डाल देगी। (का.सं.)
इनका कहना है...

दो विवाह स्थलों को सीज करने के बाद 16 विवाह स्थलों के संचालकों को नोटिस जारी किए हैं। यदि सात दिवस में संचालकों ने नोटिस का जवाब नहीं दिया तो उनको भी सीज किया जाएगा। इसमें कोई भेदभाव नहीं होगा।
सलीम खान, अधिशासी अधिकारी नगरपालिका चौमू

Kashyap Avasthi Desk/Reporting
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